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सऊदी अरब में अरामको के ठिकानों पर हूती हमला, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा

Houthi Rebels Yemen: सऊदी अरब में तेल कंपनी अरामको पर हूती विद्रोहियों के हमले के बाद भारत ने सख्त विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार को बड़ा खतरा है।
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भारत

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Pratiksha Gupta

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Updated: 9 Sep 2026, 12:50 PM IST

Houthis capture Mocha

Houthis capture Mocha : मोचा पर कब्जे का दावा, बाब-अल-मंदेब की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता(फोटो सोर्स-@imsushilkadam)

Houthi Attacks on Saudi Arabia: यमन के हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर इस तरह के हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं, क्योंकि इनसे पूरे क्षेत्र की शांति और समुद्री व्यापार सुरक्षा खतरे में पड़ती है। भारत ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई है।

73 लोग घायल, कई ऊर्जा ठिकानों में लगी आग

हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक 'सऊदी अरामको' के ठिकानों पर हमला किया। सऊदी अरब के अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों के कारण कई ऊर्जा संयंत्रों में पर भीषण आग लग गई, जिसमें कम से कम 73 लोग घायल हो गए हैं। दक्षिणी सऊदी अरब क्षेत्र भारत और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां 'जिजान रिफाइनरी' जैसे बड़े तेल कारखाने मौजूद हैं।

भारत ने जताई गहरी चिंता, कहा- समुद्री रास्ते को नुकसान पहुंचाना गलत

मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत, सऊदी अरब की संप्रभुता और उसके नागरिक क्षेत्रों पर हुए इन हमलों का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की आक्रामक गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ती हैं और लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले बाब-अल-मंदेब (Bab-el-Mandeb) जलमार्ग में जहाजों का आना-जाना खतरे में पड़ता है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत जरूरी है।

भारत पर क्यों पड़ेगा इसका असर?

हाल ही में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद किए जाने के बाद से सऊदी अरब के कच्चे तेल के निर्यात के लिए बाब-अल-मंदेब मार्ग सबसे अहम जरिया बन चुका है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल मार्च से जुलाई के दौरान सऊदी अरब ने इस रास्ते से 2025 की तुलना में 8 गुना अधिक कच्चा तेल समुद्री मार्ग से भेजा है।
हालांकि भारत आजकल रूस से भी काफी तेल खरीद रहा है, लेकिन सऊदी अरब आज भी भारत को सबसे ज्यादा तेल बेचने वाले शीर्ष 3 देशों में शामिल है। अगर इस समुद्री रास्ते में युद्ध की वजह से रुकावट आती है, तो भारत के लिए तेल की सप्लाई और उसकी कीमतों पर असर पड़ सकता है।

पाकिस्तान और तुर्किये ने भी जताया विरोध

साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र (UN) की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद यमन में सऊदी समर्थित सेना और ईरान समर्थित हूतियों के बीच संघर्ष एक बार फिर भड़क गया है। भारत के अलावा पाकिस्तान और तुर्किये ने भी हूती विद्रोहियों के इस हमले की आलोचना की है। बता दें कि दोनों देशों ने हाल ही में सऊदी अरब के साथ 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' साझा किया है।