
बांग्लादेश में लग रहे भारत विरोध नारे (Photo-IANS)
India Bangladesh Relations 2026: भारत और बांग्लादेश के उतार-चढ़ाव वाले रिश्तों के बीच पड़ोस में ऐसा बहुत कुछ हो रहा है, जो नई दिल्ली की चिंता बढ़ा सकता है। बांग्लादेश में एक बार फिर से भारत विरोधी बयानबाजी जोर पकड़ रही है। जबकि फरवरी में हुए चुनावों और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद इस पर लगभग लगाम लग गई थी। आखिर ऐसा क्या हुआ कि चंद महीनों की शांति के बाद बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल बनाया जा रहा है?
30 अक्टूबर को ढाका में नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) द्वारा आयोजित एक रैली में भारत से नाराजगी साफ नजर आई। NCP का गठन उन छात्रों ने किया है, जिन्होंने अवामी लीग सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था और अगस्त 2024 में शेख हसीना को भारत भागने पर मजबूर कर दिया था।
अवामी लीग के राजनीति से बाहर होने के बाद, NCP ने जमात-ए-इस्लामी के साथ मिलकर BNP के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया और बांग्लादेश का मुख्य विपक्षी गठबंधन बन गया। NCP ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान के मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की है। उसका आरोप है कि ये मंत्री अपने प्रमुख वादों को पूरा करने में विफल रहे हैं। पार्टी नेताओं ने रहमान पर तानाशाही का आरोप भी लगाया है। एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि रहमान ऐसी योजना लेकर आए हैं, जिससे देश में भ्रष्टाचार, लूटपाट, जबरन वसूली, आतंकवाद जैसा का माहौल बनाया जा सके।
इस रैली में भारत की आलोचना की गई। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए - दिल्ली न ढाका? ढाका, ढाका!" (दिल्ली नहीं ढाका)। ऐसे ही नारे शेख हसीना के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान भी सुने गए थे। NCP के संयोजक नाहिद इस्लाम ने भारत पर बांग्लादेश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने सीमा पर लोगों की हत्याओं और असम तथा पश्चिम बंगाल में मुसलमानों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली में मस्जिदों को गिराने की योजना है। इस रैली में NCP नेता हसनात अब्दुल्ला भी मौजूद थे, जिन्होंने पिछले साल भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों को अलग-थलग करने और भारत-विरोधी तत्वों को पनाह देने की धमकी दी थी। वैसे तो NCP और उसके नेता अक्सर भारत की आलोचना करते रहे हैं। लेकिन हालिया रैली दर्शाती है कि NCP और जमात के नेता किस तरह भारत-विरोधी भावनाओं को भड़काने का काम कर रहे हैं। जबकि उनका अपना मुल्क गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
बांग्लादेश में गंगा जल बंटवारे को लेकर भारत विरोधी महौल तैयार किया जा रहा है। सरकार के कुछ मंत्री और विपक्ष इस संधि में अपनी पसंद की शर्तें जोड़ना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि 12 दिसंबर को खत्म होने वाली है। 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और शेख हसीना के बीच हुई यह 30 साल की संधि, सूखे के मौसम में फरक्का बैराज पर गंगा के पानी के बंटवारे को तय करती है। इसके अनुसार, जब नदी का बहाव 70,000 क्यूसेक या उससे कम हो जाता है, तो पानी को बराबर-बराबर बांट दिया जाता है। जब बहाव 70,000 से 75,000 क्यूसेक के बीच होता है, तो बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है और बाकी हिस्सा भारत को मिलता है। हालांकि, BNP के नेतृत्व वाली सरकार अब एक ऐसी व्यवस्था चाहती है जिससे बांग्लादेश को ज्यादा पानी मिल सके।
'द इकोनॉमिक टाइम्स' के अनुसार, ढाका 1977 के समझौते की उस न्यूनतम गारंटी की शर्त को फिर से लागू करना चाहता है, जो यह सुनिश्चित करती थी कि पानी की कमी वाले समय में भी बांग्लादेश को उसके तय हिस्से का कम से कम 80% पानी मिले। 1996 की यह संधि 12 दिसंबर को खत्म हो रही है, और इसका नवीनीकरण अनिश्चित दिखाई देता है। इकोनॉमिक टाइम्स की 31 अक्टूबर की रिपोर्ट में बताया गया है कि तारिक रहमान के दौरे के बिना, भारत द्वारा इस संधि को अपने आप आगे बढ़ाने की संभावना कम है। रहमान को कई बार नई दिल्ली आने का न्योता दिया गया है, लेकिन वे अब तक भारत नहीं आए हैं। जबकि, वे मलेशिया की अपनी यात्रा के दौरान चीन जरूर गए थे। पानी का बंटवारा विपक्षी दल NCP के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
