
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एससीओ शिखर सम्मेलन में। (फाइल फोटो : IANS)
India-Russia tariff relations: अमेरिका की ओर से भारत पर बढ़ाए जा रहे टैरिफ दबाव के बीच, रूस (India-Russia tariff relations) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Modi) की भूमिका की खुल कर तारीफ की है। इस बात पर सेवानिवृत्त रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (Brigadier Hemant Mahajan) ने आईएएनएस को विस्तार से बताया कि ऐसा क्यों हो सकता है। हेमंत महाजन ने कहा कि पुतिन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के कारण चीन और भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं कर सकते। अगर ऐसा हुआ, तो इसका पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। क्योंकि भारत और चीन को मजबूरन ओपन मार्केट से तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी, जो किसी के लिए भी फायदेमंद नहीं होगा।
इसके अलावा, महाजन ने बताया कि इस टैरिफ से रूस को आर्थिक नुकसान होगा क्योंकि तेल बेच कर जो संसाधन रूस को मिलते हैं, वे कम हो जाएंगे। इसलिए पुतिन इस टैरिफ नीति के खिलाफ हैं।
जहां तक पीएम मोदी की तारीफ का सवाल है, तो महाजन के अनुसार, इसका कारण यह भी है कि दिसंबर में भारत और रूस के बीच एक महत्वपूर्ण वार्षिक शिखर सम्मेलन होने वाला है। इस सम्मेलन में दोनों देशों के आर्थिक, रणनीतिक और रक्षा सहयोग पर चर्चा होगी। पुतिन चाहते हैं कि भारत-रूस के संबंध और मजबूत हों ताकि रूस की अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचे। इसलिए वह पीएम मोदी की तारीफ करते हैं।
डिफेंस एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि भारत को तब तक रूस से सस्ता तेल खरीदना चाहिए जब तक कीमतें ठीक हों। अगर अमेरिका या अन्य देशों से तेल सस्ता मिलता है, तो भारत को वह विकल्प अपनाना चाहिए। क्योंकि इससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डेफिसिट काफी है, इसलिए भारत को अमेरिकी उत्पादों का आयात बढ़ाना चाहिए।
उनका विचार है कि सस्ते तेल की खरीद से भारत की अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी, चाहे वह रूस से हो या किसी और देश से। महाजन ने कहा कि भारत को हमेशा अपने राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।
इधर भारत-रूस के संबंधों और आने वाले शिखर सम्मेलन के परिणामों पर नजर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत अमेरिका और रूस के बीच संतुलन कैसे बनाता है, खासकर तेल और रक्षा क्षेत्र में क्या होता है।
बहरहाल इस मुद्दे को समझने के लिए रूस, भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। तेल की कीमतें वैश्विक बाजार को कैसे प्रभावित करती हैं, इस पर भी गहराई से विचार किया जाना चाहिए। ( IANS)
Published on:
03 Oct 2025 07:04 pm
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