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…….तो  जैन समाज  ने इसलिए किया नसीराबाद बंद का आह्वान
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…….तो जैन समाज ने इसलिए किया नसीराबाद बंद का आह्वान

छावनी परिषद ने निर्माण सामग्री जब्त की जैन समाज ने लगाया मूर्ति तोडऩे का आरोप
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अजमेर

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Preeti Bhatt

•

Updated: 8 Jan 2020, 2:15 PM IST

नसीराबाद. छावनी परिषद प्रशासन ने मंगलवार को जैन समाज के आचार्य ज्ञानसागर समाधि स्थल से निर्माण सामग्री जब्त की। वहीं जैन समाज की ओर से छावनी परिषद प्रशासन पर समाधि स्थल पर जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पाŸवनाथ की मूर्ति तोडऩे का आरोप लगाया गया है। निर्माण सामग्री जब्त करने व परिसर में लगी मूर्ति कथित रूप से तोडऩे के विरोध में जैन समाज की ओर से बुधवार को नसीराबाद बंद का आह्वान किया है। समाज के लोग मंगलवार को व्यापारियों से बंद की अपील करते नजर आए।

जानकारी के अनुसार छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी अरविन्द कुमार नेमा डीएवी स्कूल के पास लगने वाली हाइमास्क लाइट का स्थान देखने गए थे। वहां किसी ने उन्हें समाधि स्थल पर निर्माण कार्य शुरू होने की सूचना दी। इस पर मुख्य अधिशासी अधिकारी ने परिषदकर्मियों को मय जेसीबी व डम्पर के तलब कर लिया और मौके पर जा पहुंचे। उन्हें देख मुख्यद्वार बंद कर दिया गया।

इस पर उन्होंने मुख्यद्वार नहीं खोले जाने पर जेसीबी से दीवार तुड़वाकर अंदर प्रवेश की बात कही। इस पर लोगों ने द्वार खोल दिया। परिषदकर्मी निर्माण सामग्री जब्त कर ही रहे थे कि किसी ने मुख्यद्वार पर फिर ताला जड़ दिया। इस पर मुख्य अधिशासी अधिकारी ने कार्रवाई की चेतावनी दी। एक परिषदकर्मी ने वहां मौजूद चौकीदार से चाबी लेकर ताला खोला। इसके बाद परिषदकर्मी व मुख्य अधिशासी अधिकारी वहां से निर्माण सामग्री लेकर रवाना हुए। इसके बाद लामबंद हुए जैन समाज ने मुख्य अधिशासी अधिकारी पर समाधि स्थल परिसर में लगी मूर्ति तोडऩे का आरोप लगा दिया।

कार्रवाई के विरोध में समाज के सदस्य सुशील कुमार गदिया के साथ समाज के महिला-पुरुष मुख्य बाजार स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के बाहर अनशन पर बैठ गए और णमोकार मंत्र का पाठ प्रारंभ कर दिया। इसके बाद अजय गौड़ व एडवोकेट महेश मेहरा धरना स्थल पहुंचे और परिषद की कार्रवाई का विरोध करते हुए जैन समाज का समर्थन किया। गदिया के अनशन की खबर मिलने पर थानाधिकारी नसीराबाद सिटी लक्ष्मणसिंह नाथावत ने मय जाप्ता मौका मुआयना किया।

इसलिए है महत्व

जैनाचार्य विद्यासागर के गुरु आचार्य ज्ञानसागर की समाधि का पूरे भारत के जैन समाज के लिए महत्व है। आचार्य ज्ञानसागर को 7 फरवरी 1969 को नसीराबाद में ही आचार्य पद दिया गया था। यह पहला अवसर था कि आचार्य ज्ञानसागर ने अपना आचार्य पद त्यागते हुए शिष्य विद्यासागर को 22 नवम्बर 1972 को आचार्य पद से नवाजते हुए उनसे समतापूर्वक समाधि लेने की अनुमति ली थी। आचार्य विद्यासागर ने आचार्य पद ग्रहण करने के बाद पूर्व के गुरु व बाद के शिष्य ज्ञानसागर की सेवा सुश्रुषा की और उनकी समतापूर्वक समाधि कराई।