25 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मिडिल ईस्ट में ट्रंप ने तैनात किए दो विमानवाहक जहाज, अमेरिकी नेवी के पूर्व अधिकारी ने कहा- भारी कीमत चुकानी पड़ेगी

Middle East News: मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने दो विमानवाहक जहाज तैनात किए हैं। अमेरिकी नेवी के पूर्व अधिकारी जॉन मिलर ने कहा- इससे अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Mukul Kumar

Aug 25, 2026

USS George Washington

यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन - (फोटो - US Central Command)

मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ताकत का इतना बड़ा जमावड़ा अब भारी पड़ रहा है। दो बड़े विमानवाहक जहाज समूहों को वहां तैनात करने से अमेरिकी नौसेना की ताकत कहीं और कमजोर हो गई है। यह बात खुद अमेरिकी नेवी के पूर्व कमांडर ने कही है।

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजे हैं। ये जहाज बहुत ताकतवर होते हैं। इनमें सैकड़ों विमान और हजारों सैनिक होते हैं। लेकिन इतनी बड़ी ताकत एक जगह लगाने का मतलब है कि बाकी इलाकों में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी कम हो जाती है।

अमेरिका के पास कुल 11 विमानवाहक जहाज

पूर्व अमेरिकी नौसेना कमांडर वाइस एडमिरल जॉन मिलर ने अल जजीरा के कार्यक्रम में कहा कि एक ही जगह पर दो कैरियर स्ट्राइक तैनात करने पर बाद में अमेरिका को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के पास कुल 11 विमानवाहक जहाज हैं। इनमें से कई मरम्मत या प्रशिक्षण में रहते हैं। असल में एक समय में सिर्फ दो या तीन ही समुद्र में काम कर सकते हैं। जब दो ग्रुप मध्य पूर्व में लगा दिए जाते हैं तो बाकी जगहों पर कमी साफ दिखती है।

पैसिफिक क्षेत्र हो गया खाली

हाल के महीनों में ईरान से जुड़े तनाव के कारण अमेरिका ने पश्चिमी पैसिफिक से भी अपना एक प्रमुख विमानवाहक जहाज मिडिल ईस्ट में भेज दिया। इससे चीन के आसपास वाले इलाके में अमेरिकी नौसेना की सीधी मौजूदगी कुछ समय के लिए कम हो गई है।

जापान, फिलीपींस और ताइवान जैसे देशों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ी है। वे सोच रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका कितनी तेजी से मदद कर पाएगा।मिलर ने समझाया कि विमानवाहक जहाज अकेले नहीं चलते।

उन्होंने आगे बताया कि उनके साथ विध्वंसक जहाज, क्रूजर और कई अन्य जहाज भी होते हैं। उन्होंने बताया कि पूरा समूह एक साथ चलता है। इसलिए एक जगह भेजने का मतलब है कि दूसरी जगह से पूरा समूह हटाना पड़ता है।

लंबे समय तक तैनाती का नुकसान

कुछ जहाजों की तैनाती बहुत लंबी हो गई है। एक जहाज तो 250 दिनों से भी ज्यादा समय से समुद्र में है। इससे चालक दल थक जाते हैं। खाने-पीने और मरम्मत की समस्याएं भी खड़ी हो जाती हैं।

लंबे समय तक जहाज को समुद्र में रखने से बाद में उसकी मरम्मत में ज्यादा समय लगता है। इससे भविष्य में और भी कमी पड़ सकती है। अमेरिकी नौसेना अब सोच रही है कि छोटे मिशनों के लिए पूरे कैरियर ग्रुप की जरूरत नहीं है। कुछ छोटे जहाजों से काम चलाया जा सकता है। लेकिन मध्य पूर्व की स्थिति अभी ऐसी है कि वहां बड़ी ताकत बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है।