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Russia Gas Plant Fire: रूस के गैस केमिकल प्लांट में लगी आग, 7 की मौत; 6 चीनी नागरिकों की गई जान, 9 अब भी लापता

6 Chinese Nationals Killed: चीन-रूस की बड़ी औद्योगिक साझेदारी से जुड़े इस प्रोजेक्ट में हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियां हादसे की असली वजह तलाश रही हैं।
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भारत

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Manoj Vashisth

Aug 26, 2026

Russia Gas Plant Fire

Russia Gas Plant Fire

Amur Gas Chemical Complex: रूस के सुदूर पूर्वी अमूर क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़े गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में आग और विस्फोट ने हड़कंप मचा दिया। हादसे में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें छह चीनी नागरिक हैं। सबसे बड़ी चिंता अब उन नौ चीनी कर्मचारियों को लेकर है, जिनका हादसे के बाद से कोई पता नहीं चला है। प्लांट में उस समय उपकरणों की टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम चल रहा था।

चीन-रूस की बड़ी औद्योगिक साझेदारी से जुड़े इस प्रोजेक्ट में हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियां हादसे की असली वजह तलाश रही हैं।

Russia Gas Plant Fire: टेस्टिंग के दौरान हुआ धमाका, फिर भड़की आग

हादसा अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में हुआ, जो रूस के अमूर क्षेत्र में चीन की सीमा के करीब स्वोबोदनी इलाके के पास स्थित है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कॉम्प्लेक्स की मुख्य पाइरोलिसिस यूनिट से जुड़े एक सहायक तकनीकी हिस्से में अंतिम परीक्षण और कमीशनिंग के दौरान विस्फोट हुआ। इसके बाद आग ने परिसर के एक हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया।

पाइरोलिसिस यूनिट किसी गैस-केमिकल प्लांट का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें हाइड्रोकार्बन फीडस्टॉक को उच्च तापमान पर तोड़कर एथिलीन जैसे रसायन तैयार किए जाते हैं, जिनका आगे प्लास्टिक और दूसरे पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होता है।

7 लोगों की मौत, 6 चीनी नागरिक शामिल

प्लांट प्रशासन ने बताया कि हादसे में सात लोगों की जान गई है। इनमें छह चीन के नागरिक हैं। इसके अलावा नौ अन्य चीनी कर्मचारियों के लापता होने की सूचना है। उनकी तलाश के लिए बचाव दलों को लगाया गया है और घटनास्थल पर राहत अभियान जारी है।

हादसे में बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की भी खबर है। कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या 100 से अधिक बताई गई है। हालांकि, शुरुआती और बाद के आंकड़ों में अंतर है और सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

आग बुझी, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं

प्लांट की ओर से बताया गया है कि आग पर काबू पा लिया गया है। हालांकि, कुछ तकनीकी गैसों के नियंत्रित तरीके से जलने की प्रक्रिया जारी रही, जिसके कारण आपातकालीन टीमें मौके पर बनी रहीं।

प्रशासन आसपास के क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता पर भी नजर रख रहा है। औद्योगिक गैसों से जुड़े हादसों में आग बुझने के बाद भी जहरीले या ज्वलनशील पदार्थों के रिसाव की आशंका रहती है, इसलिए पर्यावरणीय निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचने का दावा

कंपनी के मुताबिक, हादसे का असर कॉम्प्लेक्स के मुख्य उपकरणों पर नहीं पड़ा है। आग एक तकनीकी हिस्से तक सीमित रही। हालांकि, प्लांट की कमीशनिंग और उत्पादन शुरू करने की समयसीमा पर हादसे का कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

यह प्रोजेक्ट पहले से ही कई बदलावों और देरी से गुजर चुका है। मई 2025 में सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में पहली पॉलीएथिलीन उत्पादन की योजना 2026 की तीसरी तिमाही के लिए रखी गई थी, जबकि पॉलीप्रोपाइलीन उत्पादन 2027 में शुरू करने का लक्ष्य था।

रूस-चीन की बड़ी साझेदारी वाला प्रोजेक्ट

अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स सिर्फ एक औद्योगिक संयंत्र नहीं है, बल्कि रूस और चीन के बीच बड़े आर्थिक सहयोग का हिस्सा है। परियोजना में रूस की पेट्रोकेमिकल कंपनी SIBUR की 60 प्रतिशत और चीन की Sinopec की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SIBUR ने भी अपनी आधिकारिक जानकारी में यही हिस्सेदारी बताई है।

यह कॉम्प्लेक्स पूरा होने पर दुनिया की बड़ी पॉलिमर उत्पादन सुविधाओं में शामिल होने वाला है। परियोजना की डिजाइन क्षमता करीब 2.3 मिलियन टन पॉलीएथिलीन और 4 लाख टन पॉलीप्रोपाइलीन सालाना बताई गई है।

9 लापता चीनी कर्मचारियों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती

फिलहाल राहत और बचाव अभियान का सबसे अहम लक्ष्य लापता नौ चीनी कर्मचारियों का पता लगाना है। हादसे के बाद मलबे और प्रभावित हिस्सों में तलाश अभियान चलाया जा रहा है। मृतकों की पहचान और लापता कर्मचारियों की स्थिति को लेकर आने वाले आधिकारिक अपडेट बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

चीनी नागरिकों की बड़ी संख्या में मौत और उनके सहकर्मियों के लापता होने से यह मामला रूस-चीन दोनों के लिए संवेदनशील बन गया है