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US Iran war: ईरान ने फिर मार गिराया अमेरिका का सबसे महंगा MQ-9 रीपर ड्रोन, 8 दिनों में चौथी बड़ी कामयाबी

MQ-9 Reaper Drone News: खाड़ी देशों में छिड़े महायुद्ध के बीच ईरान ने अमेरिकी अजेय ड्रोन बेड़े को तबाह करने का दावा किया है। अरबों डॉलर के वित्तीय नुकसान और हवाई संप्रभुता के दावों के बीच मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक सैन्य संतुलन हिल गया है।
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भारत

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Manoj Vashisth

Jul 19, 2026

Iran Shoots Down US Reaper Drone

Iran Shoots Down US Reaper Drone : अमेरिकी दावे हवा-हवाई? ईरान ने हफ़्तेभर में गिराया चौथा MQ-9 ड्रोन (फोटो सोर्स:@rohullahparwan1)

Iran Shoots Down US Reaper Drone: मध्य-पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच एक बेहद चौंकाने वाली सैन्य रिपोर्ट सामने आ रही है। ईरान के शक्तिशाली 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अहवाज प्रांत के ऊपर एक और अमेरिकी MQ-9 रीपर (Reaper) जासूसी ड्रोन को मार गिराया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले महज आठ दिनों के भीतर ईरान द्वारा मार गिराया गया यह चौथा अमेरिकी रीपर ड्रोन है। इस ताजा घटना ने पेंटागन के उन दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिसमें अमेरिकी हवाई प्रभुत्व को अभेद्य बताया जा रहा था।

1 अरब डॉलर से अधिक की फूंकी राख

ईरानी सेना के अनुसार, जब से अमेरिका-इजरायल युद्ध की शुरुआत हुई है, तब से लेकर अब तक उन्होंने अमेरिका के 30 से अधिक MQ-9 रीपर ड्रोन्स को आसमान से जमीन पर ला पटका है। साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, एक अकेले रीपर ड्रोन की अनुमानित लागत लगभग 34 मिलियन डॉलर (करीब 280 करोड़ रुपये) है। अगर ईरानी दावों को सच माना जाए, तो अमेरिकी सेना को अब तक सिर्फ ड्रोन्स के मामले में ही 1 बिलियन डॉलर (8,000 करोड़ रुपये से अधिक) का भारी-भरकम वित्तीय फटका लग चुका है। कुल मिलाकर ईरान का दावा है कि वह अब तक 150 से ज्यादा अमेरिकी ड्रोन्स को नष्ट कर चुका है।

खोखले साबित हो रहे अमेरिकी दावे?

यह घटनाक्रम अमेरिकी विदेश मंत्री के उस बयान को सीधे तौर पर चुनौती देता है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अमेरिकी सेना का ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण है। MQ-9 रीपर को दुनिया के सबसे आधुनिक और रडार की पकड़ में न आने वाले (स्टील्थ) ड्रोन्स में गिना जाता है, जो सर्विलांस के साथ-साथ सटीक मिसाइल हमलों के लिए कुख्यात हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान इतने बड़े पैमाने पर इन हाइटेक शिकारी ड्रोन्स को मार गिराने में कामयाब रहा है, तो निश्चित रूप से तेहरान के पास कोई नई और बेहद उन्नत एयर डिफेंस (हवाई सुरक्षा) प्रणाली आ चुकी है, जिसने वॉशिंगटन की रातों की नींद उड़ा दी है।

पूरे खाड़ी क्षेत्र में मची खलबली

यह तनाव सिर्फ आसमान तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र से लेकर पड़ोसी देशों तक फैल चुका है:

समुद्री मार्ग ब्लॉक: होर्मुज जलडमरूमनध्य (Strait of Hormuz) से असुरक्षित रास्तों से भागने की कोशिश कर रहे दो जहाजों के साथ दुर्घटनाएं होने की खबर है, जिन्हें रोक लिया गया है। वहीं दो अन्य जहाजों ने आगे बढ़ने से साफ इनकार कर दिया है।

बहरीन और कुवैत पर हमले: बहरीन में सायरन की गूंज के बीच वहां की सेना ने ईरान की ओर से दागे गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करने का दावा किया है। उधर कुवैत में भी ईरान ने एक बड़े ड्रोन हमले में गोला-बारूद के डिपो और एयर डिफेंस रडार सिस्टम को निशाना बनाया है।

इराक में भी एयरस्ट्राइक: उत्तर-पश्चिमी इराक में निर्वासित 'कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी' पर हुए एक अज्ञात ड्रोन हमले में कम से कम 8 लड़ाके गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का दो टूक रुख

इस पूरे घटनाक्रम और ईरान द्वारा पिछले महीने हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) को मानने से इनकार करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान के इस फैसले से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता (couldn't care less), जिससे साफ है कि अमेरिका पीछे हटने के मूड में नहीं है।

वैश्विक बाजार और रक्षा मामलों पर क्या होगा असर?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य मध्य-पूर्व का वह रणनीतिक गलियारा है जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। ईरान द्वारा जहाजों को रोकने और बहरीन-कुवैत पर बढ़ते हमलों के कारण आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। साथ ही, अमेरिकी खुफिया तंत्र अब इस बात की जांच में जुट गया है कि आखिर ईरान को यह नई एंटी-एयरक्राफ्ट तकनीक किसने मुहैया कराई है। साफ है कि खाड़ी देश अब एक ऐसे बारूद के ढेर पर बैठे हैं, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी तीसरे विश्व युद्ध का रूप ले सकती है।

(सोर्स: @aljazeera.com)