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पीएम मोदी के पुतिन से संबंध के चलते रूस ने यूक्रेन पर 2022 में नहीं किया परमाणु हमला

PM Modi Prevented Russia's Nuclear Attack On Ukraine: 2022 के अंत तक रूस का प्लान यूक्रेन पर परमाणु हमला करने का था। पर उसने ऐसा नहीं किया। इसके पीछे पीएम नरेंद्र मोदी की अहम भूमिका थी।

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Indian PM Narendra Modi with Russian President Vladimir Putin

रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच 24 फरवरी 2022 से युद्ध चल रहा है और इसे 2 साल से भी ज़्यादा समय हो चुका है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के आदेश पर उनकी सेना ने युद्ध की शुरुआत की थी और पुतिन यूक्रेन पर कब्ज़ा करना चाहते थे। इस युद्ध की वजह से यूक्रेन में भीषण तबाही मच चुकी है और जान-माल का भी काफी नुकसान हुआ है। पर पुतिन को अपने इरादे में कामयाबी नहीं मिली है और लगातार मिल रहे इंटरनेशनल सपोर्ट की वजह से यूक्रेनी सेना भी डटकर रूसी सेना का सामना कर रही है और उन्हें कई जगहों से खदेड़ भी चुकी है। इस युद्ध में कई मौकों पर रूस के परमाणु हमला करने की आशंका भी जताई गई। कहा गया कि रूस को इस युद्ध में जीत नहीं मिल पाने की वजह से पुतिन यूक्रेन पर परमाणु हमला कर सकते हैं। और 2022 के अंत में तो पुतिन ने ऐसा करने का प्लान भी बना लिया था। पर उन्होंने ऐसा किया नहीं। पुतिन के ऐसा न करने के पीछे भारत (India) के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अहम भूमिका रही।


पीएम मोदी के पुतिन से संबंध के चलते टला खतरा

हाल ही में सामने आई एक अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार पुतिन 2022 के अंत तक यूक्रेन पर परमाणु हमले के तैयारी में थे। पुतिन ने इसकी तैयारी भी कर ली थी और अमेरिका की सरकार भी इससे काफी चिंतित थी। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe BIden) के प्रशासन ने भारतीय सरकार से संपर्क करते हुए उनसे गुज़ारिश की कि परमाणु हमले के खतरे को टालने के लिए पीएम मोदी प्रयास करें। पीएम मोदी ने न सिर्फ पुतिन से इस बारे में बात की, बल्कि सार्वजनिक रूप से समय-समय पर इस बात पर भी जोर दिया कि रूस-यूक्रेन के के बीच विवाद का हल युद्ध नहीं, बल्कि शांति है और दोनों को इस मामले को शांति से सुलझाना चाहिए। पीएम मोदी ने पुतिन से यह भी कहा था कि यह दौर युद्ध का नहीं है। पीएम मोदी के पुतिन से संबंध की परमाणु हमले के खतरे को टालने में अहम भूमिका रही।


दूसरे देशों ने भी की मदद

अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार बाइडन प्रशासन ने भारत के साथ ही ऐसे अन्य देशों भी संपर्क किया जिनके रूस से सही संबंध थे। भारत के साथ ही उन देशों की तरफ से भी शांति से विवाद को सुलझाने पर जोर दिया गया। इससे रूस के यूक्रेन पर परमाणु हमले का खतरा टालने में मदद मिली।

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