23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

विवेकानंद ने देखा था सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का स्वप्न

आज 159वीं जयंती पर विशेष  
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

अहमदाबाद

•

image

Rajesh Bhatnagar

•

Updated: 12 Jan 2022, 12:03 AM IST

विवेकानंद ने देखा था सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का स्वप्न

सोमनाथ का खंडित मंदिर (फाइल फोटो)।

भास्कर वैद्य

प्रभास पाटण. आध्यात्मिक गुरु व दार्शनिक स्वामी विवेकानंद की 159वीं जयंती बुधवार को मनाई जाएगी। स्वामी विवेकानंद ने सोमनाथ के खंडित मंदिर के समीप एक शिला पर बैठकर सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का स्वप्न देखा था।
अमरीका के शिकागो में 11 सितंबर 1893 को हुए विश्व धर्म सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जाने से पहले उन्होंने संपूर्ण भारत का भ्रमण किया था। इससे पहले वे वर्ष 1891 के नवंबर-दिसंबर महीने में सोमनाथ पहुंचे थे।
सोमनाथ मंदिर को जीर्ण-शीर्ण अवस्था व आक्रमणों के कारण खंडित हुआ देखकर उनका मन द्रवित हो उठा था। अरब सागर के समुद्र तट पर खंडित मंदिर के समीप एक शिला पर बैठकर उन्होंने ध्यान लगाया था। उन्होंने भारत को पुन: स्वर्ण युग में पहुंचने के चिंतन से चिंता की थी।
अनुभूति के अंत में उन्हें लगा था कि सोमनाथ देश का प्राण-केंद्र है। उन्हें उम्मीद थी कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निमाण होगा। ध्यान के अंत में उन्होंने यह कल्पना की थी। उन्होंने लिखा था कि सोमनाथ मंदिर पर अनेक आक्रमण होने और मंदिर के विनाश के बाद भी मंदिर का पुन:सृजन होता ही रहा, यह लोगों की राष्ट्र-धर्म भावना दिखाती है।

सोमनाथ व दक्षिण भारत के मंदिर देते हैं ज्ञान

सोमनाथ से वे दक्षिण भारत के मद्रास (वर्तमान में चेन्नई) पहुंचे थे। वहां उन्होंने एक प्रवचन में कहा था कि सोमनाथ व दक्षिण भारत के मंदिर हमें ऐसा ज्ञान देते हैं जो ज्ञान हमें हजारों पुस्तकें पढऩे से भी नहीं मिलता, हमें ऐसी अंतर्दृष्टि देते हैं।
सोमनाथ मंदिर के समीप भव्य भारत व बनने का चिंतन व की गई कल्पना और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का स्वप्न देखा था। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होने के साथ ही इतिहास बना उनका स्वप्न पूरा हुआ है।

संग्रहालय में उपलब्ध हो स्मृति चित्र

स्वामी विवेकानंद की आत्मकथा में पढ़ा कि वे सोमनाथ पहुंचकर मंदिर को खंडित देखकर एक शिला पर बैठकर काफी दु:खी हुए थे। उस ऐतिहासिक जीवनस्मृति का बड़ा चित्र जिसमें स्वामी विवेकानंद उस समय के सोमनाथ मंदिर के समीप एक शिला पर ध्यान मग्न होकर बैठे होंं और पीछे समुद्र दिखाई दे, ऐसा चित्र बनवाकर सोमनाथ में लगवाने की इच्छा है। स्वामी विवेकानंद का स्मृति चित्र सोमनाथ संग्रहालय में लोगों के लिए उपलब्ध करवाने की भी इच्छा है।

- जे.डी. परमार, ट्रस्टी, सोमनाथ ट्रस्ट।