
Budha pushkar
पुष्कर (अजमेर). नियमित सार-संभाल और देखरेख के अभाव में बूढ़ा पुष्कर तीर्थ के घाट व मंदिरों की दुर्दशा शुरू हो गई है। हालांकि इस बार बूढ़ा पुष्कर सरोवर में पानी की आवक तो अच्छी हो गई है लेकिन इसके किनारे विभिन्न समाजों की ओर से बनाए गए घाट जर्जर होकर गिरने लगे है वहीं मंदिरों पर ताले जड़े होने से पूजा अर्चना तक नहीं हो पा रही है।
भाजपा राज में वर्ष 2008 में ब्रह्मा के प्राचीन बूढ़ा पुष्कर सरोवर का कायाकल्प किया था। धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत के प्रयासों से अस्तित्व खो रहे बूढ़ा पुष्कर तीर्थ के विकास की योजना शुरू की गई थी। विभिन समाजों ने 11-11 लाख रुपए देकर अपने-अपने आराध्यों के मंदिर निर्मित करवाए। घाट पर सीढिय़ां बनाई गई तथा पुरातन तीर्थ को नया स्वरूप मिल सका था। लेकिन अब तीर्थ की दुर्दशा होने लगी है। आज हालत यह है कि मंदिरों के कपाट पर ताले जड़े हैं। घाटों की सीढिय़ों पर लगे लाल पत्थर धंसने लगे है। मंदिरों की दीवारों में दरार चलने के साथ साथ पत्थर गिरने लगे हैं।
मूर्तियों की बेकद्री
बूढ़ा पुष्कर घाट पर चारों ओर गंदगी पसरी हुई है। भाजपा सरकार ने इस तीर्थ में प्रवाहित की जाने वाली देवी देवताओं की प्रतिमाओं को म्यूजियम के माध्यम से सुरक्षित रखने की बात कही थी लेकिन जगत के खेवनहार ब्रह्मा, शिव, भगवान गणेश सहित विभिन देवीदेवताओं की मूर्तियां गंदगी में पड़ी हैं।
Published on:
25 Jul 2019, 10:25 PM IST
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