मंगला गौरी पूजन व व्रत विधि
माता मंगला गौरी के पूजन के लिए एक थाली में चकला रखें। उस पर मंगला गौरी की मिट्टी की प्रतिमा बनाएं और आटे की लोई बनाकर रख लें। इसके बाद मां मंगला गौरी को पंचामृत (गंगाजल, दूध, दही, चीनी और घी) से स्नान कराएं। इसके बाद सुंदर से वस्त्र पहनाएं। फिर नथ पहनाकर रोली, चन्दन, हल्दी, सिन्दूर, मेंहदी, काजल लगाकर श्रंगार करें। इसके बाद मां को 16 प्रकार के फूल, 16 माला, 16 तरह के पत्ते, 16 आटे के लड्डू, 16 फल, पांच तरह की मेवा, 16 बार सात तरह का अनाज, 16 जीरा, 16 धनिया, 16 पान, 16 सुपारी, 16 लौंग, 16 इलाइची, एक सुहाग की डिब्बी में रोली, मेहन्दी, काजल, सिन्दूर, तेल, कंघा, 16 चूड़ी, व दक्षिणा चढ़ाएं फिर मां मंगला गौरी की कथा कहें या सुनें। व्रत वाले दिन नमक न खाएं और न ही शाम को अनाज खाकर व्रत खोलें। दूसरे दिन मंगला गौरी को समीप के कुएं, नदी या तालाब में विसर्जित करने के बाद भोजन करें।