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मौत के 100 दिन बाद भी क्यों नहीं हुआ अली खामेनेई का अंतिम संस्कार, ईरान में उठे बड़े सवाल, जानिए इसके पीछे का कारण

Iran के पूर्व सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के 100 दिन बाद भी अंतिम संस्कार नहीं हुआ है। सुरक्षा और नेतृत्व संकट के कारण देरी हो रही है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ी है।

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भारत

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Ankit Sai

Jun 07, 2026

Ayatollah Ali Khamenei

Ayatollah Ali Khamenei

Ali Khamenei Death Controversy: ईरान के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे अयातोल्लाह अली खामेनेई (Ali Khamenei) की मौत के 100 दिन बीत जाने के बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। उनकी मौत अमेरिका और इजराइल (US-Israel) के संयुक्त हमले के बाद हुई थी, लेकिन अब तक उनके पार्थिव शरीर को लेकर भी पूरी स्थिति साफ नहीं है। इस देरी ने न सिर्फ ईरान के अंदर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तराधिकार तय, अंतिम संस्कार अभी भी अटका

ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि खामेनेई के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने नेतृत्व संभाल लिया है। हालांकि इसके बावजूद न तो उनकी कोई सार्वजनिक उपस्थिति सामने आई है और न ही किसी बड़े कार्यक्रम में उन्हें पेश किया गया है। माना जा रहा है कि सत्ता का यह बदलाव अभी पूरी तरह सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हो पाया है।

सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार टला

रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतिम संस्कार में देरी की एक बड़ी वजह सुरक्षा चिंताएं हो सकती हैं। मोजतबा खामेनेई को लेकर भी यह सवाल उठ रहे हैं कि हमले के बाद उनकी स्थिति क्या है, हालांकि ईरानी अधिकारियों का दावा है कि उन्हें मामूली चोटें आई थीं।

वहीं किसी सर्वोच्च नेता का अंतिम संस्कार केवल धार्मिक नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक आयोजन होता है। ऐसे में मोजतबा की सार्वजनिक मौजूदगी सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है, इसलिए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सावधानी बरती जा रही है।

आखिर खामेनेई का शव कहां है

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अली खामेनेई का शव आखिर रखा कहां गया है। ईरानी प्रशासन ने अब तक इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हमले में मारे गए अन्य अधिकारियों के शव कई हफ्तों बाद मिले थे और पहचान के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लेना पड़ा था।

धार्मिक परंपरा और असामान्य देरी

शिया इस्लाम में आमतौर पर शव को जल्दी दफनाने की परंपरा होती है, लेकिन इस मामले में 100 दिनों की देरी ने सभी को चौंका दिया है। आमतौर पर ऐसी देरी केवल बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही होती है। ईरानी सरकार एक बड़े स्तर के अंतिम संस्कार की योजना बना रही थी, जिसमें कई शहरों में जुलूस निकालने की तैयारी थी। खामेनेई को अंत में मशहद शहर में दफनाया जाना था। लेकिन अब तक न तो कोई आधिकारिक तारीख घोषित हुई है और न ही कोई स्पष्ट कार्यक्रम सामने आया है।

सोलिमानी के अंतिम संस्कार से तुलना

पहले भी ईरान ने कुद्स फोर्स कमांडर कासिम सोलिमानी के अंतिम संस्कार को एक बड़े राष्ट्रीय आयोजन में बदल दिया था। उस समय कई शहरों से गुजरता हुआ उनका जुलूस देशभक्ति और शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बना था। माना जा रहा है कि सरकार खामेनेई के लिए भी वैसा ही आयोजन चाहती है, लेकिन मौजूदा हालात इसे जटिल बना रहे हैं। ईरान ने नए नेतृत्व का संकेत दे दिया है, लेकिन जनता के सामने कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं है। न तो पूरा सत्ता हस्तांतरण दिखा है और न ही अंतिम विदाई।