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प्रकृति की बहाली से दुनिया में बन सकते हैं 3.2 करोड़ नए रोजगार, UN ने बताया किन क्षेत्रों पर जोर जरूरी

UN की रिपोर्ट के मुताबिक 149 देशों में 25.2 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र की बहाली जारी है। 2030 तक निवेश बढ़ने से 3.2 करोड़ नए ग्रीन जॉब्स पैदा हो सकते हैं।
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भारत

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Anurag Animesh

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Updated: 29 Oct 2026, 11:02 PM IST

UN news

AI Image-(ChatGpt)

UN Restoration Report: दुनियाभर में खराब हो चुके जंगलों, जमीन और दूसरे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 149 देशों में कुल 25.2 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में इकोसिस्टम बहाली का काम चल रहा है। इन प्रयासों से अब तक 10 लाख से ज्यादा हरित रोजगार (ग्रीन जॉब्स) पैदा हुए हैं। रिपोर्ट ने इसे अब तक दर्ज किया गया दुनिया का सबसे बड़ा बहाली अभियान बताया है। हालांकि, 2030 तक तय वैश्विक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इन प्रयासों की रफ्तार तेजी से बढ़ानी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, खास तौर पर मीठे पानी के स्रोतों, समुद्री क्षेत्रों और तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके साथ ही, प्रकृति की बहाली पर हर साल होने वाले खर्च को मौजूदा स्तर से चार गुना से भी ज्यादा बढ़ाना होगा। ऐसा करने से 2030 तक दुनियाभर में अनुमानित 3.2 करोड़ नए रोजगार पैदा हो सकते हैं।

UN की रिपोर्ट में क्या कहा गया?


‘नेचर'स कमबैक-स्केलिंग इकोसिस्टम रिस्टोरेशन फॉर पीपल एंड प्लैनेट’ नाम की यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के पारिस्थितिकी तंत्र बहाली दशक (2021-2030) के बीच में जारी की गई है। यह पहली व्यापक वैश्विक समीक्षा है, जिसमें करीब एक अरब हेक्टेयर क्षेत्र को बहाल करने की प्रतिबद्धताओं और वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति का आकलन किया गया है। कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के तहत लक्ष्य है कि 2030 तक खराब हो चुके कम से कम 30 फीसदी स्थलीय, मीठे पानी, समुद्री और तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों को प्रभावी बहाली के दायरे में लाया जाए।

यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और जैव विविधता सम्मेलन (CBD) के सचिवालय ने मिलकर तैयार की है। इसे संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (COP17) के दौरान एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में जारी किया गया।

एशिया में सबसे ज्यादा क्षेत्र पर बहाली का काम


रिपोर्ट के मुताबिक, दर्ज किए गए कुल बहाली क्षेत्र में एशिया सबसे आगे है। यहां 19.22 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बहाली का काम दर्ज किया गया है। दूसरे क्षेत्रों में यह आंकड़ा इस प्रकार है:

महाद्वीपवार बहाली के तहत दर्ज क्षेत्र

क्रम संख्याक्षेत्रबहाली के तहत दर्ज क्षेत्र
1एशिया19.22 करोड़ हेक्टेयर
2अफ्रीका3.63 करोड़ हेक्टेयर
3यूरोप91 लाख हेक्टेयर
4उत्तर और मध्य अमेरिका58 लाख हेक्टेयर
5दक्षिण अमेरिका54 लाख हेक्टेयर
6ओशिनिया32 लाख हेक्टेयर

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि ये आंकड़े अलग-अलग क्षेत्रों के प्रदर्शन की रैंकिंग नहीं हैं। इन पर क्षेत्रफल, बहाली गतिविधियों के पैमाने और निगरानी व रिपोर्टिंग की क्षमता का भी असर पड़ता है।


15 फीसदी प्राथमिक क्षेत्रों की बहाली से कार्बन उत्सर्जन में मिल सकती है मदद


रिपोर्ट में उन शोधों का भी जिक्र है, जिनके अनुसार दुनिया के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से सिर्फ 15 फीसदी की बहाली से औद्योगिक क्रांति के बाद से हुए कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन का 30 फीसदी हिस्सा पकड़ने और जमा करने में मदद मिल सकती है। इससे प्रजातियों के विलुप्त होने की 60 फीसदी घटनाओं को रोकने में भी मदद मिल सकती है। इकोसिस्टम की बहाली को खाद्य और जल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने, रोजगार और लोगों की बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए अहम माना गया है।

चीन में सबसे बड़ा स्थलीय बहाली क्षेत्र दर्ज


रिपोर्ट के अनुसार, स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली में अब तक वैश्विक लक्ष्य की दिशा में लगभग आधी प्रगति दर्ज की गई है। चीन में सबसे बड़ा स्थलीय बहाली क्षेत्र दर्ज किया गया है, जो 12.74 करोड़ हेक्टेयर है। मंगोलिया और कजाखस्तान में भी बड़े क्षेत्रों में बहाली के प्रयास दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में बहाली के कुछ सफल उदाहरणों का भी जिक्र है। इनमें पूर्वी अफ्रीका में पर्वतीय गोरिल्ला, ब्राजील में जगुआर, किर्गिस्तान में हिम तेंदुए और भारत में गंगा नदी की डॉल्फिन की स्थिति में सुधार शामिल हैं।


UN प्रमुख ने क्या कहा?


संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि दुनिया प्रकृति के लिए इतिहास के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक को आकार लेते देख रही है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि संयुक्त राष्ट्र के बहाली दशक के आधे पड़ाव पर भी काम जरूरी पैमाने और गति से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि 2030 तक सफल पहलों को व्यापक स्तर पर लागू करना होगा और ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना होगा, जो बची हुई प्रकृति की रक्षा करे और खराब हो चुके पारिस्थितिकी तंत्रों को बहाल करे।

वहीं, FAO के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने कहा कि बहाली को जमीन, पानी और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन का अहम हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने खाद्य एवं कृषि प्रणालियों में व्यापक बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रकृति की बहाली के प्रयास अब केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं। शहरों, स्कूलों, कारोबारों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र के बहाली दशक की शुरुआत के बाद से इसके साझेदार नेटवर्क में दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के 300 से ज्यादा संगठन शामिल हो चुके हैं।