यहां से शुरू हुई कहानी
ओरैया जिले के रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय शंकर चतुर्वेदी ने बताया कि ये आजादी से पहले की बात है। उस समय इटावा सेंट्रल जेल में उन्हें बंद किया गया था। उस समय वे नाबालिग थे, इसलिए मशक्कत नहीं दी जानी चाहिए थी, लेकिन उन पर काम कराया जाता था। एक राम बांस आता था, जिससे सेर कूटने के लिए दिया जाता था, इससे रेशम बनता था। इस काम में समस्या ये थी, कि राम बांस से खुजली बहुत हो जाती थी। दिमाग खुराफाती थी, तो एक दिन खुराफात करने का मूड़ बन गया। रस्सी बनाना शुरू किया, उसी समय वॉर्डन आया, वॉर्डन ने पूछा ये क्या कर रहे हो, उसे बताया कि देख नहीं रहे, रस्सा बना रहे हैं। उसने पूछा रस्से का क्या करोगा, तो बताया कि ये रस्सा जेल से भागने के लिए बनाया जा रहा है। इतना सुनते ही वॉर्डन दौड़ता हुआ अधिकारियों के पास पहुंचा और उसने पूरा मामला उन्हें बताया।