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अब अजमेर में होगा गैस से अंतिम संस्कार, हर साल बचेगी हजारों क्विटंल लकडिय़ां

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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 2 Sep 2018, 6:14 PM IST

gass

gas based funeral system

अजमेर.

शहर का पहला गैस आधारित शव दाहगृह ऋषि घाटी श्मशान में जरूरतमंद आमजन के लिए उपलब्ध हो गया। तीन महीने से यह नि:शुल्क उपलब्ध रहेगा। इसके बाद इस शव दाहगृह के जरिए अंतिम संस्कार करने के लिए दो हजार रुपए देने होंगे।

गैस आधारित शवदाह गृह से एक दिन में 10 शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। अंतिम संस्कार के लिए लकडिय़ां फूंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ दाह संस्कार के लिए लकडिय़ों पर निर्भरता भी खत्म होगी।

लोगों को श्मशान स्थल पर शवदाह के लिए अतिरिक्त विकल्प मिल सकेगा साथ ही अंतिम संस्कार में समय व धन की भी बचत होगी धुआं भी नहीं होगा।

गैस आधारित शवदाह गृह पारम्परिक तौर पर अपनाई जाने वाली क्रिया से सस्ता तथा आधुनिक होगा। इन शव दाहगृह में एलपीजी/ सीएनजी गैस का उपयोग होगा। आमतौर पर एक शव के अंतिम संस्कार में लकड़ी व अन्य सामान सहित 5000-6000 रुपए का खर्च आता है वहीं गैस आधारित शव दाहगृह के जरिए अंतिम संस्कार करने पर केवल 2000 रुपए ही खर्च होंगे।

औसतन एक शव के लिए चार क्विंटल लकड़ी की आवश्यकता पड़ती है। बरसात और सर्दी में लकड़ी गीली होने की समस्या भी खत्म होगी।दो घंटे और 25 किलो गैस गैस आधारित शव दाहगृह में एक शव की अंत्येष्टि में 90-120 मिनट लगेंगे।

इस बीन शवदाह होकर राख में परिवर्तित हो जाएगा। एक शव पर 20-25 किलो गैस खर्च होगी। इसके लगातार उपयोग होने पर गैस और समय दोनो में कमी आएगी। अंतिम संस्कार के बाद प्लांट में लगी जाली से अस्थिफूल उपलब्ध होंगे। इनका प्रवाह परिजन गंगा सहित अन्य नदियों में कर सकते हैं। राख को तीन स्टेज में प्रोसेज किया जाएगा।


चांद और मंगल ग्रह पर बसाएंगे ये कॉलोनी..

लो जी मिल गया मुद्दा। मुझे होजमालो कॉलम लिखने का और सिंधी समाज को थोड़ी बहुत एकजुटता दिखाने का। मामला ताजा ताजा ही है। सिंधी समाज के अनेक संगठन भी इस मुद्दे को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे हैं। यह जुदा बात है कि अलग अलग संगठन अपने अपने कार्यालय में बैठकर ही इसपर अखबारी रोष जाहिर कर रहे हैं। सुना है कि सिंधुपति महाराजा दाहरसेन और शहीद हेमू कालाणी के नाम से प्रस्तावित कॉलोनियों की फाइल बंद की जा रही है। हालांकि कई बरस बीत गए यह कॉलोनियां कभी अस्तित्व में आई ही नहीं बस एक बार फाइल चली और वह फाइल समय के साथ अनगिनत फाइलों में दबकर रह गई।

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