15 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Explainer: अब क्लास में पढ़ाएगा AI! 11वीं-12वीं के शिक्षकों को मिलेगी ख़ास ट्रेनिंग, क्या बदल जाएगा पढ़ाई और परीक्षा का तरीक़ा?

तमिलनाडु की कक्षाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पढ़ाई को नया रूप देने की तैयारी है। चेन्नई के लगभग 6,500 शिक्षकों तक प्रशिक्षण पहुँचाने की योजना है। अब प्रयोगों के आभासी प्रदर्शन, डिजिटल प्रश्नोत्तरी और सोचने-समझने की क्षमता पर आधारित सवालों से शिक्षण बदल सकता है। लेकिन क्या तकनीक बच्चों की जिज्ञासा और शिक्षक के अनुभव का विकल्प बन पाएगी?
4 min read
Google source verification

•

image

MI Zahir

•

Oct 15, 2026

AI Classroom Revolution News.

क्लास में AI से प्रयोग, सवाल और सीखने के तरीक़े बदलने की तैयारी, शिक्षकों की भूमिका होगी और अहम। ( फोटो डिजाइन : ChatGPT)

कभी ब्लैकबोर्ड पर चॉक से खींची गई एक लकीर बच्चों के सामने पूरी दुनिया खोल देती थी। शिक्षक सवाल पूछते, बच्चे अपनी कॉपियों में जवाब तलाशते और घंटी बजने के बाद भी कुछ सवाल मन में रह जाते। अब उसी कक्षा में एक नया मेहमान दस्तक दे रहा है-कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI। यह मेहमान न तो चॉक थामेगा, न शिक्षक की कुर्सी पर बैठेगा, लेकिन मुश्किल सवालों को समझाने और प्रयोगों को आँखों के सामने साकार करने में मदद कर सकता है।

चेन्नई से शुरुआत, हज़ारों शिक्षकों तक पहुँचेगी नई सीख

तमिलनाडु की राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने चेन्नई में 11वीं और 12वीं के सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को एआई और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का प्रशिक्षण देने की पहल शुरू की है। 14 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, पहले चरण में लगभग 90 प्रशिक्षक तैयार किए जा रहे हैं। ये आगे विद्यालयों में जाकर स्नातकोत्तर शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। चेन्नई के लगभग 6,500 शिक्षकों को लाभ पहुँचाने का लक्ष्य है। अगले कुछ महीनों में प्रशिक्षण का विस्तार प्रस्तावित है।

जब किताब का प्रयोग आँखों के सामने जीवंत हो उठेगा

कल्पना कीजिए, भौतिक विज्ञान की कक्षा में शिक्षक प्रकाश के अपवर्तन का नियम समझा रहे हों। अब विद्यार्थी केवल चित्र नहीं देखेंगे, बल्कि स्मार्टबोर्ड पर बदलती परिस्थितियों में प्रकाश की दिशा भी समझ सकेंगे। प्रशिक्षण में विज्ञान के आभासी प्रयोग, प्रश्न तैयार करने वाले डिजिटल उपकरण और शैक्षिक सामग्री निर्माण शामिल हैं। इसका अर्थ प्रयोगशालाओं को बंद करना नहीं, बल्कि वास्तविक प्रयोगों से पहले अवधारणाओं को अधिक स्पष्ट बनाना है।

रटने से आगे बढ़ कर सवाल पूछने की आज़ादी

शिक्षा का असली सौंदर्य याद किए गए उत्तर में नहीं, बल्कि उस सवाल में है जो बच्चे की समझ से जन्म लेता है। एआई शिक्षक को ऐसे प्रश्न बनाने में मदद कर सकता है जिनमें विद्यार्थी केवल परिभाषाएँ न दोहराएँ, बल्कि कारण बताएँ, तुलना करें और अपने निर्णय का तर्क दें। डिजिटल प्रश्नोत्तरी के ज़रिए शिक्षक यह भी पहचान सकेंगे कि किस अवधारणा पर विद्यार्थियों को अतिरिक्त अभ्यास की ज़रूरत है।

पढ़ाई की नई तस्वीर: क्या बदलेगा, क्या नहीं?

अभी की चुनौतीएआई से संभावनाशिक्षक की भूमिका
कठिन प्रयोगआभासी प्रदर्शनवास्तविक अभ्यास
जटिल अवधारणादृश्य उदाहरणसरल व्याख्या
एक जैसे प्रश्नविविध प्रश्नगुणवत्ता जाँच
धीमा मूल्यांकनत्वरित अभ्यास-जाँचप्रगति समीक्षा
सीमित सामग्रीडिजिटल संसाधनसही चयन
अलग सीखने की गतिस्तरानुसार अभ्यासव्यक्तिगत सहयोग
तकनीकी भ्रमडिजिटल साक्षरतासुरक्षित इस्तेमाल

