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सत्ता बचाने के लिए चुनाव से पहले कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं पीएम नेतन्याहू, इजराइली विश्लेषक का दावा

Israel Election: इजराइल में कुछ ही दिनों बाद चुनाव है। जिसको लेकर राजनीति हलचल तेज है। इस बीच, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है।
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भारत

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Mukul Kumar

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Updated: 24 Oct 2026, 3:36 PM IST

Benjamin Netanyahu news

बेंजामिन नेतन्याहू(फोटो-ANI)

इजराइल में कुछ ही दिनों बाद चुनाव है। जिसको लेकर राजनीति हलचल तेज है। इस बीच, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है।

वहीं, हाल के कुछ सर्वेक्षणों की बात करें तो उनके गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। ऐसे में दावा किया जा रहा है कि नेतन्याहू चुनाव से पहले कोई ऐसा कदम उठा सकते हैं, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हो जाए

आसानी से कुर्सी नहीं छोड़ेंगे नेतन्याहू

इजराइल के जाफा में रहने वाले राजनीतिक विश्लेषक आबेद अबू शहादेह ने यह दावा किया है। अल जजीरा से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि नेतन्याहू लंबे समय से सत्ता में हैं और उनके इरादों को देखते हुए यह मानना मुश्किल है कि वह आसानी से अपनी कुर्सी छोड़ देंगे। आबेद ने कहा कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।

चुनाव से पहले कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं नेतन्याहू

आबेद अबू शहादेह ने खुलकर कहा कि नेतन्याहू चुनाव से पहले कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस तरह का कदम उठा सकते हैं।

उन्होंने बस इतना कहा कि नेतन्याहू लंबे समय से सत्ता संभाल रहे हैं और वह इसे छोड़ने की योजना नहीं बना रहे होंगे। ऐसे में अपनी राजनीतिक ताकत बनाए रखने के लिए वह हर विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सुरक्षा का डर बढ़ने पर दक्षिणपंथ की ओर झुक रहा समाज

इंटरव्यू के दौरान अबू शहादेह ने इजराइल के भीतर बदलते राजनीतिक माहौल के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि हाल के कुछ सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि जब इजराइली समाज खुद को ज्यादा खतरे में महसूस करता है, तो उसका झुकाव दक्षिणपंथी और अधिक कट्टर विचारों की ओर बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर लोगों की राजनीतिक सोच पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में कट्टर विचारों को समर्थन मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

हालांकि, फिलहाल सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। इससे चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।