
ईरान का अमेरिका पर पलटवार (सोर्स: एक्स यूजर Middle East Report स्क्रीनशॉट)
Iran-Saudi Arabia explosions: बुधवार देर रात ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों और सऊदी अरब के एक बड़े एयरबेस पर जबरदस्त धमाके हुए। इन धमाकों की आवाज ने मिडिल ईस्ट में एकबार फिर से तनाव को बढ़ा दिया है। ईरान के तटीय इलाकों से लेकर सऊदी अरब तक दोनों जगह लोगों ने तेज धमाकों की आवाजें सुनीं, और अभी तक इसकी असली वजह साफ नहीं हो पाई है।
ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने अरब मीडिया के हवाले से बताया कि सऊदी अरब के किंग फहद एयरबेस पर कई धमाके हुए हैं। यह एयरबेस ताइफ शहर में स्थित है, जो सऊदी की सैन्य ताकत का एक अहम अड्डा माना जाता है। इसी बीच ईरान की न्यूज एजेंसी IRNA ने भी सऊदी मीडिया के हवाले से जानकारी दी कि ताइफ शहर में कम से कम दो जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई। अभी तक न तो सऊदी सरकार और न ही अमेरिका की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान आया है, जिससे स्थिति और उलझी हुई नजर आ रही है।
वहीं, ईरान के हॉर्मोजगान प्रांत के कई इलाकों में जोरदार धमाके की आवाज सुनी गई। ईरान ने बताया कि केश्म द्वीप के साथ-साथ सिरिक और मिनाब काउंटी में भी धमाके की आवाज से लोग दहल उठे। हॉर्मोजगान प्रांत के प्रशासन ने कहा कि केशम द्वीप के आसपास जो जोरदार धमाके की आवाज सुनी गई, वह समुद्र की तरफ से आई है। प्रशासन ने कहा कि हॉर्मोजगान प्रांत पर कोई सीधा हमला नहीं हुआ है। हालांकि स्थानीय लोगों में डर का माहौल जरूर बना हुआ है, क्योंकि यह इलाका पहले भी सैन्य गतिविधियों की वजह से सुर्खियों में रह चुका है।
उधर, बुधवार को अमेरिका के डलास में रिपब्लिकन पार्टी के एक कार्यक्रम में जाने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ चल रही जंग अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद खत्म हो जाएगी। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर समय काट रहा है, इस उम्मीद में कि अमेरिका में सत्ता बदलेगी और उसे परमाणु हथियार बनाने की छूट मिल जाएगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान चाहता है कि चुनाव में एक कमजोर सरकार आए, जो उसे नजरअंदाज करे और उसे परमाणु हथियार हासिल करने दे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गया, तो पूरी दुनिया मुश्किल में पड़ जाएगी। जब उनसे पूछा गया कि बातचीत दोबारा शुरू होगी या फिर सैन्य कार्रवाई तेज होगी, तो ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका जल्दबाजी में नहीं है, क्योंकि हाल की कार्रवाइयों से ईरान पहले ही काफी कमजोर पड़ चुका है।
उधर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान को सिरे से नकार दिया, जिसमें रुबियो ने यमन के हूती विद्रोहियों को ईरान का एजेंट बताया था। बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हूती अपने फैसले खुद लेते हैं और किसी के इशारे पर काम नहीं करते। उन्होंने इसका ठीकरा अमेरिका पर फोड़ते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में अस्थिरता की असली वजह अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और उसकी दबंगई भरी नीतियां हैं। बघाई ने साफ कहा कि अगर वाशिंगटन सच में शांति चाहता है, तो उसे बस एक काम करना होगा, यानी इस क्षेत्र में अपनी दखलअंदाजी बंद करनी होगी।
Updated on:
10 Sept 2026 07:53 am
Published on:
10 Sept 2026 07:52 am
