
फोटो में हूती विद्रोही (सोर्स-आईएएनएस)
Houthi Funding Rebels: दुनिया इस समय तेल-गैस के संकट से जूझ रही है। ईरान से तनाव और होर्मुज संकट ने कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। बीते कल खबर आई थी कि ब्रेंट क्रूड यानी कि कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। दूसरी तरफ यमन के हूती विद्रोही लगातार अपनी जंगी ताकत बढ़ा रहे हैं। सवाल है कि आखिर उनके पास इतना पैसा आ कहां से रहा है? चलिए आपको पूरा मामला बताते हैं…
‘अल-जजीरा’ और ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया यमन के कारोबार और व्यापार पर लगाया जाने वाला टैक्स है। इसके अलावा कस्टम ड्यूटी और अलग-अलग तरह की वॉर में सीधा इन्वॉल्मेंट लेकर साथ देश से मदद लेना है। इसका सबसे ताजा उदाहरण ईरान है। हूतियों ने खुलकर ईरान का साथ दिया। इजरायल को निशाना बनाया। मिडिल-ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बमबारी। ड्रोन हमले इत्यादि शामिल हैं।
बीते कल ही खबर आई थी कि हूती विद्रोही ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन से अटैक कर दिया है। जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल हुआ। यहां भी हूती विद्रोही के कमाई का एक पहलू छिपा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों की कमाई सिर्फ टैक्स और कस्टम तक सीमित नहीं है। अमेरिका के अनुसार, यह संगठन ईरान से जुड़े गैर-कानूनी तेल की बिक्री से भी हर साल 2.5 बिलियन डॉलर यानी की भारतीय करेंसी में करीब 21,250 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाता है। इसकी वजह ये है कि वह पहले ईरान के पड़ोसी देशों के तेल टैंकरों को निशाना बनाता है। नुकसान होने के बाद तेल की कीमतों में भारी उछाल होता है। फिर ईरान बाकी के देशों से डील करता है।
यही वजह है कि तेल संकट के बीच हूतियों की आर्थिक स्थिति को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ वे सऊदी अरब के तेल ढांचे और शिपिंग रूट को निशाना बनाते हैं। दूसरी तरफ तेल से जुड़े नेटवर्क से कमाई भी करते हैं।
बता दें सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद तेल संकट और गहरा गया है। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन की क्षमता रोजाना करीब 70 लाख बैरल तेल ले जाने की है। इसके बाधित होने से वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी। कीमतों ने देखते ही देखते आसमान छू लिया। रिपोर्ट्स की माने तो सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 5 परसेंट बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल हो गईं।
हूतियों की ताकत का एक और बड़ा कारण उनकी रणनीतिक स्थिति है। यमन लाल सागर और बाब अल-मंदाब जैसे अहम समुद्री रास्तों के करीब है। इन रास्तों पर तनाव बढ़ने से दुनिया भर में तेल और माल ढुलाई प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। हालांकि इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हालिया लड़ाई के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। मानवीय सहायता पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है।
यानी एक तरफ दुनिया में तेल-गैस संकट गहरा रहा है। दूसरी तरफ हूतियों की युद्ध अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है। टैक्स और कस्टम से अरबों डॉलर। तेल के कारोबार से अरबों डॉलर। और रणनीतिक समुद्री रास्तों पर दबाव। यही उनकी बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत का बड़ा आधार बन गया है।
Updated on:
15 Sept 2026 02:29 pm
Published on:
15 Sept 2026 02:28 pm
