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Jee Mains: सुधारें जेईई मेन फार्म में रही गलती, 20 अक्टूबर तक मौका

विद्यार्थियों की की सूचना को अंतिम मानते फार्म की जांच की जाएगी। दिसंबर में प्रवेश पत्र अपलोड किए जाएंगे।

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online correction in form

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अजमेर. विद्यार्थी सोमवार से जेईई मेन (jee main exam 2020) के ऑनलाइन फार्म (online form) में रही त्रुटियां (corrections) सुधारने में जुट गए हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने विद्यार्थियों को यह अवसर दिया है।

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एजेंसी के (NTA) तत्वावधान में अगले साल 6 से 11 जनवरी तक जेईई मेन (प्रथम चरण) कराई जाएगी। विद्यार्थी पिछले दिनों ऑनलाइन फार्म (online form) और परीक्षा शुल्क जमा करा चुके हैं। सोमवार से विद्यार्थी ऑनलाइन फार्म में रही त्रुटियां (correction in form) सुधारने में जुट गए। विद्यार्थी 20 अक्टूबर तक तक फार्म की त्रुटियां सुधार सकेंगे। इसके बाद एजेंसी कोई अवसर नहीं देगी। विद्यार्थियों की सूचना (students information) को अंतिम मानते फार्म की जांच की जाएगी। दिसंबर में प्रवेश पत्र अपलोड किए जाएंगे।

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सीटेट के प्रवेश पत्र नवंबर में
सीबीएसई (cbse) के तत्वावधान में दिसंबर में सीटेट (CTET) होगी। परीक्षा के ऑनलाइन फार्म (online form) और त्रुटियां सुधारने का काम पूरा हो चुका है। अब बोर्ड कोई अवसर नहीं देगा। अभ्यर्थियों की सूचना को अंतिम मानते हुए बोर्ड फार्म की जांच (form checking) करेगा। नवंबर में प्रवेश पत्र अपलोड किए जाएंगे।

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इंजीनियरिंग कॉलेज जुड़ेंगे एमडीएस यूनिवर्सिटी से

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (mdsu ajmer) दोनों इंजीनियङ्क्षरग कॉलेज को ‘खुद’ से जोडऩे की कवायद में जुटेगा। दोनों संस्थाओं को संघठक कॉलेज बनाने का प्रस्ताव तकनीकी शिक्षा विभाग भेजा जाएगा। इससे विश्वविद्यालय को कई फायदे होंगे।

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बड़लिया और माखपुरा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर और कोटा के तकनीकी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं। विद्यार्थियों की सेमेस्टर और प्रयोगिक परीक्षाएं, पेपर और पाठ्यक्रम निर्माण दोनों विश्वविद्यालय करते हैं। सेमेस्टर परीक्षाएं, परिणाम निकालने और प्रवेश कार्यों में प्रतिवर्ष विलम्ब हो रहा है। दोनों कॉलेज स्वायत्तशासी समितियों के अधीन संचालित हैं। सरकार से अनुदान नहीं मिलता है। साथ ही अनियमितताओं से सरकार की किरकिरी हो रही है।

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दो साल पहले बना था प्रस्ताव
वर्ष 2017 में तत्कालीन कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने सीएमओ और तकनीकी शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा था। इसमें दोनों कॉलेज को आरटीयू के बजाय विभिन्न महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का संघठक कॉलेज बनाना प्रस्तावित था।