
Ajmer News : बिजली लाइनों के पैंथर, जेब्रा, डॉग, वुल्फ, रैबिट, रकून और अन्य कंडक्टर-उपकरण बदले जाएंगे। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलेगी। बिजली लाइनों और उपकरणों को साइंटिफिक की जगह जानवरों के नाम से ज्यादा जाना जाता है। इसकी मुख्य वजह उनकी क्षमता और आकार के आधार पर वर्गीकृत करना और पहचान निर्धारित करना है। यह प्रणाली बिजली कर्मियों को भी याद रखने में आसान रहती है।
जानवरों के नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक प्रणाली का हिस्सा है। इससे दुनियाभर में इंजीनियर और टेक्नोक्रेटस के लिए इन्हें समझने में आसानी होती है। बिजली कंडक्टर के आकार और उनके भौतिक गुणों की तुलना जानवरों के साथ की जाती है। जैसे स्क्वायरल और रैबिट हल्के कंडक्टर होते हैं। जेब्रा, पैंथर, बियर भारी कंडक्टर होते हैं।
बिजली लाइन में उपयोग होने वाले कंडक्टर प्लांट से घरों तक बिजली पहुंचाते हैं। यह ऐसे उपकरण हैं जो लाइनों में बिजली का प्रवाह कुशलता से करते हैं। बिजली कंडक्टर की लाइनों में अहम भूमिका होती है। यह एल्यूमिनियम, कॉपर, टंगस्टन और अन्य धातुओं से बनते हैं। कंडक्टर के डिजाइन का चयन बिजली की जरूरत और भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार किया जाता है।
1- स्क्वायरल - छोटा-छोटी दूरी के लिए उपयोग।
2- रैबिट - मध्यम - हल्के लोड के लिए।
3- डॉग - भारी- सामान्य वितरण लाइनों के लिए।
4- वुल्फ - अधिक भारी-हाई वोल्टेज लाइनों के लिए।
5- जेब्रा - अधिक भारी-हाई वोल्टेज लाइनों के लिए।
6- मूस - बहुत भारी-लंबी दूरी और उच्च क्षमता।
बिजली के कंडक्टर और लाइनों के नाम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होते हैं। इन्हें समझने में आसानी होती है। निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के लिए इन्हें बदला जाता है।
एन.एस.निर्वाण, पूर्व एमडी अजमेर डिस्कॉम
Updated on:
21 Nov 2024 12:02 pm
Published on:
21 Nov 2024 12:01 pm

बड़ी खबरें
View Allअजमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
