
आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुब्बैया ने कहा कि, "रियासत की सियासत में बंधुओं को हिरासत में लेना इस देश की विरासत नहीं"। हमारी परंपरा में पिता की आज्ञा मानकर 14 वर्ष वन में बिताने वाले राम और उनकी चरण पादुका रखकर प्रतीक्षा करने वाले भरत हैं। उन्होंने कहा कि वामपंथी इतिहासकारों ने जो विष शिक्षा और इतिहास बोध में फैलाया है उसे विद्यार्थी परिषद दूर करके ही रहेगा। उन्होंने कहा कि माओं से प्रेरित छात्रों द्वारा जेएनयू में महिला शिक्षिका का अपमान किया गया। जेएनयू छात्र संघ अभी वामपंथी गिरफ्त में है परंतु ऐसा अधिक दिनों तक नहीं रहेगा ऐसी भी आशा उन्होंने व्यक्त की।
ये है विद्यार्थी परिषद का लक्ष्य
उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का विद्यार्थी परिषद का लक्ष्य तब पूर्णता की ओर माना जाएगा जब स्त्रियां सुरक्षित होंगी, देश के सभी मंदिरों के द्वार सभी जाती वर्ग हेतु खुले होंगे, शिक्षा सबको सुलभ होगी, भारत सुरक्षा परिषद सदस्य होने जैसे लक्ष्य हासिल कर विश्वगुरु होने की अपनी नियति को जिएगा। इसके उपरांत एबीवीपी के द्वारा पारित प्रस्ताव राम मंदिर, अनुच्छेद370 को हटाना,राज्य विश्वविद्यालयो की शिक्षा में गुणवता,जल व वायु प्रदूषण की समस्या समाधान हेतू प्रस्ताव पारित कराऐं गये।
इन पर रखे गए विचार
अगले सत्र में निवर्तमान राष्ट्रीय महामंत्री आशीष चौहान ने "हमारी वैचारिक यात्रा के बढते कदम" पर अपने विचार रखें। अगले सत्र में "राष्ट्रीय एकात्मता "बिषय पर बंसत शिंदे व हरिबोरिकर जी नें प्रतिनिधियों से संवाद किया। रात्रि भोजन के उपरांत विभिन्न प्रांतो के प्रतिनिधियों नें सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
Published on:
23 Nov 2019 05:58 pm
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