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Robots: अब रोबोट को भी होगा दर्द का अहसास, वैज्ञानिकों ने बनाई गजब की तकनीक

वैज्ञानिकों ने एक आर्टिफिशियल ई-स्किन विकसित की है जो रोबोट्स को स्पर्श और दर्द का अहसास कराएगी। यह त्वचा न्यूरोमॉर्फिक प्रणाली पर आधारित है, जो मानव तंत्रिका तंत्र की नकल करती है।

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भारत

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Mukul Kumar

Jan 05, 2026

Humanoid Robot

रोबोट। (Image: Gemini)

अब तक हमने फिल्मों में ऐसे रोबोट देखे थे जो इंसानों की तरह लगते हैं और महसूस कर सकते है, लेकिन अब यह हकीकत बनने जा रहा है।

सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आर्टिफिशियल ई-स्किन विकसित की है, जो रोबोट्स को न केवल स्पर्श का अहसास कराएगी, बल्कि 'दर्द' महसूस होने पर प्रतिक्रिया भी देगा।

जिस तरह हमारा हाथ किसी गर्म चीज को छूते ही बिना सोचे-समझे पीछे हट जाता है, ठीक वैसी ही क्षमता अब रोबोट्स में होगी।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नई त्वचा 'न्यूरोमॉर्फिक' प्रणाली पर आधारित है, जो मानव तंत्रिका तंत्र की नकल करती है। आमतौर पर रोबोट्स को कुछ भी करने के लिए अपने मुख्य कंप्यूटर (ब्रेन) से निर्देश मिलने का इंतजार करना पड़ता है।

इसमें समय लगता है। लेकिन नई तकनीक से त्वचा में लगे सेंसर दर्द या खतरे को पहचानते ही स्थानीय स्तर पर 'रिफ्लेक्स' पैदा करेंगे।

क्यों जरूरी है यह आविष्कार?

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में जब ह्यूमनॉइड रोबोट्स हमारे घरों और अस्पतालों में हमारे साथ काम करेंगे, तो उनके लिए यह तकनीक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगी।

नई ई-स्किन की खासियत

  • यह हल्के से स्पर्श और तेज चोट के बीच अंतर कर सकती है।
  • यदि त्वचा का कोई हिस्सा डैमेज होता है, तो रोबोट को तत्काल पता चल जाएगा।
  • चूंकि यह मॉड्यूलर है, इसलिए खराब हुए हिस्से को किसी पुर्जे की तरह आसानी से बदला जा सकता है।

पुरानी तकनीक से कैसे अलग?

वर्तमान में ज्यादातर रोबोट्स में या तो स्पर्श की समझ नहीं होती, या वे केवल साधारण दबाव महसूस कर सकते हैं। ऐसे में वे खुद को होने वाले नुकसान को नहीं पहचान पाते। अब वह त्वचा के जरिए ऐसे खतरे भांप लेगा।