
क्लास में AI से प्रयोग, सवाल और सीखने के तरीक़े बदलने की तैयारी, शिक्षकों की भूमिका होगी और अहम। ( फोटो डिजाइन : ChatGPT)
कभी ब्लैकबोर्ड पर चॉक से खींची गई एक लकीर बच्चों के सामने पूरी दुनिया खोल देती थी। शिक्षक सवाल पूछते, बच्चे अपनी कॉपियों में जवाब तलाशते और घंटी बजने के बाद भी कुछ सवाल मन में रह जाते। अब उसी कक्षा में एक नया मेहमान दस्तक दे रहा है-कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI। यह मेहमान न तो चॉक थामेगा, न शिक्षक की कुर्सी पर बैठेगा, लेकिन मुश्किल सवालों को समझाने और प्रयोगों को आँखों के सामने साकार करने में मदद कर सकता है।
तमिलनाडु की राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने चेन्नई में 11वीं और 12वीं के सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को एआई और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देने की पहल शुरू की है। 14 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, पहले चरण में लगभग 90 प्रशिक्षक तैयार किए जा रहे हैं। ये आगे विद्यालयों में जाकर स्नातकोत्तर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। चेन्नई के लगभग 6,500 शिक्षकों को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य है। अगले कुछ महीनों में प्रशिक्षण का विस्तार प्रस्तावित है।
कल्पना कीजिए, भौतिक विज्ञान की कक्षा में शिक्षक प्रकाश के अपवर्तन का नियम समझा रहे हों। अब विद्यार्थी केवल चित्र नहीं देखेंगे, बल्कि स्मार्टबोर्ड पर बदलती परिस्थितियों में प्रकाश की दिशा भी समझ सकेंगे। प्रशिक्षण में विज्ञान के आभासी प्रयोग, प्रश्न तैयार करने वाले डिजिटल उपकरण और शैक्षिक सामग्री निर्माण शामिल हैं। इसका अर्थ प्रयोगशालाओं को बंद करना नहीं, बल्कि वास्तविक प्रयोगों से पहले अवधारणाओं को अधिक स्पष्ट बनाना है।
शिक्षा का असली सौंदर्य याद किए गए उत्तर में नहीं, बल्कि उस सवाल में है जो बच्चे की समझ से जन्म लेता है। एआई शिक्षक को ऐसे प्रश्न बनाने में मदद कर सकता है जिनमें विद्यार्थी केवल परिभाषाएँ न दोहराएँ, बल्कि कारण बताएँ, तुलना करें और अपने निर्णय का तर्क दें। डिजिटल प्रश्नोत्तरी के ज़रिए शिक्षक यह भी पहचान सकेंगे कि किस अवधारणा पर विद्यार्थियों को अतिरिक्त अभ्यास की ज़रूरत है।
| अभी की चुनौती | एआई से संभावना | शिक्षक की भूमिका |
|---|---|---|
| कठिन प्रयोग | आभासी प्रदर्शन | वास्तविक अभ्यास |
| जटिल अवधारणा | दृश्य उदाहरण | सरल व्याख्या |
| एक जैसे प्रश्न | विविध प्रश्न | गुणवत्ता जाँच |
| धीमा मूल्यांकन | त्वरित अभ्यास-जाँच | प्रगति समीक्षा |
| सीमित सामग्री | डिजिटल संसाधन | सही चयन |
| अलग सीखने की गति | स्तरानुसार अभ्यास | व्यक्तिगत सहयोग |
| तकनीकी भ्रम | डिजिटल साक्षरता | सुरक्षित इस्तेमाल |
स्रोत: तमिलनाडु शिक्षक-प्रशिक्षण पहल और यूनेस्को के शैक्षिक दिशा-निर्देशों के आधार पर संभावित उपयोग। ये लागू हो चुके परिणाम नहीं हैं।
यह कहानी केवल तमिलनाडु की नहीं है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए तीसरी से आठवीं कक्षा तक संगणकीय चिंतन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की पाठ्यचर्या रूपरेखा जारी की है। विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसके काम करने के तरीक़े को समझने वाला जागरूक विद्यार्थी बनाना है।
