22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सऊदी अरब में फांसी की सजा: ड्रग्स तस्करी से आतंकवाद तक, क्या कहता है कानून?

सऊदी अरब में किन अपराधों के लिए मृत्युदंड दिया जाता है? जानें शरिया आधारित न्याय व्यवस्था, ड्रग्स तस्करी के मामलों, विदेशी कामगारों के कानूनी अधिकारों और निष्पक्ष सुनवाई से जुड़े सवालों के बारे में।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Anurag Animesh

•

Updated: 23 Oct 2026, 3:00 AM IST

Saudi Arabia Death Penalty news

AI Image-(ChatGpt)

Saudi Arabia: विदेश में नौकरी कर परिवार का भविष्य संवारने का सपना लेकर सऊदी अरब जाने वाले प्रवासी अब वहां के सख्त कानूनों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा में हैं। 14 अक्टूबर को दो बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी दिए जाने के बाद एक बार फिर सऊदी अरब में मृत्युदंड और विदेशी कामगारों के अधिकारों पर सवाल उठे हैं। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य के मामले में दोषी ठहराया गया था। वहीं, बांग्लादेश सरकार का कहना है कि उसे फांसी से पहले इसकी सूचना नहीं दी गई।

शरिया कानून के तहत सख्त सजा का प्रावधान


सऊदी अरब की न्याय व्यवस्था इस्लामी शरिया कानून पर आधारित है। यहां हत्या, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में मृत्युदंड दिया जा सकता है। कुछ गंभीर यौन अपराधों, अपहरण और सशस्त्र डकैती के मामलों में भी परिस्थितियों के आधार पर मौत की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, कुछ अपराधों में न्यायाधीशों को सजा तय करने का व्यापक अधिकार मिलता है।

ड्रग्स तस्करी के मामलों में बड़ी संख्या


मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की 7 जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2014 से जून 2025 के बीच सऊदी अरब में 1,816 लोगों को फांसी दी गई। इनमें 597 लोग मादक पदार्थों की तस्करी और 286 आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए थे। संगठन ने मृत्युदंड के बढ़ते इस्तेमाल और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता जताई है।

विदेशी नागरिकों के सामने कानूनी चुनौतियां


सऊदी अरब में बड़ी संख्या में विदेशी कामगार रहते हैं। अरबी भाषा की जानकारी नहीं होना, अनुवादक और कानूनी सहायता तक सीमित पहुंच तथा परिवार से दूरी उनके लिए न्यायिक प्रक्रिया को कठिन बना सकती है। मानवाधिकार संगठनों ने कुछ मामलों में दबाव में दिए गए बयानों और निष्पक्ष सुनवाई की कमी पर भी सवाल उठाए हैं।

गोपनीयता और राजनयिक सूचना पर सवाल


बांग्लादेश ने दोनों नागरिकों की गिरफ्तारी, मुकदमे और सजा से जुड़ी जानकारी मांगी है। विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के मामलों में वाणिज्य दूतावास को सूचना देने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का सवाल भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, हर मामले में प्रक्रिया और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। मृत्युदंड के बढ़ते आंकड़े सऊदी अरब की न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और मानवाधिकारों को लेकर बहस तेज कर रहे हैं।