ढाका के अखबार 'प्रोथोम आलो' की रिपोर्ट के अनुसार, 30 अक्टूबर की एक रैली में नाहिद इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश गंगा के पानी में अपने हिस्से को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। 1 नवंबर को नाहिद ने X पर पोस्ट किया- ‘न पानी, न ट्रांजिट’। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत, बांग्लादेश को नदी के पानी में उसका वाजिब हिस्सा नहीं देता है, तो भारतीय सामान को बांग्लादेश से होकर गुजरने नहीं दिया जाएगा और न ही कोई कॉरिडोर या ट्रांजिट सुविधा दी जाएगी। उन्होंने 1976 में मौलाना अब्दुल हामिद खान भाषानी द्वारा आयोजित 'फरक्का लॉन्ग मार्च' का भी जिक्र किया, जो फरक्का बैराज के जरिए गंगा के पानी को मोड़ने के भारत के कदम के विरोध में निकाला गया था। नाहिद ने चेतावनी दी कि हमारी संप्रभुता और पानी के अधिकार पर कोई समझौता नहीं हो सकता। जरूरत पड़ी तो हम एक बार फिर फरक्का तक मार्च करेंगे।
इसके अलावा जापान-बांग्लादेश की बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट (BIG-B) योजना में भारत की भूमिका को लेकर भी बांग्लादेश में सियासी बवाल मचा है। जापान इस प्रोजेक्ट में भारत को शामिल करने पर जोर दे रहा है। 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, 26 अक्टूबर को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की टोक्यो यात्रा के दौरान, दोनों देश BIG-B को एक व्यापक ढांचे में बदलने पर सहमत हुए, जिसे 'BIG-B फॉर शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी' नाम दिया गया है।
इसका उद्देश्य बांग्लादेश के औद्योगिक और परिवहन बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, जिसके केंद्र में कॉक्स बाजार जिले का माताबाड़ी डीप-सी पोर्ट (गहरे समुद्र वाला बंदरगाह) है। इस बंदरगाह को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए बांग्लादेश के रास्ते सड़क और दूसरे संपर्क मार्गों का इस्तेमाल होगा। अगर ऐसा होता है, तो भारत का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों तक बढ़ सकता है। हालांकि, विपक्षी दल भारत को शामिल करने के खिलाफ हैं।
उनका कहना है कि जापान एक बार फिर बांग्लादेश के रास्ते कॉरिडोर बनाने की कोशिश कर रहा है और सरकार इस गैरकानूनी कॉरिडोर को भारत को सौंपना चाहती है। रहमान सरकार लगातार यह कह रही है कि BIG-B में किसी तीसरे देश की भागीदारी पर कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन विपक्षी दलों को बांग्लादेश के साथ भारत के संबंधों पर सवाल उठाने का एक नया मौका मिल गया है।
30 अक्टूबर की रैली में नाहिद ने तारिक रहमान सरकार पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेश को कथित भारतीय साजिशों से बचाने में विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने अपनी जापान यात्रा के दौरान भारत को एक अवैध कॉरिडोर देने की कोशिश की थी। उन्होंने चेतावनी दी कि बांग्लादेश के लोग ऐसी किसी भी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे। रैली में मौजूद जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भी प्रस्तावित माताबाड़ी बंदरगाह को लेकर सरकार के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने तारिक रहमान की चार दिवसीय जापान यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोगों को इस यात्रा के उद्देश्य और नतीजों के बारे में बताया जाना चाहिए। कनेक्टिविटी के नाम पर देश को लीज (पट्टे) पर नहीं दिया जा सकता।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट आई है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। लेकिन बांग्लादेशी नेता इसके लिए भारत को दोष दे रहे हैं और लोगों को भड़का रहे हैं। बांग्लादेश में रेडीमेड गारमेंट उद्योग के कर्मचारियों ने विरोध-प्रदर्शन किए हैं। यह उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का एक मुख्य आधार है। प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़पें हुईं, उन्होंने राजमार्गों को जाम कर दिया और कई कारखानों व गोदामों में तोड़फोड़ की।