स्रोत: तमिलनाडु शिक्षक-प्रशिक्षण पहल और यूनेस्को के शैक्षिक दिशा-निर्देशों के आधार पर संभावित उपयोग। ये लागू हो चुके परिणाम नहीं हैं।

देश की शिक्षा-व्यवस्था में भी शुरू हो चुका बदलाव

यह कहानी केवल तमिलनाडु की नहीं है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए तीसरी से आठवीं कक्षा तक संगणकीय चिंतन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की पाठ्यचर्या रूपरेखा जारी की है। विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसके काम करने के तरीक़े को समझने वाला जागरूक विद्यार्थी बनाना है।

परीक्षा के सवाल बदलेंगे, मगर बोर्ड का स्वरूप अभी वही

नौवीं से बारहवीं तक एआई संबंधी अध्ययन की व्यवस्थाएँ भी विकसित हुई हैं। बोर्ड की 9 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के अनुसार, नौवीं से बारहवीं के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के मॉड्यूल आंतरिक मूल्यांकन हेतु प्रस्तावित किए गए थे। ग्यारहवीं-बारहवीं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल विषय की पाठ्यचर्या भी उपलब्ध है। हालांकि, तमिलनाडु के इस प्रशिक्षण से बोर्ड परीक्षाओं की प्रश्नपत्र-पद्धति या अंक-वितरण बदलने का कोई पुष्ट आदेश सामने नहीं आया है।

प्रशिक्षण की पहुँच: कितने शिक्षक, कितनी तैयारी?

चेन्नई में लगभग 90 प्रशिक्षकों से शुरू हुआ यह प्रयास 6,500 शिक्षकों तक पहुँचने की योजना है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर 'स्किलिंग फ़ॉर एआई रेडीनेस' अर्थात सोअर पहल में शिक्षकों के लिए 45 घंटे का प्रशिक्षण मॉड्यूल है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास प्रवर्तक के सहयोग से 'स्वयं प्लस' पर 40 घंटे का शिक्षक पाठ्यक्रम भी उपलब्ध है। इन अलग-अलग कार्यक्रमों के आँकड़ों को एक ही प्रशिक्षण अभियान का हिस्सा नहीं समझना चाहिए।

AI शिक्षा के बड़े आँकड़े: एक नज़र में

पहलआँकड़ादायरा
चेन्नई प्रशिक्षणलगभग 90शुरुआती प्रशिक्षक
प्रस्तावित लाभार्थीलगभग 6,500शिक्षक
टीएनस्पार्क5,000 से अधिकविद्यालय
सोअर विद्यार्थी3 × 15 घंटेप्रशिक्षण मॉड्यूल
सोअर शिक्षक45 घंटेप्रशिक्षण मॉड्यूल
स्वयं प्लस40 घंटेशिक्षक पाठ्यक्रम
यूनेस्को रूपरेखा15 दक्षताएँपाँच आयाम

स्रोत: तमिलनाडु प्रशिक्षण की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट; भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की सोअर संबंधी विज्ञप्ति; स्वयं प्लस पाठ्यक्रम और यूनेस्को की शिक्षक दक्षता रूपरेखा। टीएनस्पार्क के विद्यालयों का आँकड़ा 2024 से संचालित पहल से संबंधित है।

तकनीक की चमक के पीछे बच्चों की सुरक्षा का सवाल

हर नई तकनीक अपने साथ कुछ आशंकाएँ भी लाती है। एआई गलत जानकारी दे सकता है, पक्षपातपूर्ण उत्तर बना सकता है और विद्यार्थियों की निजी जानकारी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। यूनेस्को ने शिक्षा में जनरेटिव एआई के सुरक्षित इस्तेमाल, आयु के अनुरूप पहुँच, गोपनीयता और मानवीय निगरानी पर ज़ोर दिया है। इसलिए शिक्षक को एआई के हर उत्तर को अंतिम सत्य मानने के बजाय उसकी जाँच करनी होगी। बच्चों की संवेदनशील जानकारी किसी बाहरी उपकरण में डालने से भी बचना होगा।

बदलते ज़माने में भी शिक्षक ही रहेंगे उम्मीद की रोशनी

सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि एआई कितने सवाल हल कर सकता है, बल्कि यह है कि वह कितने बच्चों में सीखने की इच्छा जगा सकता है। किसी विद्यार्थी की ख़ामोशी के पीछे छिपी परेशानी पहचानना, असफलता पर उसका हौसला बढ़ाना और छोटी-सी सफलता पर उसकी आँखों में चमक देखना शिक्षक का मानवीय सामर्थ्य है। एआई से शिक्षा अधिक संवादात्मक बन सकती है, लेकिन उसका वास्तविक मूल्यांकन बच्चों की समझ, समान अवसर और शिक्षकों की तैयारी से होगा। भविष्य की सुंदर कक्षा वही होगी जहाँ तकनीक ज्ञान का रास्ता रोशन करे, मगर उस रास्ते पर बच्चे का हाथ शिक्षक ही थामे।