
मेटा दफ्तर। (फोटो- The Washington Post)
अमेरिका में एक बच्चे की मौत के बाद फेसबुक-इंस्टाग्राम की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। मेटा के खिलाफ अदालत में बड़ा मुकदमा शुरू हो गया है। कैलिफोर्निया की अदालत में सुनवाई के पहले दिन ही माहौल गर्म हो गया।
एक मां ने अपना दर्द बयां किया। मैरी रोडी नाम की एक महिला ने बताया कि उनके 15 साल के बेटे राइली बेसफोर्ड ने 2021 में खुदकुशी कर ली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि फेसबुक पर एक शिकारी ने उनके बच्चे को शिकार बनाया था।
मां ने साफ कहा- ये कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। ये उसी सिस्टम का नतीजा है जो बच्चों की बजाय कंपनियों की रक्षा करता है। बता दें कि अमेरिका के 29 राज्यों ने मेटा के खिलाफ ये मुकदमा दायर किया है।
इनमें कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी अगुवाई कर रहे हैं। राज्यों का आरोप है कि मेटा ने जानबूझकर फेसबुक और इंस्टाग्राम को बच्चों को लत लगाने वाले तरीके से बनाया।
राज्यों का यह भी आरोप है कि मुनाफा कमाने के लिए बच्चों को ज्यादा समय ऐप पर बिताने को मजबूर किया गया। इससे बच्चों में चिंता, डिप्रेशन और आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। साथ ही बच्चों के निजी डेटा का गलत इस्तेमाल भी किया गया।
राज्यों की वकील मेगन ओनील ने जूरी को बताया कि मेटा का मॉडल साफ है। यूजर्स को फंसाना, लंबे समय तक रोके रखना, उनका डेटा इकट्ठा करना और सच्चाई छुपाना। बच्चों के साथ ये तरीका खासतौर पर कारगर रहा।
वकील ने कोर्ट को आगे बताया कि मेटा ने बच्चों के दिमाग पर रिसर्च की और ट्रैक किया कि वो ऐप पर कैसे रिएक्ट करते हैं। एक इंटरनल ईमेल में इंस्टाग्राम चीफ एडम मोसेरी को लिखा गया था कि किशोरों का समय बढ़ाना ही लक्ष्य है। कुछ कर्मचारी इंस्टाग्राम को 'नशा' और खुद को 'नशा बेचने वाले' तक कहने लगे थे।
हालांकि, मेटा के वकील पॉल श्मिट ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया से जूझते हैं, ये बात सही है। लेकिन रिसर्च में किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और उनकी सेहत के बीच कोई साफ रिश्ता नहीं मिलता।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि मार्क जुकरबर्ग और कंपनी चाहते हैं कि सेवा अच्छी बने, खतरनाक नहीं। कर्मचारियों की निजी बातचीत में ऐसी भाषा हो सकती है, लेकिन प्रोडक्ट्स लत लगाने वाले नहीं हैं।
अदालत में पहला गवाह आर्टुरो बेजार सामने आए। ये मेटा के पूर्व सेफ्टी इंजीनियर हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी में 'जल्दी काम करो और चीजें तोड़ो' का नारा चलता था।
13 साल से कम उम्र के बच्चों को ऑनलाइन रोकने के लिए 'पूछो मत, बताओ मत' वाला रवैया अपनाया गया। रील्स जैसे फीचर्स बिना सेफ्टी सोच के लॉन्च कर दिए गए।
जज यवोन गोंजालेज रोजर्स फैसला करेंगी। अगर मेटा दोषी पाया गया तो जुर्माना अरबों डॉलर तक हो सकता है। राज्य चाहते हैं कि लाइक्स हटाए जाएं, अनलिमिटेड स्क्रॉल बंद हो, बच्चों के लिए टाइम लिमिट लगे और 13 साल से कम उम्र वालों को रोकने के सख्त नियम लागू हों।
अब जुकरबर्ग और मोसेरी भी गवाही देंगे। ट्रायल छह हफ्ते चलेगा। ये मुकदमा सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बड़ा टेस्ट माना जा रहा है। कई और कंपनियां भी ऐसे केसों का सामना कर रही हैं। मेटा के शेयर मंगलवार को करीब 4।4 फीसदी गिर गए।
Updated on:
19 Aug 2026 07:24 am
Published on:
19 Aug 2026 07:24 am
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