
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी (Photo-IANS)
पश्चिम एशिया में जंग का दूसरा महीना चल रहा है और भारत अब तक चुप है। अभी तक भारत की ओर से कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। वहीं, भारत ने खुलकर की एक पक्ष का समर्थन भी नहीं किया है।
इस बीच, सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिरकार भारत युद्ध को लेकर क्यों चुप है? भारत के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन ने एएनआई से बात करते हुए इस सवाल का जवाब बड़े बेबाक तरीके से दिया।
पंकज सरन ने कहा कि भारत की इस रणनीतिक चुप्पी से अमेरिका, इजराइल और खाड़ी देशों को सीधा फायदा मिल रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत की यह खामोशी इन देशों के लिए छुपी हुई हमायत है तो उन्होंने कहा कि कुछ हद तक हां। उन्होंने कहा कि जब भी कोई बड़ा मसला हो तो उसमें आपके हित भी होते हैं। भारत की विदेश नीति हर तरह से संतुलन बनाकर चलती है।
सरन ने एक अहम बात भी बताई, जो आम तौर पर सरकारी बयानों में नहीं सुनाई देती। उन्होंने कहा कि भारत के हित खाड़ी के देशों के साथ भी हैं और ईरान के साथ भी।
भारत की नीति में एक पुरानी समझ यह भी रही है कि ईरान और पाकिस्तान को एक दूसरे के सामने रखा जाए। इसीलिए भारत ने हमेशा ईरान से अच्छे रिश्ते और बातचीत का रास्ता खुला रखा। यह संतुलन बनाए रखना भारत की विदेश नीति की एक पुरानी और जरूरी खासियत है।
सरन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल दौरे का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि यह एक राजनीतिक फैसला था और सरकार की अपनी सोच थी।
प्रधानमंत्री दो दिन पहले इजराइल गए थे तो उस तत्व को भी इस चुप्पी के संदर्भ में देखना होगा। सरन का साफ कहना था कि भारत की यह चुप्पी अमेरिकियों और इजराइलियों के लिए और खाड़ी देशों के लिए जाहिर तौर पर मददगार है।
सरन ने आगे कहा कि किसी मायने में भारत ने एक तरफ कदम रखा है। लेकिन अभी जब हम इस सबके बीच में हैं तब यह बताना बहुत मुश्किल है कि यह फैसला सही था या गलत। इसका जवाब इतिहास देगा।
यह बयान बताता है कि भारत के जानकार खुद भी मानते हैं कि यह एक नाजुक और जोखिम भरा रास्ता है। एक तरफ ईरान से पुराने और जरूरी रिश्ते हैं, दूसरी तरफ अमेरिका और इजराइल से बढ़ती नजदीकी है। इस खेल में चुप रहना भी एक बयान है और भारत अभी वही बयान दे रहा है।
Updated on:
31 Mar 2026 06:03 pm
Published on:
31 Mar 2026 06:03 pm
