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‘लाल सागर सभी जहाजों अब भी मुफ्त’, ईरान के साथ मीटिंग के बाद यमन हूती विद्रोहियों का बड़ा फैसला

Red Sea News: यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बाब-एल-मंडेब स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी जहाजों को मुफ्त में जाने देने का बड़ा फैसला लिया है। ईरान से मीटिंग के बाद हूतियों ने फीस लगाने की खबरों का खंडन कर दिया।
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भारत

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Mukul Kumar

Aug 01, 2026

Houthi Attack Saudi Arabia

लाल सागर में हूती विद्रोही। (फोटो- X/joop soesan)

यमन के हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि लाल सागर के बाब-एल-मंडेब स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों पर कोई फीस नहीं लगाई जाएगी।

यह खबर उन रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें दावा किया जा रहा था कि हूती ईरान के साथ मिलकर लाल सागर में सभी जहाजों से टोल लेने का प्लान बना रहे हैं।

तनाव बढ़ने के बीच हूती का बयान

हूती नियंत्रित समुद्री समन्वय केंद्र (एचओसीसी) ने शनिवार को एक साफ-साफ बयान जारी कर कहा कि बाब-एल-मंडेब स्ट्रेट से गुजरना पूरी तरह मुफ्त है। किसी भी तरह की फीस या पैसे की मांग करने वाला व्यक्ति या संगठन यमन सरकार या एचओसीसी का प्रतिनिधि नहीं है।

केंद्र ने शिपिंग कंपनियों से अपील की है कि वे किसी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें और कोई जानकारी भी न साझा करें। बता दें कि इस बयान से कुछ दिन पहले रॉयटर्स के हवाले से यह खबर आई थी कि हूती नेता जुलाई में तेहरान गए थे और वहां ईरानी अधिकारियों से लाल सागर में जहाजों पर फीस लगाने का प्रस्ताव चर्चा में था।

दुनिया भर होने लगी थी चिंता

यह खबर तब आई जब हूतीयों ने सऊदी अरब पर समुद्री नाकाबंदी घोषित कर दी थी। ऐसे में दुनिया के कई देशों और शिपिंग कंपनियों में चिंता फैल गई थी क्योंकि लाल सागर विश्व व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है।

इस पर एचओसीसी ने कहा कि उनका सुरक्षित पारगमन सेवा पूरी तरह स्वैच्छिक और बिना किसी लागत का है। उन्होंने किसी भी फीस की योजना से इनकार करते हुए कहा कि अभी तक ऐसी कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है।

लाल सागर में क्यों है इतना तनाव?

लाल सागर क्षेत्र में पिछले कई महीनों से हूती विद्रोहियों की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। उन्होंने इजराइल से जुड़े जहाजों पर हमले किए हैं और अब सऊदी अरब पर भी नाकाबंदी का ऐलान किया है।

इससे वैश्विक शिपिंग कंपनियां परेशान हैं क्योंकि कई जहाज अब अफ्रीका के लंबे रास्ते से गुजर रहे हैं, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ गए हैं। अगर लाल सागर में फीस वाली योजना लागू होती तो इससे पहले ही महंगे हो चुके व्यापार पर और बोझ पड़ता। लेकिन हूतियों के इस इनकार से फिलहाल राहत मिली है।