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गर्वनर साहब आपने किया था इसका उद्घाटन, एक साल से खाली पड़ी है बिल्डिंग

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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 8 Sep 2018, 7:22 AM IST

New Building in lock

New Building in lock

रक्तिम तिवारी/अजमेर।

करोड़ों के भवन बनाकर ‘तमाशा ’देखना हो तो महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय चले आइए। यहं यूजीसी और जनता की गाढ़ी कमाई से बना मंगलम भवन एक साल से खाली पड़ा है। भवन में ना बैंक आया है ना विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं जुटाई गई है। अफसर फाइलों में मामले को बेवजह लटकाए हुए है। इससे नाराज कुलपति ने दूसरे बैंक और संस्थाओं को भवन सौंपने की तैयारी कर ली है।

विश्वविद्यालय ने बहुउद्देशीय और अत्याधुनिक सुविधाओं युक्त मंगलम भवन बनवाया है। यहां भारतीय स्टेट बैंक (तब एसबीबीजे), फोटो और फैक्स सुविधा, इंटरनेट, पोस्ट ऑफिस, छोटा केफेटेरिया और विद्यार्थियों के रुकने के लिए प्रतीक्षालय बनाया गया। ताकि एक ही छत के नीचे उनका सारा कामकाज हो जाए। आधुनिक तकनीकी वाले भवन का बीते वर्ष 1 अगस्त को राज्यपाल कल्याण सिंह ने उद्घाटन किया।

भवन पर एक साल से ताला

अपने नाम के अनुरूप भवन में बैंक या किसी कियोस्क का मंगल प्रवेश नहीं हो पाया है। भारतीय स्टेट बैंक की शाखा यथावत चाणक्य भवन के पिछवाड़े संचालित है। इसी तरह पोस्ट ऑफिस मोटर गैराज में संचालित है। फोटो-फैक्स इंटरनेट कियोस्क तो पिछले कई साल से बंद है। विद्यार्थी या आगंतुक को बैंक, पोस्ट ऑफिस या कोई काम हो तो उसे इधर-उधर भटकना पड़ता है। मंगलम भवन पर एक साल से ताला लटका हुआ है।

बैंक-विश्वविद्यालय में घूम रही फाइल

किराएनामे को लेकर बैंक और विश्वविद्यालय एकराय नहीं है। पूर्व में विश्वविद्यालय ने एसबीबीजे को नियमों-शर्तों के तहत भवन किराए पर दिया था। अब उस बैंक का एसबीआई में विलय हो चुका है। ऐसे में दोनों संस्थाओं के बीच नए सेवा-शर्तों के तहत करार होना है। किराएनामे और नियमों को लेकर दोनों संस्थाओं के अफसर कोई तालमेल नहीं बैठ पाया है।

वरना देंगे दूसरी संस्थाओं को...

एसबीआई की बेफिक्री और विश्वविद्यालय अधिकारियों की लापरवाही को कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने किसी दूसरी राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा संस्था को भवन आवंटित करने की योजना बनाई है। इस मामले में उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी से भी चर्चा की गई है। 9 सितम्बर को माहेश्वरी के अजमेर आने पर भवन पर कोई अहम फैसला हो सकता है।


कई भवन हुए बदहाल

विश्वविद्यालय की अनदेखी से कई भवन बदहाल हो चुके हैं। इनके निर्माण में सरकार, यूजीसी और जनता की गाढ़ी कमाई लगी है। इनमें स्टाफ कॉलोनी के निकट बने परीक्षा नियंत्रक और कुलसचिव के क्वार्टर, शोधार्थियों के लिए बना याज्ञवलक्य भवन और बुक वल्र्ड, डेयरी पार्लर कियोस्क शामिल है। विक्रमादित्य भवन के पीछे भी छह साल से भवन अधूरा पड़ा है।


एक साल से मंगलम भवन का कोई उपयोग नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। विश्वविद्यालय लाखों रुपए की आय से महरूम है। जल्द फैसला नहीं हुआ तो किसी दूसरे बैंक या संस्थान को भवन आवंटित करेंगे।
प्रो. कैलाश सोडाणी, कुलपति मदस विश्वविद्यालय