कम से कम 690 गारमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन रोक दिया गया है, और ढाका तथा आसपास के औद्योगिक इलाकों में कर्मचारियों और पुलिस के बीच ताजा झड़पों की खबरें हैं। कर्मचारी वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि 2023 से न्यूनतम वेतन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये विरोध-प्रदर्शन एक लंबे समय से चल रही आर्थिक मंदी के बीच हो रहे हैं। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की GDP वृद्धि दर केवल 3.4% रहने का अनुमान लगाया है, जो कोविड-19 महामारी के बाद से सबसे धीमी गति है। विश्व बैंक ने इसके कारणों में कमजोर निवेश, घटता निर्यात, उच्च महंगाई और सरकारी निवेश में कमी को गिनाया है। साथ ही चेतावनी दी है कि रोजगार के नए अवसर पैदा होना रुक गए हैं, जबकि बढ़ती कीमतों ने 21 लाख (2.1 मिलियन) और लोगों को गरीबी में धकेल दिया है।
सरकार ने इस अशांति के लिए पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी 'अवामी लीग' को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन अब सीमा पार से दखल के आरोप भी सामने आ रहे हैं। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने दावा किया है कि सीमा पार के लोग कर्मचारियों को अशांति फैलाने और गारमेंट उत्पादन व निर्यात में बाधा डालने के लिए उकसा रहे हैं। इसी तरह, 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि सावर और आशुलिया जिलों में गारमेंट कर्मचारियों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के पीछे देश-विदेश ताकतों का हाथ है। इस बीच, जमात के शफीकुर रहमान ने फेसबुक पर लिखा कि साजिश रचने वाले और अवसरवादी लोग शायद अशांति को बढ़ावा देकर गारमेंट उद्योग को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में सख्त रुख अपनाने की अपील की है।
| क्र. सं. | प्रमुख मुद्दा | मुख्य घटनाक्रम / विवरण | संबंधित व्यक्ति / संगठन |
|---|---|---|---|
| 1 | भारत विरोधी माहौल | बांग्लादेश में भारत विरोधी बयानबाजी फिर तेज हुई। 30 अक्टूबर को ढाका में रैली में भारत विरोधी नारे लगाए गए। | NCP, जमात-ए-इस्लामी |
| 2 | भारत विरोधी नारे | रैली में 'दिल्ली नहीं, ढाका' के नारे लगाए गए। भारत पर बांग्लादेश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया गया। | नाहिद इस्लाम |
| 3 | सीमा विवाद | भारत पर सीमा पर लोगों की हत्या और असम तथा पश्चिम बंगाल में मुसलमानों पर अत्याचार के आरोप लगाए गए। | NCP |
| 4 | गंगा जल बंटवारा | 1996 में हुई 30 वर्षीय गंगा जल संधि 12 दिसंबर को समाप्त हो रही है। इसके नवीनीकरण को लेकर अनिश्चितता है। | भारत, बांग्लादेश |
| 5 | 1996 जल संधि | 70,000 क्यूसेक या उससे कम बहाव होने पर पानी बराबर बांटा जाता है। 70,000-75,000 क्यूसेक बहाव पर बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी मिलता है। | भारत, बांग्लादेश |
| 6 | 1977 जल समझौता | बांग्लादेश 1977 के समझौते की न्यूनतम 80% जल गारंटी की शर्त फिर लागू करना चाहता है। | BNP सरकार |
| 7 | न पानी, न ट्रांजिट | नाहिद इस्लाम ने चेतावनी दी कि उचित जल हिस्सा नहीं मिलने पर भारतीय सामान के लिए ट्रांजिट सुविधा नहीं दी जाएगी। | नाहिद इस्लाम, NCP |
| 8 | BIG-B परियोजना | जापान-बांग्लादेश की बे ऑफ बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट परियोजना में भारत की भूमिका को लेकर विवाद है। | जापान, बांग्लादेश |
| 9 | माताबाड़ी बंदरगाह | कॉक्स बाजार में प्रस्तावित डीप-सी पोर्ट को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने की संभावना है। | जापान, बांग्लादेश |
| 10 | कॉरिडोर विवाद | विपक्ष का आरोप है कि सरकार भारत को अवैध कॉरिडोर सौंपने की कोशिश कर रही है। | NCP, जमात-ए-इस्लामी |
| 11 | आर्थिक संकट | कमजोर निवेश, घटता निर्यात, उच्च महंगाई और सरकारी निवेश में कमी से अर्थव्यवस्था प्रभावित है। | बांग्लादेश सरकार |
| 12 | गारमेंट उद्योग संकट | कर्मचारियों के विरोध के कारण कम से कम 690 गारमेंट फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद हुआ। | गारमेंट कर्मचारी |
| 13 | मजदूरी विवाद | कर्मचारी 2023 से न्यूनतम वेतन में बदलाव न होने के कारण वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं। | गारमेंट कर्मचारी |
