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चुनाव के समय ज्यादा कैश लेकर न निकलें, वरना काटना पड़ेंगे थाने के चक्कर

लोग अब बिना ब्योरा के वाहनों से लाखों रुपए इधर से उधर नहीं ले जा सकेंगे। पकड़े जाने पर रुपयों का हिसाब-किताब देना होगा।
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अगार मालवा

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Lalit Saxena

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Updated: 29 Oct 2018, 11:00 AM IST

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लोग अब बिना ब्योरा के वाहनों से लाखों रुपए इधर से उधर नहीं ले जा सकेंगे। पकड़े जाने पर रुपयों का हिसाब-किताब देना होगा।

सुसनेर. लोग अब बिना ब्योरा के वाहनों से लाखों रुपए इधर से उधर नहीं ले जा सकेंगे। पकड़े जाने पर रुपयों का हिसाब-किताब देना होगा। यह सब हो रहा विधानसभा चुनाव में अवैध तरीके से रुपयों के उपयोग को रोकने के लिए। इसके लिए गठित संयुक्त उडऩदस्तों ने काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए प्रशासन ने राजस्थान और मप्र की सीमा पर पटपडा, पालडा और चंवली में चेक पाइंट बनाए हैं। इसी के साथ नगरीय क्षेत्र के बाहरी हिस्सो के तिराहों और चौराहों पर पुलिस द्वारा वाहनों की चेकिंग की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति 50 हजार रुपए भी निजी काम से ले जा रहा है। तो उसे ब्योरा देना होगा। इसी प्रकार व्यापारी 5 लाख रुपए से ज्यादा नकद राशि या यात्रा के दौरान लेकर चलता है तो उसे भी उडऩदस्ता प्रभारी को ब्योरा देना होगा। नहीं देने की स्थिति में यह मान लिया जाएगा कि राशि का उपयोग चुनाव कार्य में किया जाने वाला है। और उसे जब्त कर आयकर विभाग के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
रुपयों की अवैध निकासी और आवक रोकने के लिए पुलिस, परिवहन विभाग व आयकर विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। जिले सहित विधानसभा के विभिन्न इलाकों में बनाए गए पाइंटों पर इन दस्तों ने काम करना शुरू भी कर दिया है।
बसों के लगेज पर भी नजर
शहर से विभिन्न नगरों और महानगरों की ओर संचालित होने वाली प्राइवेट बसों पर भी प्रशासन की नजर है। बसों की छतों पर लगेज के रूप में ले जाने वाली सामग्री के कारण किसी भी प्रकार से चुनाव प्रभावित न हो इसकी शंका के उडऩदस्ता अब इन बसों पर भी नजर रखेगा। हालांकि बसों में लगेज लाना ले जाना गैरकानूनी है। इसके बाद भी लंबी दूरी की बसों से लगेज बेरोकटोक लाया जा रहा है। लगेज में चुनाव प्रसार सामग्री के अलावा, मतदाताओं को उपहार में बांटने वाली साड़ी, गमछे, स्टीकर के बंडल लाए जाते हैं। बिल पर डिलेवरी लेने वाले का नाम नहीं होता है। प्रचार सामग्री किसी दूसरे व्यक्ति के रूप में उपहार में भेजी हो और चेकिंग में यदि पकड़ी जाती है तो कीमत पार्टी के खाते में जोड़ी जाएगी। प्रशासन ने बस मालिकों को भी बिना बिल के लगेज न लाने की हिदायत दी है।
चुनाव आयोग के निर्देशानुसार प्रशासन पूरी तरह से अर्लट है। आचार संहिता के अनुसार 50 हजार से अधिक की राशि अगर पकड़ी जाती है तो उसका हिसाब देना होगा।
मनीष जैन, निर्वाचन अधिकारी, सुसनेर