
विभिन्न वेशभूषा में गरबा खेलते युवा।
भावना सोनी
जामनगर. शहर की प्रसिद्ध गरबियों में से एक भारतमाता आदर्श गरबी मंडल में प्रतिदिन रात्रि में वेश-भूषा रास का आयोजन किया जा रहा है। लीमडा लाइन शेरी नंबर 3 में इस गरबी का आयोजन पिछले 67 साल से समाज के हर जाति के लोगों द्वारा किया जा रहा है। यहां गरबी मंडल के आयोजन में ब्रह्मलोक में मंच बदलता है। युवाओं द्वारा ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, राम-लक्ष्मण-हनुमान, रावण, जटायु, असुर और सिकंदर, टीपू सुल्तान आदि विभिन्न पात्रों में रास खेला जा रहा है।
छह दशकों की अवधि में यह गरबी अपनी भव्य योजना, पारंपरिक रास, गरबा की प्रस्तुति, बच्चों और युवाओं द्वारा प्रस्तुत अभूतपूर्व डांडियारा, दुहा-छंद गायन के माध्यम से व्यक्त की गई भक्ति, अनुशासित कार्यकर्ता, साफ-सुथरे प्रबंधन के साथ-साथ धार्मिक और ऐतिहासिक महानुभाव पात्रों की वेश-भूषा के कारण प्रसिद्ध है।
इस गरबी का प्रबंधन क्षेत्र में रहने वाले रामानी परिवार के रिश्तेदारों, लिंबासिया परिवार, गजेरा परिवार और हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी धर्मों के लोगों द्वारा किया जा रहा है। यह परिवार 1942 में जब वर्तमान पाकिस्तान के कराची में रहते थे तब भी भव्य तरीके से गरबी का आयोजन करते थे और जामनगर में बसने के बाद उन्होंने लीमडा लाइन में 67 वर्ष से परंपरा को बरकरार रखा है।
इस गरबी की कई विशेषताएं हैं। इनमें सबसे आकर्षक है कि सभी धर्मों के लोग एक साथ संगठित होते हैं। यही कारण है कि गरबी का नाम भारतमाता आदर्श गरबी मंडल रखा है। यह एकता में विविधता के मूल्य को दर्शाता है। आर्य समाज द्वारा नवरात्रि के आठवें दिन वैदिक प्रचार के साधन के रूप में वैदिक यज्ञ भी किया जाएगा।
गरबी के आयोजन में किसी भी प्रकार का कोई फंड नहीं जुटाया जाता और युवाओं से फीस के रूप में एक भी रुपया नहीं लिया जाता है। इसके पीछे मुख्य मकसद लोगों का मनोरंजन करना और लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। खासकर छोटे बच्चों और आज की पीढ़ी को भगवान और राजा राज्यों के साथ-साथ प्राचीन संस्कृति से संबंधित ज्ञान और पहचान नहीं है, इसलिए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को इस बारे में ज्ञान प्रदान करना है।
Updated on:
17 Oct 2026 09:17 pm
Published on:
17 Oct 2026 09:10 pm
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