| 14 | GDP वृद्धि दर | विश्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बांग्लादेश की GDP वृद्धि दर 3.4% रहने का अनुमान है। | विश्व बैंक |
| 15 | गरीबी में वृद्धि | बढ़ती कीमतों के कारण 21 लाख अतिरिक्त लोग गरीबी में चले गए। | बांग्लादेश |
| 16 | सीमा पार हस्तक्षेप | बांग्लादेश के गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि सीमा पार के लोग गारमेंट कर्मचारियों को अशांति के लिए उकसा रहे हैं। | सलाहुद्दीन अहमद |
| 17 | शेख हसीना की वापसी | शेख हसीना दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं। इससे राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। | शेख हसीना |
| 18 | हसीना का प्रत्यर्पण | बांग्लादेश ने भारत से कई बार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। | भारत, बांग्लादेश |
| 19 | राजनीतिक अस्थिरता | NCP ने तारिक रहमान सरकार पर तानाशाही और वादे पूरे न करने का आरोप लगाया है। | तारिक रहमान, NCP |
| 20 | भारत-बांग्लादेश संबंध | जल बंटवारा, कनेक्टिविटी, आर्थिक संकट और शेख हसीना की वापसी दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। | भारत, बांग्लादेश |
| विषय | आंकड़ा / तथ्य |
|---|---|
| गंगा जल संधि | 1996 |
| संधि की अवधि | 30 वर्ष |
| संधि समाप्ति | 12 दिसंबर |
| जल बंटवारे की न्यूनतम सीमा | 70,000 क्यूसेक |
| 70,000-75,000 क्यूसेक पर बांग्लादेश का हिस्सा | 35,000 क्यूसेक |
| 1977 समझौते की न्यूनतम गारंटी | 80% |
| भारत विरोधी रैली | 30 अक्टूबर |
| BIG-B से संबंधित यात्रा | 26 अक्टूबर |
| बंद हुई गारमेंट फैक्ट्रियां | कम से कम 690 |
| अनुमानित GDP वृद्धि दर | 3.4% |
| अतिरिक्त गरीबी में गए लोग | 21 लाख |
| शेख हसीना की संभावित वापसी | दिसंबर |
बांग्लादेश में यह राजनीतिक तनाव ऐसे समय में सामने आ रहा है जब शेख हसीना दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं। अगस्त 2024 में बांग्लादेश से भागने के बाद से हसीना भारत में निर्वासित जीवन बिता रही हैं। उनकी अनुपस्थिति में, इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई है। ढाका ने नई दिल्ली से कई बार उनके प्रत्यर्पण की मांग भी की है। अगस्त में नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में किसी न किसी तरह बांग्लादेश लौट आएंगी।
अब जब यह समय सीमा लगभग एक महीने दूर है, तो उनकी इस घोषणा ने बांग्लादेश की राजनीतिक चर्चा में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। भले ही अवामी लीग पर राजनीति करने की पाबंदी है, लेकिन उसके पास अभी भी वफादार मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का एक बड़ा आधार मौजूद है।
30 अक्टूबर की एक रैली को संबोधित करते हुए, नाहिद इस्लाम ने हसीना की वापसी की योजना का जिक्र किया और जुलाई के विद्रोह में शामिल लोगों से फिर से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री वापस आती हैं, तो तारिक रहमान की सरकार उनका सामना नहीं कर पाएगी। नाहिद ने कहा कि हमें सुनने में आ रहा है कि सत्ता से बेदखल हुई वह तानाशाह इस दिसंबर में देश वापस आ रही है! हम जानते हैं कि यह नया तानाशाह किसी भी हाल में उस तानाशाह का सामना नहीं कर पाएगा... इसलिए, बांग्लादेश के युवाओं को एकजुट होना होगा।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश का विपक्ष भारत को लेकर मुल्क में डर का माहौल तैयार करना चाहता है। बीते कुछ सालों में बांग्लादेश में भारत विरोधी लहर मजबूत हुई है। जिस तरह भारत का जिक्र किए बिना पाकिस्तान का खाना हजम नहीं होता, वही हाल बांग्लादेशी नेताओं का हो गया है। जल बंटवारा, कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट, आर्थिक असंतोष और हसीना की संभावित वापसी को मुद्दा बनाकर यह दर्शाया जा रहा है कि मौजूदा सरकार भारत की साजिशों का जवाब देने में विफल है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या तारिक रहमान विपक्ष की इस डर वाली राजनीति को किनारे लगा पाएंगे और क्या इससे दोनों देशों के संबंधों पर पड़ने वाले असर को रोक पाएंगे?
Updated on:
3 Nov 2026, 4:24 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 4:23 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.