नौवीं से बारहवीं तक एआई संबंधी अध्ययन की व्यवस्थाएँ भी विकसित हुई हैं। बोर्ड की 9 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के अनुसार, नौवीं से बारहवीं के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के मॉड्यूल आंतरिक मूल्यांकन हेतु प्रस्तावित किए गए थे। ग्यारहवीं-बारहवीं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल विषय की पाठ्यचर्या भी उपलब्ध है। हालांकि, तमिलनाडु के इस प्रशिक्षण से बोर्ड परीक्षाओं की प्रश्नपत्र-पद्धति या अंक-वितरण बदलने का कोई पुष्ट आदेश सामने नहीं आया है।
चेन्नई में लगभग 90 प्रशिक्षकों से शुरू हुआ यह प्रयास 6,500 शिक्षकों तक पहुँचने की योजना है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर 'स्किलिंग फ़ॉर एआई रेडीनेस' अर्थात सोअर पहल में शिक्षकों के लिए 45 घंटे का प्रशिक्षण मॉड्यूल है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास प्रवर्तक के सहयोग से 'स्वयं प्लस' पर 40 घंटे का शिक्षक पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है। इन अलग-अलग कार्यक्रमों के आँकड़ों को एक ही प्रशिक्षण अभियान का हिस्सा नहीं समझना चाहिए।
| पहल | आँकड़ा | दायरा |
|---|---|---|
| चेन्नई प्रशिक्षण | लगभग 90 | शुरुआती प्रशिक्षक |
| प्रस्तावित लाभार्थी | लगभग 6,500 | शिक्षक |
| टीएनस्पार्क | 5,000 से अधिक | विद्यालय |
| सोअर विद्यार्थी | 3 × 15 घंटे | प्रशिक्षण मॉड्यूल |
| सोअर शिक्षक | 45 घंटे | प्रशिक्षण मॉड्यूल |
| स्वयं प्लस | 40 घंटे | शिक्षक पाठ्यक्रम |
| यूनेस्को रूपरेखा | 15 दक्षताएँ | पाँच आयाम |
स्रोत: तमिलनाडु प्रशिक्षण की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट; भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की सोअर संबंधी विज्ञप्ति; स्वयं प्लस पाठ्यक्रम और यूनेस्को की शिक्षक दक्षता रूपरेखा। टीएनस्पार्क के विद्यालयों का आँकड़ा 2024 से संचालित पहल से संबंधित है।
हर नई तकनीक अपने साथ कुछ आशंकाएँ भी लाती है। एआई गलत जानकारी दे सकता है, पक्षपातपूर्ण उत्तर बना सकता है और विद्यार्थियों की निजी जानकारी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। यूनेस्को ने शिक्षा में जनरेटिव एआई के सुरक्षित इस्तेमाल, आयु के अनुरूप पहुँच, गोपनीयता और मानवीय निगरानी पर ज़ोर दिया है। इसलिए शिक्षक को एआई के हर उत्तर को अंतिम सत्य मानने के बजाय उसकी जाँच करनी होगी। बच्चों की संवेदनशील जानकारी किसी बाहरी उपकरण में डालने से भी बचना होगा।
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि एआई कितने सवाल हल कर सकता है, बल्कि यह है कि वह कितने बच्चों में सीखने की इच्छा जगा सकता है। किसी विद्यार्थी की ख़ामोशी के पीछे छिपी परेशानी पहचानना, असफलता पर उसका हौसला बढ़ाना और छोटी-सी सफलता पर उसकी आँखों में चमक देखना शिक्षक का मानवीय सामर्थ्य है। एआई से शिक्षा अधिक संवादात्मक बन सकती है, लेकिन उसका वास्तविक मूल्यांकन बच्चों की समझ, समान अवसर और शिक्षकों की तैयारी से होगा। भविष्य की सुंदर कक्षा वही होगी जहाँ तकनीक ज्ञान का रास्ता रोशन करे, मगर उस रास्ते पर बच्चे का हाथ शिक्षक ही थामे।
Updated on:
15 Oct 2026 01:10 pm
Published on:
15 Oct 2026 01:10 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
