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Saudi Arabia: विदेश में नौकरी कर परिवार का भविष्य संवारने का सपना लेकर सऊदी अरब जाने वाले प्रवासी अब वहां के सख्त कानूनों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा में हैं। 14 अक्टूबर को दो बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी दिए जाने के बाद एक बार फिर सऊदी अरब में मृत्युदंड और विदेशी कामगारों के अधिकारों पर सवाल उठे हैं। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य के मामले में दोषी ठहराया गया था। वहीं, बांग्लादेश सरकार का कहना है कि उसे फांसी से पहले इसकी सूचना नहीं दी गई।
सऊदी अरब की न्याय व्यवस्था इस्लामी शरिया कानून पर आधारित है। यहां हत्या, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में मृत्युदंड दिया जा सकता है। कुछ गंभीर यौन अपराधों, अपहरण और सशस्त्र डकैती के मामलों में भी परिस्थितियों के आधार पर मौत की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, कुछ अपराधों में न्यायाधीशों को सजा तय करने का व्यापक अधिकार मिलता है।
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की 7 जुलाई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2014 से जून 2025 के बीच सऊदी अरब में 1,816 लोगों को फांसी दी गई। इनमें 597 लोग मादक पदार्थों की तस्करी और 286 आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए थे। संगठन ने मृत्युदंड के बढ़ते इस्तेमाल और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता जताई है।
सऊदी अरब में बड़ी संख्या में विदेशी कामगार रहते हैं। अरबी भाषा की जानकारी नहीं होना, अनुवादक और कानूनी सहायता तक सीमित पहुंच तथा परिवार से दूरी उनके लिए न्यायिक प्रक्रिया को कठिन बना सकती है। मानवाधिकार संगठनों ने कुछ मामलों में दबाव में दिए गए बयानों और निष्पक्ष सुनवाई की कमी पर भी सवाल उठाए हैं।
बांग्लादेश ने दोनों नागरिकों की गिरफ्तारी, मुकदमे और सजा से जुड़ी जानकारी मांगी है। विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के मामलों में वाणिज्य दूतावास को सूचना देने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का सवाल भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, हर मामले में प्रक्रिया और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। मृत्युदंड के बढ़ते आंकड़े सऊदी अरब की न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और मानवाधिकारों को लेकर बहस तेज कर रहे हैं।
Published on:
23 Oct 2026, 3:00 AM IST
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