
फाइल फोटो- विष्णु सिंह और जगन गुर्जर
Jagan Gurjar Death: अजमेर. घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल में दस्यु जगन गुर्जर की हत्या ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक इस फरारी, हत्या की साजिश और जेल के भीतर से आपराधिक नेटवर्क संचालित होने के मामलों में जेल का नाम सामने आता रहा है, लेकिन पहली बार जेल में साथी बंदी पर हत्या का आरोप लगा है। वारदात से बैरक आवंटन, निगरानी व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली जांच के घेरे में आ गई है।
घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल में दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के बाद सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि कुलदीप सिंह जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु सिंह उर्फ बौना और जगन गुर्जर को एक ही सेल में रखने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया। प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार दोनों 16 मई से एक ही सेल में रह रहे थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या दोनों को साथ रखने से जुड़े संभावित जोखिमों का आंकलन किया गया था या नहीं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी विष्णु ने कथित रूप से पीछे से गमछे से जगन गुर्जर का गला कसकर हत्या की। जांच में यह भी सामने आया कि मौत सुनिश्चित करने के बाद घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। वारदात में इस्तेमाल गमछा सेल में लगे पंखे पर लटका मिला। इससे इस बात की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि शव को फंदे पर लटकाने का प्रयास किया गया हो, लेकिन जगन गुर्जर का भारी शरीर होने के कारण आरोपी इसमें सफल नहीं हो सका। जांच अधिकारी के सामने यह सवाल भी है कि इतने भारी-भरकम बंदी को फंदे पर लटकाने का प्रयास अकेले व्यक्ति के लिए कितना संभव था। इस पहलू की भी गहन जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोपहर करीब 3 बजे जब सेल खोली गई और जगन नहीं उठा तो विष्णु सिंह ने ड्यूटी पर तैनात प्रहरी से कथित तौर पर कहा मैंने जगन को मार दिया है, उसके पास मत जाना। इसके बाद वह स्वयं सेल से बाहर आ गया। सूचना मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची तथा जांच शुरू कर दी गई। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हत्या केवल व्यक्तिगत रंजिश का परिणाम थी या इसके पीछे कोई बड़ी आपराधिक साजिश थी।
जेल प्रशासन की बंदी का चयन, सेल आवंटन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हार्डकोर अपराधियों को किन आधारों पर एक साथ रखा गया और उनकी गतिविधियों पर किस स्तर की निगरानी थी, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
जेल अधीक्षक पारसमल जांगिड़ की हालिया नियुक्ति भी चर्चा में है। उन्हें 22 जून को एकल आदेश के जरिए पुनः घूघरा हाई सिक्योरिटी जेल में पदस्थापित किया गया था। इससे पहले वे दौसा की श्यालावास विशिष्ट केंद्रीय कारागार में तैनात थे। उनके आने के कुछ ही दिनों बाद हुई इस वारदात ने प्रशासनिक स्तर पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जगन गुर्जर हत्याकांड के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं? क्या हत्या पूर्व नियोजित थी, क्या इसमें किसी अन्य बंदी या जेलकर्मी की भूमिका रही, दोनों बंदियों को एक सेल में रखने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। हाई सिक्योरिटी जेल जैसी संवेदनशील व्यवस्था में इतनी बड़ी सुरक्षा चूक कैसे हुई। इन सवालों के जवाब ही इस चर्चित हत्याकांड की परतें खोलेंगे।
Updated on:
01 Jul 2026 11:02 am
Published on:
01 Jul 2026 10:57 am
बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
