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अजमेर: मौत के बाद सामने आई ऐसी तस्वीर, बंदी का शव लेने से रिश्तेदार ने किया इनकार; पुलिस ने करवाया अंतिम संस्कार

केन्द्रीय कारागार अजमेर में चेक अनादरण के मामले में सजा भुगत रहे नवरतन की जेएलएन अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने उसकी मौत की सूचना रिश्तेदार को दी, लेकिन उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया।
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मृतक नवरतन सिंह, फाइल फोटो पत्रिका

अजमेर। जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर जेल में सजा काट रहे नवरतनसिंह की मौत के बाद एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसमें अपराध की सजा से ज्यादा अपनों की बेरुखी का मंजर नजर आया। केन्द्रीय कारागार अजमेर में चेक अनादरण के मामले में सजा भुगत रहे नवरतन की जेएलएन अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार सुबह मौत हो गई।

पुलिस ने उसकी मौत की सूचना रिश्तेदार को दी, लेकिन उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया। आखिरकार न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया। परिजन के नहीं आने पर पुलिस की ओर से नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार कराया गया।

जेल से अस्पताल और फिर जिंदगी का अंत

पुलिस के अनुसार मीरशाहअली, भोपों का बाड़ा, पवनसुत कॉलोनी निवासी नवरतनसिंह(53) पुत्र लालसिंह 138 एनआई एक्ट के मामले में अजमेर सेन्ट्रल जेल में सजा भुगत रहा था। गत 21 अगस्त को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने उसको जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान गुरुवार सुबह उसकी मौत हो गई।

पुलिस लाइन से बंदी वार्ड में तैनात एएसआई परशुराम ने जेल प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद जेलर सुभाषचंद, प्रहरी महिपाल अस्पताल पहुंचे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई शुरू की गई।

मौत की सूचना पर भी नहीं आया कोई

सहायक उप निरीक्षक भीम सिंह ने बताया कि जेल प्रशासन ने नवरतन सिंह की तबीयत बिगड़ने और ज्यादा गम्भीर स्थिति में परिवार को दो दिन पहले सूचना दी लेकिन रिश्तेदार ने कोई तवज्जो नहीं दी। इसके बाद मृत्यु की सूचना दी तो मृतक की रिश्तेदार ने नवरतन सिंह से किसी भी तरह के संबंध रखने और बेदखली की बात कहते हुए आने से इनकार कर दिया। काफी इंतजार के बाद पुलिस ने न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर देर शाम शव का अंतिम संस्कार कर दिया।

अपराध की दुनिया से दूरी, रिश्तों में भी दूरी

पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि नवरतन के खिलाफ 3 प्रकरण दर्ज हुए थे। इनमें से एक मामले में दोषमुक्त हो चुका था जबकि एक प्रकरण में उसको 138 एनआई एक्ट के मामले में सजा हुई थी। मृतक के निकट संबंधियों ने भी उसकी आपराधिक गतिविधियों से दूरी बना ली थी।