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रूस की गुप्त मदद से ईरान का ‘सुपरसोनिक मिसाइल’ प्लान! C430L ने बढ़ाई अमेरिका-इजरायल की चिंता

Iran Supersonic Cruise Missile: रूसी हथियार विशेषज्ञों और ईरानी इंजीनियरों के बीच हुई गुप्त कवायद का कोडनेम था C430L। लक्ष्य ऐसी रैमजेट तकनीक तैयार करना था, जो समुद्र और जमीन पर दूर बैठे दुश्मन के लिए नई चुनौती बन सकती है।
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भारत

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Manoj Vashisth

Sep 02, 2026

Russia Iran C430L project

Russia Iran C430L project: रूस ने ईरान को दिया ‘मिसाइल ब्रह्मास्त्र’? गुप्त C430L प्रोजेक्ट का खुलासा, अमेरिका की बढ़ी टेंशन (फोटो सोर्स: ANI)

Russia Iran C430L Project: ईरान की मिसाइल ताकत को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। दावा है कि रूस ने पर्दे के पीछे रहकर तेहरान को ऐसी तकनीक विकसित करने में मदद की, जो भविष्य में बेहद तेज रफ्तार क्रूज मिसाइलों का रास्ता खोल सकती है। यह सहयोग उस समय शुरू हुआ, जब अमेरिका-ईरान टकराव अपने मौजूदा दौर में भी नहीं पहुंचा था। अब इसके दस्तावेज सामने आने से मॉस्को-तेहरान सैन्य साझेदारी पर नए सवाल उठ रहे हैं।

Russia Iran C430L Project: गुप्त प्रोजेक्ट की कहानी क्या है?

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, C430L कार्यक्रम 2023 में शुरू हुआ था। खास बात यह है कि इसकी शुरुआत मौजूदा अमेरिका-ईरान युद्ध से काफी पहले हुई थी। इसके बावजूद लीक हुए रूसी पत्राचार से संकेत मिलता है कि परियोजना का काम 2026 तक जारी रहा।

इस पूरे कार्यक्रम का केंद्र था रैमजेट इंजन। यह ऐसी प्रणोदन तकनीक है, जिसमें हवा की मदद से इंजन बेहद तेज गति पर लगातार काम कर सकता है। यही तकनीक भविष्य में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को कई गुना तेज रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान लंबे समय से ऐसी तकनीक हासिल करने की कोशिश करता रहा है। मिसाइल विशेषज्ञ फैबियन हिंज ने इसे रूस की ओर से ईरान को दी गई अत्यंत संवेदनशील रणनीतिक सैन्य तकनीक का संभावित हस्तांतरण बताया है।

Iran Supersonic Cruise Missile: आखिर सुपरसोनिक मिसाइल इतनी खतरनाक क्यों?

सवाल सिर्फ मिसाइल की रफ्तार का नहीं है। असली चुनौती उसकी कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता और तेज गति का संयोजन है।

आमतौर पर किसी मिसाइल को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम को उसे समय रहते पहचानना और इंटरसेप्टर दागना होता है। लेकिन कम ऊंचाई पर उड़ने वाली तेज रफ्तार क्रूज मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए प्रतिक्रिया का समय घटा सकती है।

यही वजह है कि ईरान के लिए यह तकनीक खास तौर पर रणनीतिक महत्व रखती है। फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना तथा उसके सहयोगियों की मौजूदगी को देखते हुए ऐसी मिसाइलें भविष्य में युद्धपोतों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण हथियार बन सकती हैं।

पूर्व CIA सैन्य विश्लेषक जिम लैमसन के अनुसार, यह तकनीक ईरान को ऐसी नई रणनीतिक क्षमता दे सकती है जिससे अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के लिए खतरा बढ़े।

रूस की कौन सी एजेंसी थी शामिल?

रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी Rosoboronexport ने व्यवस्थित किया था। तकनीकी स्तर पर NPO Mashinostroyenia की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है।

यह कोई सामान्य एयरोस्पेस कंपनी नहीं है। यह रूसी रॉकेट और मिसाइल डिजाइन क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं में शामिल है और जहाज, पनडुब्बी तथा जमीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइल प्रणालियों पर काम कर चुकी है।

अमेरिका ने NPO Mashinostroyenia पर 2014 में प्रतिबंध लगाया था। अमेरिकी प्रतिबंधों के पीछे कंपनी की क्रूज मिसाइल और रूस की रणनीतिक मिसाइल क्षमताओं से जुड़ी गतिविधियां भी कारणों में शामिल थीं।

कॉन्ट्रैक्ट से पहले ही शुरू हो गई थी आवाजाही

C430L की गंभीरता का एक संकेत रूसी अधिकारियों और इंजीनियरों की ईरान यात्राओं से भी मिलता है। लीक हुए यात्रा रिकॉर्ड के मुताबिक, रूसी हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO Mashinostroyenia के वरिष्ठ इंजीनियरों ने नवंबर 2023 में औपचारिक समझौता होने से पहले ही कई बार ईरान का दौरा किया था।

इसके बाद ईरान के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के लॉजिस्टिक्स विभाग के साथ परियोजना का औपचारिक अनुबंध हुआ।

यानी यह अचानक शुरू हुआ कोई अस्थायी सैन्य सहयोग नहीं था। उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि इसके पीछे पहले से तकनीकी तैयारी और दोनों पक्षों के बीच संपर्क चल रहा था।