
डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन। (Photo-IANS)
रूस की राजधानी मास्को में इस हफ्ते एक ऐसी बैठक हुई जिसके बारे में जानकारी फैलते ही दुनिया के कई देशों में खलबली मच गई। अमेरिका के सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ खुद रूस पहुंच गए।
इसको लेकर रूस के विदेशी खुफिया विभाग एसवीआर के प्रमुख सर्गेई नारिश्किन ने गुरुवार को बताया कि दोनों के बीच कामकाजी स्तर की बैठक हुई।
इसमें दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बात हुई। हालांकि, नारिश्किन ने यह भी बताया कि ऐसी मुलाकात कोई नई बात नहीं है।
यूक्रेन में युद्ध अभी भी जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें भी अटक गई हैं। ऐसे में सीआईए प्रमुख का मास्को दौरा कई सवाल खड़े कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दौरे को आधा-अधूरा नियमित बताया। क्रेमलिन ने इस सीक्रेट बैठक में क्या बात हुई इस पर चुप्पी साध रखी है।
उधर, अमेरिकी मीडिया में कुछ सूत्रों के हवाले से यह खबर है कि रैटक्लिफ ट्रंप का एक खास मैसेज लेकर रूस गए थे। उन्होंने रूस को साफ चेतावनी दी कि वह नाटो के किसी सदस्य देश पर हमला न कर। लेकिन न तो वाशिंगटन और न ही मास्को ने इस बात की पुष्टि की है।
इसको लेकर दोनों तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। नारिश्किन के मुताबिक, दोनों प्रमुखों ने अपनी-अपनी एजेंसियों के दायरे में आने वाले मुद्दों पर चर्चा की। ये मुद्दे संवेदनशील हैं इसलिए विस्तार से कुछ नहीं बताया गया।
रूस और अमेरिका के बीच रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण हैं। यूक्रेन युद्ध ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। ऐसे में खुफिया प्रमुखों की सीधी मुलाकात कई लोगों के लिए चौंकाने वाली है।
ट्रंप ने इस मुलाकात को बहुत बड़ा नहीं बताया। उन्होंने कहा कि ये सेमी-रूटिन है। क्रेमलिन भी बहुत कुछ नहीं बोल रहा। नारिश्किन ने सिर्फ इतना कहा कि बैठक हुई और ये असामान्य नहीं है। बाकी सब अटकलों के भरोसे है।
इस बैठक से यूक्रेन युद्ध पर कोई सीधा असर पड़ेगा या नहीं ये अभी साफ नहीं। लेकिन बड़े देशों के खुफिया प्रमुख जब आमने-सामने बैठते हैं तो उसके मतलब अलग-अलग निकाले जाते हैं। कुछ लोग इसे बातचीत का रास्ता खुलने का संकेत मान रहे हैं तो कुछ इसे दबाव बनाने की कोशिश।
Updated on:
27 Aug 2026 03:55 pm
Published on:
27 Aug 2026 03:55 pm
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