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2015 के भूकंप से तो बच गए, लेकिन इस बार नेपाल बाढ़ ने किसी को नहीं बख्शा, उजड़ गया पूरा परिवार

Nepal Flood: 2015 के भूकंप से बचे नेपाल के दर्जनों परिवार इस बार बाढ़ में उजड़ गए। सुरक्षित जगह बसाने के सरकारी वादे अधूरे रहे और अब कई लोग अपनों को खो चुके हैं।
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भारत

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Saurabh Mall

Sep 03, 2026

nepal flood

नेपाल बाढ़: दर्जनों परिवारों की दर्दनाक कहानी (इमेज सोर्स: काठमांडू पोस्ट और ANI)

Nepal Flood Tragedy: कभी जिस गांव में जिंदगी दोबारा बसाई थी, आज वहां सिर्फ तबाही बची है। 2015 के भूकंप ने इन परिवारों से घर छीना था। लेकिन इस बार नेपाल बाढ़ ने उनसे उनके अपने भी छीन लिए। किसी ने माता-पिता खोए, किसी ने बच्चे। कई परिवार ऐसे हैं, जिनके घर भी नहीं बचे और अब उनके पास लौटने के लिए गांव भी नहीं है। मानो सब कुछ खत्म हो गया है।

26 अगस्त, 2026 को नेपाल के रासुवा और नुवाकोट में भोटेकोशी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। सबसे दर्दनाक कहानी उन परिवारों की है, जो 2015 के भूकंप के बाद सुरक्षित जगह की तलाश में यहां आकर बसे थे। सरकार ने उन्हें दूसरी जगह बसाने का भरोसा दिया था। सालों तक यह वादा अधूरा रहा। अब वही बस्तियां बाढ़ की चपेट में आ गईं। सब तबाह हो गया।

भूकंप से बचकर नई जगह बसाए गए थे परिवार

बता दें रासुवा के सतबीसे में रहने वाले कमान सिंह तमांग ने 2015 का भूकंप झेला था। उनका घर पूरी तरह तबाह हो गया था। इसके बाद उन्हें दूसरे परिवारों के साथ सतबीसे में बसाया गया। उन्होंने वहां फिर से घर बनाया। जिंदगी पटरी पर लौटने लगी। लेकिन 26 अगस्त की बाढ़ ने सब कुछ खत्म कर दिया।

कमान सिंह खुद बाढ़ में बह गए। वह नही बचे…उनकी पत्नी और बच्चे भी नहीं बच सके। उनके भाई के मुताबिक, भूकंप के बाद यहां 65 से ज्यादा परिवार आकर बसे थे। बाढ़ में इनमें से कई परिवारों के लोग बह गए। स्थानीय निवासी राजन घाले ने कहा- हम भूकंप से बच गए थे। अब गांव भी नहीं बचा और गांव वाले भी नहीं।

सुरक्षित जगह का इंतजार करते रहे थे

कई परिवारों को विशेषज्ञों ने खतरनाक इलाकों से हटाने की सलाह दी थी। सरकार ने भी उन्हें सुरक्षित जगह पर बसाने की योजना बनाई थी। लेकिन यह काम पूरा नहीं हो सका। दंडगांव से कैंचलतार पहुंचे युवराज तमांग ने सोचा था कि अब उनका परिवार सुरक्षित है। लेकिन बाढ़ में उन्होंने अपने माता-पिता और चार साल के बेटे को खो दिया।

उन्होंने कहा- हम सुरक्षित जगह की तलाश में यहां आए थे। लेकिन यहां भी नहीं बच सके। ऐसी ही कहानी पूर्ण बहादुर घाले की है। उन्होंने अपने सात रिश्तेदारों को खो दिया। उनका कहना है कि उन्होंने सरकार से सुरक्षित जगह पर बसाने की मांग के लिए 100 से ज्यादा बार सिंह दरबार के चक्कर लगाए थे। हर बार उन्हें भरोसा मिला। लेकिन उन्हें वहां से हटाया नहीं गया।

अब घर नहीं, जमीन भी नहीं बची

वहीं बिदुर के प्रदीप अधिकारी ने कहा कि भूकंप ने उनका घर छीना था। लेकिन जमीन तब भी बची थी। इस बार बाढ़ ने जमीन तक छीन ली। कई लोग जान बचाकर दूसरे गांवों में पहुंचे हैं। उनके पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं हैं। कुछ परिवारों में सिर्फ एक व्यक्ति बचा है। कुछ ने आठ या नौ सदस्य खो दिए। खाल्टे के छेगु लामा भी ऐसे ही परिवार से हैं। बाढ़ में उनके कई रिश्तेदार लापता हो गए। गांव के सात लोग अभी भी नहीं मिले हैं।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि भूकंप प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह ले जाने की कोशिश की गई थी। लेकिन राजनीतिक बदलाव और दूसरी वजहों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब प्रशासन भी मान रहा है कि अगर परिवारों को समय पर सुरक्षित जगह पहुंचा दिया जाता, तो शायद नुकसान इतना बड़ा नहीं होता। इन परिवारों की त्रासदी सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं है। यह उन अधूरे वादों की कहानी भी है, जिनका इंतजार करते-करते कई जिंदगियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं।