यूरोपियन सेंट्रल बैंक से आपात फंडिंग बढ़ाने की आस धूमिल हो जाने के बाद सोमवार सुबह ग्रीस सरकार ने चौंकाने वाला कदम उठा लिया।
प्रधानंत्री एलेक्सिस त्सिप्रास ने गैजेट पेपर पर डिक्री जारी कर देश के सभी बैंकों को सप्ताहभर के लिए बंद कर दिया। साथ ही देशवासियों से कहा है कि वे एटीएम मशीन से हर रोज 60 यूरो (4,257 रुपए) से ज्यादा न निकालें। एथेंस का शेयर भी बंद कर दिया गया है।
ग्रीस के केंद्रीय बैंक के मुताबिक देशभर के सिर्फ 40 फीसदी एटीएम में ही राशि है, बाकी एटीएम खाली हो चुके हैं।
किससे कर्ज लिया जाए,इसका जनमत संग्रह 5 जुलाई को होगा। पर्यटकों से कहा गया है कि वे एटीएम से ज्यादा राशि न निकालें।
खुद बढ़ाई मुश्किल
यहां संसदीय चुनाव के बाद वामपंथी सिरिजा पार्टी इन वादों के साथ सत्ता में आई कि सरकार बनते ही राहत पैकेज की शर्तों को ठुकरा दिया जाएगा। इससे जनता की मुश्किलें और बढ़ गईं।
मांगे थे 7 अरब यूरो
20 फरवरी को यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों के साथ ग्रीस ने कर्ज जुटाने की कोशिश की थी। 7 अरब यूरो का कर्ज मांगा था। पर यूनियन ने ये मांगें ठुकरा दीं।
ब्लैकमेल का आरोप
पीएम एलेक्सिस सिप्रास ने बेलआउट पैकेज की शर्तों को अस्वीकार कर यूरोपीय संघ पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया। इसके बाद पांच जुलाई को जनमत संग्रह का आह्वान किया।
सावधानी बरते भारत
एसोचैम का मानना है कि भारत को सावधान रहने की जरूरत है। ग्रीस का संकट गहराता है, तो रुपये की स्थिति भी कमजोर हो सकती है। हमें खासतौर से हमें घरेलू मांग, निवेश के क्षेत्र में सावधानी बरतनी होगी।
फैसले भारी पड़े
2001 ग्रीस यूरोजोन से जुड़ा। उम्मीद थी कि कर्ज हासिल कर लेगा, पर उसका ये फैसला भारी पड़ा।
2004 एथेंस में ओलंपिक खेल हुए। ग्रीस को यूरोजोन से भारी कर्ज मिला, 12 अरब डॉलर खर्च कर डाले।
2005 देश का राजकोषीय घाटा बढ़ गया, तब तत्कालीन सरकार ने 5खातों में हेराफेरी कर आंकड़ों में देश की आर्थिक स्थिति अच्छी बताई।
राहत पैकेज
मई 2010 यूरोजोन, यूरोपियन सेंट्रल बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 10 अरब यूरो का राहत पैकेज दिया।
दिसंबर 2013 शर्तों के साथ दूसरा राहत पैकेज मिला, जो कि 130 अरब यूरो का था।
2014 ग्रीस ने फिर हाथ फैलाए, तो जनवरी 2015 से मार्च 2016 तक 8.2 अरब यूरो का कर्ज देने पर सहमति
भरोसा खोया
2009 जीडीपी की तुलना में 113 फीसदी अधिक कर्ज। कई देशों ने कर्ज देने से इनकार किया। 30 फीसदी तक पहुंची ब्याज दरें
2015 जब ग्रीस पुराने कर्ज को नहीं चुका पाया तो उस पर यूरोपियन सेंट्रल बैंक और आईएमएफ का भरोसा उठ गया और अपना कर्ज मांग लिया, जिसे मंगलवार तक चुकाना है।
पहले कुछ ऐसा था ग्रीस
ग्रीस एक विकसित अर्थव्यवस्था वाला है देश
80 फीसदी सेवा क्षेत्र, 16 फीसदी उद्योगों पर निर्भर
जीडीपी में दुनिया की 43वीं, क्रय शक्ति में 51वां देश
पर्यटन : 2013 में यहां 1.79 करोड़ पर्यटक पहुंचे
प्रति व्यक्तिआय में 37वां, खर्च में 40वां स्थान
विश्व की सबसे बड़ी मर्चेंट नेवी, 15.17त्नजहाज हैं
ग्रीस पर कितना कर्ज
यूरोपियन यूनियन के देशों का हाल
देश कर्ज
ग्रीस 170
इटली 135
पुर्तगाल 135
आयरलैंड 110
साइप्रस 100
स्पेन 90
फ्रांस 90
ब्रिटेन 80
जर्मनी 60
2014 की चौथी तिमाही में देशों की जीडीपी की तुलना में कर्ज प्रतिशत में
इसका पहला असर ग्रीस के बैंकिंग सिस्टम पर पड़ेगा, जो कि पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगा। पिछले दो हफ्ते में वैसे भी बैंकों से 40 लाख डॉलर से ज्यादा पैसा निकाला जा चुका है।
यूरो जोन
कई देशों ने साथ मिलकर यूरोजोन तैयार किया था, जिसके तहत एक ही करेंसी से लेन-देन किया जा रहा था। ग्रीस दिवालिया होता है, तो यूरोजोन का फेल होना निश्चित है।
यूरो
यह कहना मुश्किल है कि 30 जून के बाद यूरो का अन्य देशों की मुद्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। लेकिन यह तय है कि अगर ग्रीस को बेलआउट पैकेज नहीं मिलता है, तो यूरो का लडख़ड़ाना पक्का है। इसका लाभ डॉलर को मिलेगा।