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Gangaur Festival: सिंजारा पूजन की तैयारी, गणगौर की पूजा 27 को

घरों में ईसर-गणगौर की सामूहिक पूजा-अर्चना होगी।

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gangaur pujan

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अजमेर.

महिलाएं और युवतियां गणगौर पूजन में जुटी है। परम्परानुसार गुरुवार को सिंजारा होगा। शुक्रवार को ईसर-गणगौर का पारम्परिक तरीके से पूजा होगी। हालांकि कोरोना वायरस संक्रमण और लॉकडाउन के चलते बैंड-बाजे और ढोल-ढमाके नहीं बजेंगे।

वैशाली नगर, पंचशील, मदार गेट, नया बाजार, पुरानी मंडी, शास्त्री नगर, आदर्श नगर, धौलाभाटा, रागमंज, बिहारी गंज, हरिभाऊ उपाध्याय नगर, मदार, फायसागर रोड और अन्य इलाकों में महिलाएं और युवतियां गुरुवार को सिंजारा पर्व मनाएंगी। शुक्रवार को कलश और लोटे में मोगरे, गुलाब, गैंदे के फूल, घास को विशेष ढंग से सजाया जाएगा। घरों में ईसर-गणगौर की सामूहिक पूजा-अर्चना होगी।

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लॉकडाउन से त्यौंहार फीके...
देशभर में लॉक डाउन के सभी त्यौंहार सादगी से मनाए जाएंगे। इनमें गणगौर भी शामिल है। महिलाएं घरों में ही गौर-गौर गोमती, ईसर पूजे पार्वती..., खोल ये गणगौर माता...और अन्य गीत गाएंगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार कई विवाहित महिलाओं ने उद्यापन रखे हैं, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए सादगी से ही भोजन कराया जाएगा।

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गणगौर की सवारी मुश्किल
शहर में प्रतिवर्ष सोलथम्बा फरिकेन की तरफ से नया बाजार, आगरा गेट होते हुए राठौड़ बाबा और गणगौर की सवारी गाजे-बाजे के साथ निकाली जाती है। दूसरे दिन महेंदी और लच्छे का वितरण होता है। इसी तरह घसेटी धड़े की ईसर-गणगौर की सवारी भी परम्परानुसार निकाली जाती है। इस बार 14 अप्रेल तक लॉकडाउन के चलते सवारियां नहीं निकल पाएंगी।

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लॉकडाउन से दूध पर संकट, सबकी नजरें डेयरी पर

अजमेर. सरकार के 21 दिन के लॉक डाउन के चलते लोगों की चिंता बढ़ गई हुई है। हालांकि सरकार ने होम डिलीवरी से जरूरी सामान पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके बावजूद दुग्ध व्यवस्था पर असर दिखने लगा है। ऐसे में शहर और जिले में अजमेर डेयरी और पशुपालकों पर जिम्मेदारी बढ़ गई है।

अजमेर जिले की आबादी करीब 25.83 लाख है। आम लोग, व्यापारी, हलवाई अजमेर डेयरी के अलावा अमूल और निजी डेयरी सहित पशुपालकों के दूध पर निर्भर हैं। 22 मार्च को जनता कफ्र्यू और इसके बाद 25 मार्च से शुरु हुए लॉकडाउन से दूध व्यवसाय पर असर पडऩे लगा है।