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pushkar fair festival 2017 : यहां प्रजापिता ब्रह्मा ने रचना की थी सृष्टि की, यूं कहलाता है पुष्कर तीर्थगुरू

यह श्रेष्ठतम तीर्थ माना जाता है। भारत के चारों धाम की यात्रा करने के बाद पुष्कर नहीं आए तो यात्री अधूरी मानी जाती है।
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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 1 Nov 2017, 8:22 AM IST

lord brahma createcivilization in pushkar

lord brahma createcivilization in pushkar

रक्तिम तिवारी/अजमेर।

पुष्कर को पौराणिक काल से यूं ही तीर्थराज नहीं कहा जाता है। इसके पीछे आदिकाल और सहस्र शताब्दियों का इतिहास रहा है। ऐसा माना जाता है, कि प्रजापिता ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना पुष्कर क्षेत्र में ही की थी। तबसे ही यह श्रेष्ठतम तीर्थ माना जाता है। भारत के चारों धाम की यात्रा करने के बाद पुष्कर नहीं आए तो यात्री अधूरी मानी जाती है।

पौराणिक कथाओं और मान्यताओं की मानें तो समुद्र मंथन के दौरान कलश से तीन पुष्प नीचे गिरे थे। इनके नाम से बूढ़ा पुष्कर, मध्य पुष्कर और वर्तमान नया पुष्कर का निर्माण हुआ। यहीं पर सृष्टि की रचना के लिए प्रजापिता ब्रह्मा ने यज्ञ किया। इस यज्ञ की भी एक कथा है। ब्रह्माजी को यज्ञ के दौरान पत्नी सावित्री के साथ शामिल होना था। किसी कारणवश सावित्री के यज्ञ में पहुंचने में देरी हो रही थी।

मुर्हूत टलता देख प्रजापिता ब्रह्मा ने गायत्री नामक महिला को विधिवत पत्नी बनाकर यज्ञ में शामिल किया। कुछ देर में सावित्री वहां पहुंची और अपने स्थान पर किसी दूसरी महिला को देखकर क्रोधित हो गई। वे रूठ कर ऊंची पहाड़ी पर बैठ गई। साथ ही ब्रह्माजी को श्राप दिया कि दुनिया में पुष्कर के अलावा आपका कहीं मंदिर नहीं होगा। तबसे विश्व में प्रजापिता ब्रह्मा का एकमात्र मंदिर यहीं हैं।

कुंभ की तरह होता संतों का स्नान

हरिद्वार, इलाहाबाद, नासिक और उज्जैन कुंभ की तरह पुष्कर में संतों के शाही स्नान की परम्परा है। यहां कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा के दौरान विभिन्न अखाड़ों के संत अलग-अलग दिन स्नान करते हैं। इनमें देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संत पुष्कर पहुंचते हैं। संतों के शाही स्नान को देखने के लिए हजारों श्रद्धालुऔर विदेशी पर्यटक पुष्कर पहुंचते हैं।

विदेशी भी रम गए पुष्कर में

पुष्कर की अलबेली संस्कृति, राजस्थानी परम्परा, खान-पान और रेतीले धोरों ने विदेशियों को भी अपना मुरीद बना लिया। इटली, फ्रांस, इजरायल, स्पेन, बेल्जियम, रोमानिया और अन्य देशों के कई महिलाओं और पुरुषों ने पुष्कर में ही भारतीय युवक-युवतियों से विवाह किए। वे अपने परिवारों के साथ बरसों से पुष्कर में रम गए हैं। वे स्थानीय हिंदी, मारवाड़ी और अंग्रेजी भाषा भी बोलना सीख गए हैं।

शूटिंग की शानदार लोकेशन

पुष्कर सहित गनाहेड़ा, माकड़वाली, होकरा, कानस, नेडलिया और अन्य गांवों में रेतीले धोरे, पहाड़, हरियाली और अन्य दृश्य शानदार हैं। यहां शूटिंग की शानदार लोकेशन मौजूद है। कई मारवाड़ी और चुनिंदा ङ्क्षहदी फिल्म की शूटिंग भी हो चुकी है। पुष्कर में डेजर्ट सफारी, कैमल सफारी को बढ़ावा दिया जाए तो यहां कच्छ के रणोत्सव से भी शानदार आयोजन हो सकता है। यहां देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की तमाम संभावनाएं मौजूद हैं।

आध्यात्मिक पदयात्रा का महत्व

कार्तिक मास की एकादशी तिथि को सुबह संत-महंतों के सानिध्य में आध्यात्मिक पदयात्रा निकाली जाती है। इसके चलते जगतपिता ब्रह्मा का पवित्र पुष्कर तीर्थं आध्यात्मिकता से सराबोर हो जाती है। यहां विभिन्न संस्कृतियों का संगम नजर आता है। ऐसी मान्यता है कि पुष्कर तीर्थ की परिक्रमा से भारत के सभी तीर्थों का भ्रमण हो जाता है। इसके चलते यहां पुष्कर मेले सहित साल भर तक लोगों का जमावड़ा रहता है। कार्तिक माह में निकाले जाने वाली आध्यात्मि पदयात्रा में राम दरबार, शिव दरबार, हनुमानजी, प्रजापिता ब्रह्मा, भगवान विष्णु और अन्य देवी-देवताओं की झांकी साथ चलती है।

सरोवर में संतों का शाही स्नान 3 को

मेले के दौरान संतों का शाही स्नान 3 नवम्बर को होगा। इस धार्मिक आयोजन में पुष्कर एवं आस-पास के संत, महंत बैंडबाजों के साथ सामूहिक रूप से पदयात्रा करते हुए सूर्योदय के समय सप्तऋषी घाट पर वेदमंत्रों से पूजन करके सैन भक्तिपीठ के पीठाधीश्वर अचलानन्द के सानिध्य में सरोवर में संत शाही स्नान करेंंगे। यह जानकारी प्रवक्ता हरिप्रसाद पाराशर ने दी।

1 करोड़ 25 लाख का पशु कारोबार

मेले में अब तक पशुपालकों के बीच 810 पशुओं के क्रय-विक्रय से 1 करोड़ 25 लाख की खरीद-फरोख्त हो चुकी है। मेला मैदान से पशुओं की रवानगी जारी रही। कुल 773 पशु जा चुके हैं। पशुपालन विभाग की 59 वीं गीर एवं शंकर पशु प्रदर्शनी जारी है।

अद्भुत रेल विकास प्रदर्शनी
मेले में संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत ने मंडल रेल प्रबंधक पुनीत चावला के सानिध्य में विकास प्रदर्शनी का का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में लगभग 40 साल पुराने रेल मॉडल व रेलवे से संबंधित महात्वपूर्ण जानकारियां तथा रेलवे में अब तक किए गए विकास कार्यों को दर्शाया गया है। साथ ही नेशनल ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम, स्टॉल, अजमेर मंडल के स्टेशनों का सौन्दर्यीकरण, पुष्कर स्टेशन पर सुविधाएं, मदार स्टेशन पर कवर्ड शेड बुकिंग ऑफिस, वाटर वेंडिंग मशीन के पेास्टर प्रदर्शित किए गए हैं। प्रदर्शनी में रेल मॉडल आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। मालूम हो पुष्कर-अजमेर के बीच तीन साल पहले ट्रेन प्रारंभ की गई है।