
Demonetization
आगरा। एक साल पहले की बात है। आठ नवम्बर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टीवी पर घोषणा की कि 1000 और 500 के नोट अब नहीं चलेंगे। यह घोषणा सुनते ही लोग सकते में आ गए थे। नौ नवम्बर को फिर बैंकों की ओर दौड़ लगा दी थी। जिनके पास 1000 और 500 के नोट के रूप में कालाधन था, वे सर्वाधिक परेशान थे। पूरा आगरा बैंकों के बाहर लाइन में खड़ा रहा था। कुछ लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज भी किया था। पुलिस वालों की पिटाई हुई थी। कारोबार का ऐसा भट्ठा बैठा कि आज तक पटरी पर नहीं आ पाया है। एक साल पहले नोटबंदी को कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक माना गया था।
अचानक हुआ नकदी का संकट
नवम्बर में शादियां होती हैं। नोट प्रचलन से बाहर होने के कारण नकदी का संकट हो गया था। लोग शादी का कार्ड लेकर बैंकों में पहुंचे, फिर भी पैसे नहीं मिले। बैंकों में पैसे जमा किए जा रहे थे, निकासी बंद कर दी गई थी। नोट बदलने के लिए हर बैंक में गुहार लगाई जा रही थी। हर बैंक के बाहर लम्बी-लम्बी लाइनें लगी हुई थीं। बैंक कर्मचारियों को 12-12 घंटे काम करना पड़ा। बैंक वालों पर नोट बदलने में भ्रष्टाचार के आरोप लगे।
कुछ आंकड़े
अग्रणी बैंक से मिले आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी के बाद 50 दिन में कुल करीब 3800 करोड़ रुपये बैंकों में जमा हुए।10 फीसदी धनराशि जनधन खातों में आई। सितम्बर 2016 तक बैंकों में 28228 करोड़ रुपये जमा थे। नोटबंदी के बाद दिसम्बर, 2016 में यह धनराशि बढ़कर 32115 करोड़ रुपये हो गए। इस धनराशि में सर्वाधिक हिस्सा कारोबारियों का 78.5 फीसदी था। इस हिसाब से बात करें तो 3000 करोड़ रुपये कारोबारियों ने जमा कराए। 800 करोड़ रुपये अन्य लोगों के थे। नोटबंदी के समय बैंक शाखाओं की संख्या 486 थी, जो अब बढ़कर 512 हो गई है।
आयकर विभाग की तलवार
नोटबंदी के समय जमा की गई धनराशि को लेकर आयकर विभाग जांच कर रहा है। आगरा में हजारों लोगों को आयकर विभाग ने नोटिस भेजे हैं। खासतौर पर जनधन खाताधारकों को। असल में जनधन खातों में अचानक ही दो से ढाई लाख रुपये जमा कराए गए। जनधन खाते शून्य बैलेंस पर खोले गए थे। अचानक जमा हुए लाखों रुपयों को लेकर संशय होना स्वाभाविक था। जनधन खाताधारक आयकर विभाग के चक्कर काट रहे हैं। वे पता नहीं पा रहे हैं कि इतनी धनराशि कैसे जमा हो गई।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ, बैंक शाखा प्रबंधक
चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रमोद चौहान का कहना है कि नोटबंदी से कालाधन बाहर आया। शुरू में समस्या थी, लेकिन अब सब ठीक हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक यदुवीर सिंह चाहर बताते हैं कि नोटबंदी के बाद बैंक कर्मियों ने अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। नकदी की व्यवस्था निजी स्तर पर भी की गई, ताकि जनता को कोई समस्या न हो। जब कुछ बदलाव होता है तो कुछ समस्या होना स्वाभाविक है। अधिवक्ता कुंवर शैलराज सिंह का कहना है कि नोटबंदी से परेशान वे हैं, जो दो नम्बर का धंधा करते थे। जो सारा काम एक नम्बर में करते हैं, उन्हें आज भी कोई समस्या नहीं है।
व्यापार पर संकट कायम
व्यापारी नेता टीएन अग्रवाल का कहना है कि नोटबंदी ने व्यापार को तोड़कर रख दिया है। नकदी का संकट अभी तक बना हुआ है। आम आदमी कैशलैस भुगतान नहीं करता है। प्रचलन में 2000 रुपये का नोट है। सामान लिया 200 रुपये का। अब व्यापारी 1800 रुपये कहां से लाए। उन्होंने बताया कि हर स्तर पर व्यापार प्रभावित है। आशा है जल्दी ही सब ठीक हो जाएगा। नोटबंदी के पीछे सरकार की नीयत ठीक थी, लेकिन वैकल्पिक इंतजाम भी करना चाहिए था।
Published on:
7 Nov 2017, 10:35 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.