
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। ( फाइल फोटो: ANI )
Diplomacy : वैश्विक कूटनीति और सत्ता के गलियारों में इस समय एशिया के दो सबसे रहस्यमयी देशों को लेकर सबसे बड़ी सुगबुगाहट है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल के एक लंबे अंतराल के बाद नॉर्थ कोरिया (उत्तर कोरिया) की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। सतह पर देखने में यह एक सामान्य और औपचारिक द्विपक्षीय यात्रा लग सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों की मानें तो यह दौरा सिर्फ शिष्टाचार तक सीमित नहीं है। यह कदम यूक्रेन युद्ध के बाद तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्था, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की घेराबंदी और महाशक्तियों के बीच खिंचती नई सैन्य रेखाओं का एक बड़ा और सीधा संकेत है।
प्योंगयांग में जब शी जिनपिंग और तानाशाह किम जोंग उन एक मंच पर आमने-सामने होंगे, तो पूरी दुनिया की नजरें उनकी बॉडी लैंग्वेज और साझा बयानों पर टिकी होंगी। दरअसल, पिछले कुछ समय में यूक्रेन संकट के चलते रूस और नॉर्थ कोरिया के रिश्ते बेहद मजबूत हुए हैं। अब इस समीकरण में चीन की सीधी एंट्री एक नई 'त्रिकोणीय धुरी' को जन्म दे रही है। यह गठबंधन सीधे तौर पर अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते को चुनौती देने के लिए तैयार किया जा रहा है।
शी जिनपिंग के इस कदम पर वॉशिंगटन से लेकर सियोल (दक्षिण कोरिया) तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब नॉर्थ कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और उसकी आक्रामकता को एक 'शील्ड' की तरह इस्तेमाल कर सकता है ताकि अमेरिका का ध्यान ताइवान संकट से भटकाया जा सके। वहीं, दक्षिण कोरिया ने इस पर चिंता जताते हुए कहा है कि प्योंगयांग को आधुनिक चीनी सैन्य तकनीक मिलना पूरे क्षेत्र की शांति को दांव पर लगा सकता है।
इस पूरी यात्रा का एक गुप्त और महत्वपूर्ण पहलू रूस से जुड़ा हुआ है। हाल के दिनों में किम जोंग उन ने मॉस्को को भारी मात्रा में गोला-बारूद की सप्लाई की है, जिसके बदले में रूस ने उत्तर कोरिया को अंतरिक्ष और मिसाइल तकनीक में मदद की है। चीन अब तक इस समीकरण से खुद को थोड़ा दूर दिखा रहा था, लेकिन जिनपिंग की यह यात्रा साफ करती है कि बीजिंग अब खुलकर इस गुट का नेतृत्व करने को तैयार है। यह एशिया में हथियारों की एक नई होड़ को जन्म दे सकता है।
इस यात्रा के बाद आने वाले हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद की बैठकों में गर्माहट देखने को मिल सकती है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश नॉर्थ कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की कोशिश करेंगे, जिसे चीन और रूस वीटो पावर के जरिए ब्लॉक कर सकते हैं। साथ ही, प्रशांत महासागर में अमेरिकी नौसेना और दक्षिण कोरियाई सेना के संयुक्त युद्धाभ्यासों में तेजी आने की पूरी संभावना है।
Updated on:
07 Jun 2026 06:42 pm
Published on:
07 Jun 2026 06:42 pm
