
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो- ANI)
Iran-US-War: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष अब खत्म हो गया है, लेकिन इसके आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव लगातार सामने आ रहे हैं। वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की नई रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि इस युद्ध ने अमेरिकी रक्षा तंत्र पर भारी वित्तीय दबाव डाल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य अभियानों में 34 अरब डॉलर से 42 अरब डॉलर तक खर्च होने का अनुमान है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह खर्च पहले से तय रक्षा बजट में शामिल नहीं था, जिससे अब अमेरिकी कांग्रेस पर अतिरिक्त फंडिंग का दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार युद्ध का सबसे महंगा हिस्सा लंबी दूरी की मिसाइल स्ट्राइक रही। अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) ने कुल 13,600 से अधिक हथियारों का उपयोग किया, जिनमें टॉमहॉक मिसाइल और जॉइंट एयर-टु-सर्फेस स्टैंडऑफ मिसाइल (JASSM) शामिल थी। केवल हथियारों पर ही लगभग 26.1 अरब डॉलर खर्च हुए। शुरुआती चरण में अमेरिकी सेना ने एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट कर एयर सुपीरियोरिटी हासिल की, जिसके बाद सस्ते जेडीएएम स्मार्ट बमों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया। क्षेत्रीय सहयोगी देशों ने कई ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रोककर अमेरिका की लागत कुछ हद तक कम करने में मदद की।
संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना को उपकरणों के नुकसान का भी बड़ा सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि 42 विमान और ड्रोन नष्ट और क्षतिग्रस्त हुए, जिनकी लागत 1.8 अरब डॉलर से 3.5 अरब डॉलर के बीच आंकी गई है। इसके अलावा ईरानी हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, बैरकों, हैंगर और गोदामों को भारी नुकसान पहुंचा। इन ठिकानों की मरम्मत और पुनर्निर्माण पर 4 अरब डॉलर से 9.4 अरब डॉलर तक खर्च आने का अनुमान है। लंबे समय तक सैनिकों की तैनाती और जोखिम भत्ते के कारण अतिरिक्त 750 मिलियन डॉलर खर्च हुए, जबकि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से 1.4 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा विभाग के अलावा अन्य संघीय एजेंसियों ने भी लगभग 1 अरब डॉलर खर्च किए। इसमें साइबर सुरक्षा, दूतावास सुरक्षा और परमाणु निगरानी जैसे कार्य शामिल रहे। पूर्व सैनिकों के लाभ पर अगले 30 वर्षों में 12 अरब डॉलर तक खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। मूडीज ने इस पूरे संघर्ष का व्यापक आर्थिक प्रभाव 132 अरब डॉलर बताया है, जिसमें केवल ईंधन कीमतों की बढ़ोतरी से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर 40 अरब डॉलर का असर पड़ा। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन अतिरिक्त खर्चों के लिए नई फंडिंग व्यवस्था करना है, ताकि सैन्य कार्यक्रम प्रभावित न हों।
Updated on:
25 Jun 2026 12:14 pm
Published on:
25 Jun 2026 12:00 pm
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