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Save water: पानी बहुत अनमोल, कुछ तो समझें इसका मोल

2,550 एमसीएफटी पानी बेवजह कहीं भी भरने के अलावा सडक़ों-नालियों से व्यर्थ बह जाता है।

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save rain water

save rain water

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

पानी (drinking water) बहुत अनमोल है, यह सब जानते और समझतें है। फिर भी सरकारी महकमों और आमजन को इसकी ‘चिंता ’ नहीं है। बरसात (rain in ajmer) में हर साल सडक़ों-नालियों में व्यर्थ बहने वाला हजारों लीटर पानी यह लापरवाही बता रहा है। यही पानी खरीदना पड़ा जाए हजारों रुपए ढीले करने पड़ेंगे।

जिले में मानसून (monsoon) की अवधि 1 जून से 30 सितंबर रहती है। इसकी औसत बरसात 550 मिलीमीटर है। बरसात के रूप में जिले में करीब 5,550 एमसीएफटी पानी गिरता है। इसमें से महज ढाई हजार एमसीएफटी पानी ही झीलों-तालाबों अथवा भूमिगत टैंक (ground water tank) तक पहुंचता है। बाकी 2,550 एमसीएफटी पानी बेवजह कहीं भी भरने के अलावा सडक़ों-नालियों (roads and sever) से व्यर्थ बह जाता है।

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भरपूर बरसात, फिर भी ये हाल
मानसून इस बार जबरदस्त मेहरबान रहा। 1 जून से 9 अक्टूबर तक 948 मिलीमीटर बरसात (heavy rain in ajmer) हो चुकी है। आनासागर, फायसागर, पुष्कर सहित कई बड़े-छोटे तालाब, एनिकट में जबरदस्त पानी की आवक हुई। फिर भी बीर, ऊंटड़ा, फूल सागर कायड़, घूघरा सहित जिले के तालाबों में नाम मात्र का पानी पहुंचा। पानी आवक मार्ग में अतिक्रमण (illegal construction), बेतरतरीब निर्माण और नालों के कारण यह स्थिति बनी है।

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रेन वाटर हार्वेस्टिंग से दूरी...
केंद्र अैार राज्य सरकार ने सभी सरकारी अैार निजी विभागों, आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों को बरसात (barsat) के पानी को संग्रहण (rain water harvesting) करने के निर्देश दिए हैं। कुछ जगह शुरुआत हुई है पर संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक ही हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, मेडिकल, दयानंद कॉलेज, जल संसाधन विकास, बिजली विभाग, इंजीनियरिंग कॉलेज, सीबीएसई और राज्य एवं केंद्र सरकार के विभिन्न महकमे, निजी स्कूल, अद्र्ध सरकारी विभाग, निजी कार्यालयों, दुकानों में बरसात के पानी की बचत (save water) नहीं हो रही।

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पानी के बिल का गणित
घरेलू पानी के कनेक्शन-6 लाख, अवैध कनेक्शन-50 हजार
व्यावसायिक कनेक्शन-10 हजार
घरेलू कनेक्शन का औसत बिल-250 से 550 रुपए (प्रति दो माह)
व्यावसायिक कनेक्शन का औसत बिल-550 से 1000 रुपए (प्रति दो माह)

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खरीदना पड़े तो जेब ढीली...

जलदाय विभाग प्रति दो माह का पेयजल सप्लाई (water supply bill) बिल भेजता है। इनमें सरकारी-निजी महकमे, घरेलू-व्यावसायिक उपभोक्ता, स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय और अन्य संस्थाएं शामिल हैं। गर्मियों में पानी की किल्लत होते ही 700 से 1000 रुपए के टैंकर (water tanker) मंगाने पड़ते हैं। बरसात (rain) में व्यर्थ बहने वाले 2,550 एमसीएफटी पानी को खरीदना पड़ जाए तो 5 से 10 हजार रुपए ढीले करने पड़ेंगे।

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पिछले सात साल में हुई कम बरसात(1 जून से 30 सितम्बर)
2012-520.2
2013-540
2014-545.8
2015-381.44
2016-512.07
2017-450
2018-350

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बरसाती पानी की कीमत सिर्फ पैसों से नहीं समझी जा सकती। पानी से भूजल जलस्तर बढऩे के साथ-साथ जैव विविधता को भी फायदा मिलता है। ग्लोबल वार्मिंग से ऑस्ट्रेलिया में 50 साल में सूखा और तापमान बढ़ा। भारत में चेन्नई, मुंबई, नागपुर और अन्य शहर में पेयजल की कमी है। अजमेर-जयपुर-टोंक बीसलपुर पर निर्भर हैं। बेकार बहने वाला पानी 2-3 साल तक लोगों की प्यास बुझा सकता है। केवल सरकार को दोष देना भी ठीक नहीं है। आमजन को भी बरसात रूपी अमृत को बचाना होगा।

प्रो. प्रवीण माथुर, पर्यावरण विभागाध्यक्ष एमडीएस यूनिवर्सिटी