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India Russia: रूस के साथ अपने रिश्ते सुलझाए भारत, रूसी राजदूत का बड़ा बयान

India Russia relations: रूसी राजदूत ने तब भारत, रूस, चीन और अन्य देशों को वैश्विक वित्तीय मामलों में समान रूप से बोलने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
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नई दिल्ली

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Jyoti Sharma

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Updated: 28 Oct 2024, 6:46 PM IST

India Russia relations: रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने सोमवार को भारत-रूस सहयोग के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें रूबल और रुपये में प्रत्यक्ष व्यापार भुगतान प्रणाली स्थापित करने के प्रयास शामिल हैं। इस तंत्र की चुनौतियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि दोनों देश वित्तीय बाधाओं के बावजूद द्विपक्षीय भुगतान को अधिक व्यवहार्य बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

रूस के साथ कैसा हो लेनदेन

अलीपोव ने कहा, "दोनों [भारत और रूस] रूबल-रुपया व्यापार तंत्र के बारे में सोच रहे हैं।" "मैं वित्त का बड़ा विशेषज्ञ नहीं हूं, लेकिन वर्तमान में रुपये और रूबल का कोई सीधा आदान-प्रदान नहीं है। समस्या विनिमय दर नहीं है; सबसे बड़ी चुनौती रूस के साथ लेनदेन के बारे में भारतीय बैंकों की अत्यधिक सतर्कता है।" उन्होंने इस हिचकिचाहट को संयुक्त राज्य अमेरिका के दबाव के लिए जिम्मेदार ठहराया, यह देखते हुए कि, "अमेरिका भारत और रूस के बीच लेनदेन पर नज़र रखने में सावधानी बरत रहा है, यहां तक कि प्रतिबंधों की धमकी भी दे रहा है।"

अलीपोव ने आगे सवाल उठाया कि भारत को केवल अमेरिका-संबद्ध देशों के साथ काम करने तक ही क्यों सीमित रखा जाना चाहिए, और कहा, "आज भारत के लिए रूस के साथ अपने संबंधों को सुलझाना आवश्यक है; कल अमेरिका भारत से बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को कम करने के लिए कह सकता है, उदाहरण के लिए। ऐसे देशों की एक अंतहीन सूची हो सकती है, जिस पर अमेरिका निर्णय लेता है।"

चीन के बारे में भी हो बात 

राजदूत ने तब भारत, रूस, चीन और अन्य देशों को वैश्विक वित्तीय मामलों में समान रूप से बोलने की आवश्यकता पर बल दिया। "भारत, रूस, चीन और अन्य सदस्यों, दुनिया के विशाल बहुमत के लिए वैश्विक वित्तीय सहयोग के विभिन्न मुद्दों में समान आवाज़ होना आवश्यक है। भारत की आवाज़ को ध्यान में रखा जाना चाहिए, और, बाकी दुनिया की तरह, भारत के पास सभी क्षमताएँ हैं," अलीपोव ने ब्रिक्स की भूमिका को "अंतर्राष्ट्रीय मामलों में वैश्विक दक्षिण और विकासशील दुनिया की आवाज़" के रूप में रेखांकित करते हुए कहा।

भविष्य के वित्तीय सहयोगों को संबोधित करते हुए, अलीपोव ने रूस से संबंधित लेन-देन के बारे में भारत के बैंकिंग क्षेत्र के भीतर बेहतर समझ के बारे में आशा व्यक्त की।

परमाणु ऊर्जा सहयोग पर भी बड़ा बयान 

परमाणु और रक्षा सहयोग की बात करते हुए अलीपोव ने कहा कि रूस भारत के परमाणु ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बना हुआ है। उन्होंने कहा, "हम कुडनकुलम में छह बिजली संयंत्र बना रहे हैं और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हमारा सहयोग बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है।" रक्षा क्षेत्र में अलीपोव ने ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना पर चल रहे काम की सराहना की, साथ ही भारत के "आत्मनिर्भर भारत" और "मेक इन इंडिया" पहलों के लिए रूस के समर्थन की भी सराहना की। उन्होंने कहा, "हम आत्मनिर्भर भारत के साथ व्यावहारिक सहयोग कर रहे हैं और टी-90 टैंक परियोजना भी इसमें शामिल है।"

अलीपोव ने रूस और भारत के बीच अपेक्षित उच्च-स्तरीय यात्राओं पर भी प्रकाश डाला, जिसमें नवंबर में होने वाली अंतर-सरकारी वार्ता भी शामिल है, जो बाहरी चुनौतियों के बावजूद द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती की पुष्टि करती है।

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