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अहोई अष्टमी व्रत: पुरानी परम्पराओं को बदलने का काम कर रही ये महिलाएं…

आगरा में कुछ मांएं बेटे नहीं बल्कि बेटियों की सलामती के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं।
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आगरा

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suchita mishra

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Updated: 29 Oct 2018, 4:29 PM IST

ahoi ashtami

ahoi ashtami

पुत्र की लंबी आयु के लिए भारत में करवाचौथ के चौथे दिन अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी को रखे जाने वाले इस व्रत में माता पार्वती की पूजा की जाती है और शाम को तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। लेकिन आगरा में कुछ महिलाएं ऐसी हैं जो बेटे और बेटियों के फर्क को मिटाने का काम कर रही हैं। वे अहोई अष्टमी के व्रत को सिर्फ पुत्र ही नहीं बल्कि पुत्रियों की भी सलामती के लिए रखती हैं। इस बार अहोई अष्टमी 31 अक्टूबर को मनायी जाएगी। इस मौके पर मिलवाते हैं आपको उन महिलाओं से।

हरीश नगर की रहने वाली अमिता सक्सेना के दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी। वे पिछले कई वर्षों से ये व्रत दोनों बच्चों के लिए रख रही हैं। अमिता के मुताबिक पहले के समय में पुरुषों के उपर परिवार चलाने का जिम्मा होता था। मृत्यु के बाद माता पिता को मुखाग्नि देने का काम बेटे ही किया करते थे। उनके नाम पर वंश चलने जैसी मान्यताओं को माना जाता था। लेकिन आज के समय में सब कुछ बदल गया है। अब बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं है। जो काम लड़के करते हैं, वही सारे अधिकार लड़कियों को भी मिले हुए हैं। लिहाजा हमें भी इनके बीच फर्क नहीं करना चाहिए।

वहीं इस मामले में इंदु सिंह का कहना है कि पहले वो अपने बेटे के लिए ये व्रत रखा करती थीं क्योंकि ये सब उनके लिए एक परंपरा का हिस्सा था, लेकिन धीरे धीरे वक्त ने उनकी धारणा को बदल दिया। उनकी बेटी आज बेटे के तरह ही सारे काम करती है। पारिवारिक जिम्मेदारी में कंधे से कंधा मिलाकर चलती है। इंदु सिंह का कहना है कि बेटा हो या बेटी माता पिता दोनों को ही स्वस्थ और खुशहाल देखना चाहते हैं। लिहाजा मैं अपने दोनों बच्चों की दीर्घायु के लिए हर साल ये व्रत करती हूं।

जूही सक्सेना की दो साल की एक बेटी है। वे सिर्फ अहोई अष्टमी ही नहीं बल्कि जो भी प्रथाएं लड़कों के लिए बनायी गई हैं, उन्हें अपनी बेटी के नाम पर निभाती हैं। उनका कहना है कि मेरे लिए मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। समाज में ये फर्क हमने ही पैदा किया है और इसे हमें ही मिटाना होगा। लिहाजा वे बेटी के जन्म के समय से ही ये व्रत कर रही हैं।

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