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नए टैरिफ के बाद चीन का पलटवार, 6 अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया- ड्रोन एक्सपोर्ट पर भी रोक

China Drone Export Ban: लागू किए नए टैरिफ के बाद चीन ने पलटवार करते हुए 6 अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और अमेरिका को ​ड्रोन एक्सपोर्ट पॉलिसी पर भी रोक लगा दी है।
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Blacklists US Companies

चीन का बड़ा आर्थिक वार, अमेरिकी कंपनियां ब्लैकलिस्ट; ड्रोन एक्सपोर्ट पर सख्त प्रतिबंध,photo source@ANI

US China Trade Tensions: चीन ने अमेरिका के खिलाफ कई आर्थिक जवाबी कदमों की घोषणा की। इसके तहत छह अमेरिकी कंपनियों को प्रतिबंधों वाली ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया और अमेरिका को भेजे जाने वाले ड्रोन तथा उनसे जुड़ी तकनीक के निर्यात पर नियंत्रण और कड़ा कर दिया गया। चीन ने यह कदम जबरन मजदूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नए अमेरिकी व्यापार प्रतिबंधों के जवाब में उठाया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है, जब अमेरिका ने चीन सहित 50 से अधिक देशों पर नए टैरिफ (आयात शुल्क) लागू किए हैं। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापक व्यापार नीति का हिस्सा है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के लिए 'अनुचित' व्यापार घाटे को कम करने के उद्देश्य से यह कदम आवश्यक था।

6 अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध

बीजिंग ने छह अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Applied DNA Sciences और जियोसाइंस रिसर्च कंपनी Stratum Reservoir शामिल हैं। इन प्रतिबंधों के तहत चीन के नागरिकों और संगठनों को इन कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार के लेन-देन, सहयोग या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल होने से रोक दिया गया है।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि ब्लैकलिस्ट की गई इन कंपनियों ने "शिनजियांग से जुड़े अवैध अमेरिकी प्रतिबंधों को समर्थन और सहायता प्रदान की है, इसलिए उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।" संयुक्त राष्ट्र पहले शिनजियांग में मुख्य रूप से मुस्लिम उइगर अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन और मानवता के विरुद्ध संभावित अपराधों को लेकर चिंता जता चुका है। हालांकि, चीन इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है।

अमेरिका के सामने जताई गंभीर चिंता

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, टेलीफोन पर हुई बातचीत में चीन के वरिष्ठ व्यापार दूत हे लिफेंग ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के सामने नए व्यापार प्रतिबंधों को लेकर "गंभीर चिंता" व्यक्त की।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब चीन पहले भी अमेरिका पर चीनी कंपनियों को दबाने का आरोप लगा चुका है। हाल ही में अमेरिका ने अपनी सीमाओं के बाहर निर्मित ह्यूमनॉइड (मानव जैसी आकृति वाले) और क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाले) रोबोट के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

जबरन मजदूरी से जुड़ी चिंताओं के आधार पर लगाए गए नए अमेरिकी टैरिफ ऐसे समय में आए हैं, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए जवाबी टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लागू किया था, जिसकी अवधि पिछले महीने समाप्त हो गई।

हालांकि, पिछले वर्ष अक्टूबर में डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में कुछ स्थिरता आई थी। लेकिन शी जिनपिंग की 24 सितंबर को प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच एक बार फिर व्यापारिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।