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मौसम स्टेशन ही नहीं तो कैसे मिलेगी मौसम की पहले से जानकारी

हालात : अब नहीं है आकलन का कोई साधन, बरसात के आंकड़ों के लिए भी जलाशयों व पुलिस थानों में लगे गेज
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अजमेर

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Sonam Ranawat

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Updated: 1 Jun 2018, 8:07 PM IST

No have weather Assessment Tool in our city

अगर होते मौसम स्टेशन तो मिलता सटीक पूर्वानुमान

अजमेर . हवा में नमी अथवा सूखापन, भारी बरसात के संकेत..जैसी सूचनाएं सरकार, प्रशासन सहित आमजन के लिए खास होती हैं। इससे मौसम का आकलन भी होता है। लेकिन खुद सरकार ही यह सूचनाएं संकलित करने वाला तंत्र उजाड़ दे तो कोई क्या कर सकता है। सिंचाई विभाग में बर्बाद हुए विशेष मौसम स्टेशन कुछ यही हालात बयां करते हैं। अब विभाग के पास मौसम का पूर्वानुमान और आकलन का कोई साधन नहीं है। बरसात के आंकड़ों के लिए भी वह अपने जलाशयों अथवा पुलिस थानों में लगे गेज पर निर्भर है।

साल 1997-98 में सिंचाई विभाग में विशेष मौसम स्टेशन बनाए गए थे। जिले में अजमेर, ऊंटड़ा, नारायण सागर, डाई नदी, टॉडगढ़, लसाडिय़ा में यह स्टेशन तैयार किए गए। यहां हाइटेक मशीन लगाई गई। साथ ही हाइड्रॉलिक विंग बनाकर स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया। शुरुआती दौर में तो इन स्टेशन पर कामकाज हुआ, लेकिन बाद में बर्बाद हो गए। सरकार ने धीरे-धीरे स्टाफ को दूसरे महकमों को भेजकर स्टेशन को तकरीबन बंद कर दिया।

बजट की कमी, उपकरण खराब

प्रत्येक मौसम स्टेशन में इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी, चौकीदार लगाए गए थे। यहां ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से विशेष उपकरण और मशीन मंगवाई गई। सरकार से इन्हें प्रतिवर्ष 2 से 5 लाख रुपए बजट मिलता था। एकाध साल बाद बजट मिलना बंद हो गया। बजट की कमी के चलते उपकरण खराब होते चले गए। बाद में तो इन उपकरणों और मशीन को हटा दिया गया।

केवल बरसात ही नापता है विभाग

सिंचाई विभाग साल में चार महीने सिर्फ बरसात ही मापता है। प्रदेश में 1 जून से 30 सितम्बर तक मानसून का दौर माना जाता है। इस दौरान जिले में होने वाली बरसात और जलाशयों में पानी की आवक का विभाग प्रतिदिन रिकॉर्ड तैयार करता है। लेकिन इनके लिए जलाशयों अथवा पुलिस थानों में लगे गेज पर ही निर्भर है। कई बार जलाशयों के वास्तविक गेज और बरसात की सूचनाओं में फर्क मिलता है।

नहीं है शहर में ज्यादा वर्षामापी यंत्र

शहर में जयपुर रोड पर सिंचाई विभाग और रामगंज स्थित मौसम विभाग में वर्षामापी यंत्र है। दोनों विभाग इन क्षेत्रों में होने वाली बरसात के आधार पर आंकड़ा बताते हैं। अगर शहर के वैशाली नगर, लोहागल, फायसागर क्षेत्र, कोटड़ा, शास्त्री नगर या किसी दूसरे इलाके में ही अतिवृष्टि हो जाए तो दोनों महकमे इका आकलन अथवा आंकड़ा नहीं बता सकते।

यह होता विशेष मौसम स्टेशन से फायदा....

-जलाशयों, तालाब और नदियों में सटीक गेज

-हवा में नमी अथवा सूखेपन का आकलन

-अतिवृिष्ट या कम बरसात होने का अनुमान

-शोधार्थियों और विद्यार्थियों को अध्ययन-अध्यापन में लाभ

-संस्थाओं में मौसम आधारित पाठ्यक्रमों की शुरुआत