
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (फोटो-X अकाउंट Isabella)
Iran economic crisis: अमेरिकी सरकार लगातार ईरान पर कडे़ आर्थिक प्रतिबंध लगा रही है। ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का असर भी ईरानी अर्थव्यवस्था पर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि वॉशिंगटन का दबाव काम कर रहा है। खुद ईरान का शीर्ष नेतृत्व देश के गहराते आर्थिक संकट को स्वीकार करने लगा है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर लिखा कि ईरान का नेतृत्व अब यह मानने लगा है कि दुनिया जो देख रही है, वह सच है। उन्होंने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने खुद देश में आर्थिक संकट और जरूरी वस्तुओं की कमी को स्वीकार करते हुए कहा है कि किसी न किसी समय युद्ध खत्म होना ही चाहिए।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने आगे कहा कि ईरानी संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को स्वीकार कर लिया है। गालिबाफ ने कहा कि चाहे सैन्य ताकत कितनी भी हो, अगर देश में लोग भूखे हैं और आर्थिक गतिविधियां व घरेलू उत्पादन ठप है, तो सरकार लंबे समय तक टिक नहीं पाएगी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने चेतावनी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग तब तक इस शासन को मिलने वाली हर आर्थिक मदद और संसाधन का रास्ता बंद करता रहेगा, जब तक तेहरान पूरी तरह अलग-थलग नहीं पड़ जाता। उनका कहना था कि लक्ष्य इस दमनकारी शासन को मिलने वाली हर आर्थिक जीवनरेखा को काटना है।
बेसेंट ने बाइडेन और ओबामा प्रशासन पर भी हमला बोला है। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने वह कदम उठाया है जिसे पूर्ववर्ती सरकारें लंबे समय तक टालती रहीं। उनके मुताबिक, अमेरिका अब सिर्फ ईरान से जुड़े खतरे को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि उसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने आगाह किया कि जो देश अमेरिका के साथ खड़े रहेंगे, उन्हें साझेदारी का लाभ मिलेगा, लेकिन जो तेहरान से जुड़े रहेंगे, उन्हें एक कमजोर पड़ते और अलग-थलग होते शासन के साथ अलगाव झेलना पड़ेगा।
इस बीच ईरान के भीतर आम लोगों में आर्थिक हालात को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ऊंची महंगाई, बढ़ती कीमतें और स्थानीय मुद्रा में भारी गिरावट लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। युद्ध के बाद की अनिश्चितता और निराशा के बीच लोगों में मिश्रित भावनाएं देखी जा रही हैं - एक ओर टकराव का एक और दौर शुरू होने की आशंका है, तो दूसरी ओर कूटनीति के जरिए हालात सुधरने की उम्मीद भी बनी हुई है।
इसी कड़ी में कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। एक ओमानी प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा, जहां ओमान के विदेश मंत्री ने अपने ईरानी समकक्ष से मुलाकात की। इन बातचीत का केंद्र मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य रहा। इसके अलावा एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान पहुंचा, जो ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता कराने में मध्यस्थता कर रहा है।
हालांकि, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों के नए दौर की घोषणा के बाद बातचीत की संभावनाओं पर अनिश्चितता के बादल भी मंडरा रहे हैं। ईरानी अखबार अल-वेफाक के संपादक मुख्तार हद्दाद के मुताबिक, अमेरिका मध्यावधि चुनावों तक मौजूदा गतिरोध को प्रबंधित करने की रणनीति अपना रहा है, जिसके बाद वह व्यापक सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर सकता है। हद्दाद का मानना है कि ईरान इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ओमान के साथ जारी बातचीत का यह मतलब नहीं कि ईरान इसे फिर से खोलने जा रहा है - यह मुद्दा अलग है और तब तक नहीं बदलेगा जब तक अमेरिका उस समझौते की शर्तों को स्वीकार नहीं करता।
Updated on:
26 Aug 2026 12:08 pm
Published on:
26 Aug 2026 12:08 pm
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