
teachers rays voice for change
रक्तिम तिवारी/अजमेर।
देश की सियासत में सशक्त भागीदारी के लिए शिक्षित लोगों की भागीदारी आवश्यक है। पढ़े-लिखे व्यक्ति किसी भी देश को नई दिशा देने में सक्षम हैं। कनाडा, फ्रांस और अन्य देशों के राजनेता इसके परिचायक हैं। भारत में भी शिक्षा, कृषि, तकनीकी, चिकित्सा जगत सहित युवाओं को राजनीति में स्वच्छता के लिए आगे बढऩे की जरूरत है। यह बात अजमेर के शैक्षिक समुदाय ने पत्रिका के चेंजमेकर अभियान के तहत परिचर्चा के दौरान कही। शिक्षकों ने पत्रिका के अभियान को नवाचार और राजनीति में परिवर्तन की शुरुआत बताते हुए कहा कि अच्छे लोगों के सियासत में होने पर ही देश विकसित बन सकता है।
राजनीति में पढ़े-लिखे, समझदार लोगों को बदलाव की पहल करनी चाहिए। चाहे वह किसी भी जाति-पंथ का हो, इससे फर्क नहीं पड़ता। पूर्व में राजस्थान में शिक्षा विभाग के कर्मचारी, शिक्षक राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाते थे। लेकिन राज्य सरकार ने अध्यादेश पारित कर इनकी राजनीति में भाग लेने पर पाबंदी लगा दी है। यह 7 लाख कर्मचारियों-शिक्षक समुदाय के साथ छलावा है। राजस्थान पत्रिका का चेंज मेकर अभियान को एक नवाचार आंदोलन के रूप में लेकर सबको भागीदार बनना चाहिए।
-विजय सोनी प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ राधाकृष्णन्
शिक्षित युवा राजनीति में आएंगे तो निश्चित तौर पर परिवर्तन दिखेगा। राजनेता या उनके परिवारों से ही चुनावों में नेता क्यों चुने जाते हैं? लोकतंत्र में आमजन की भागीदारी बहुत आवश्यक है। यह तभी होगा जबकि वैज्ञानिक, कृषक, युवा, व्यापारी और सभी तबके-वर्ग के लोग सियासत में उतरेंगे। हमें बदलाव लाना है, तो फिर नई सोच की तरफ बढऩा पड़ेगा।
आशीष कुमावत
कई प्रांतों में एक ही पार्टी के प्रत्याशी को झेलना जनता की मजबूरी बन रही है। समझदार और पढ़े- लिखे लोगों को राजनीति में आने चाहिए। शिक्षक समुदाय बिना किसी भेदभाव के स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। ऐसे लोग सियासत में होंगे तो उनका नजरिया भी विकास पर आधारित होगा। आजादी के शुरुआती साल तक राजनीति में व्यापारी, वकील, शिक्षक, किसान, वैज्ञानिक, कवि-साहित्यकार और अन्य क्षेत्र के लोग प्रतिनिधित्व करते थे।
-महेंद्र बुंदेल
देश में राजनीतिक स्वच्छता भी बहुत जरूरी है। पत्रिका का नजरिया वास्तव में स्वागत योग्य है। नेता कई बार समस्याएं सुनते हैं, लेकिन समाधान त्वरित नहीं होता। कई बार मंत्रालय में भी ऐसे जनप्रतिनिधि होते हैं, जिन्हें ज्यादा जानकारी नहीं होती। जब पढ़-लिखे लोग राजनीति में होंगे तो सरकार का कामकाज भी मजबूत होगा।
-अशोक सिंह शेखावत
आज महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वे राजनीति में बेहतरीन ढंग से प्रतिनिधित्व कर रही हैं। दुर्भाग्य से राजनीतिक दल महिलाओं को ज्यादा भागीदारी का मौका नहीं देते। किसी वर्ग विशेष अथवा धर्म के व्यक्ति को टिकट देने की परम्परा कतई उचित नहीं है। जो चुनाव जीतने के बाद देश या प्रांत की समस्याओं, नीतियों की आवाज नहीं उठाए ऐसे नेताओं का चयन गलत है।
-सरोज कुमावत
समाज में शिक्षित, नौकरीपेशा महिलाओं की तादाद बढ़ रही है। पत्रिका के चेंजमेकर अभियान से महिलाओं को भी जुडऩा चाहिए। राजनीति और देश के माहौल को बेहतर बनाने के लिए यह अच्छा अवसर साबित हो सकता है। जब राजनीतिक वर्चस्व बढ़ेगा तो लोगों का महिलाओं के प्रति नजरिया बदलेगा। महिलाएं बेहतर ढंग से घर-परिवार और राजनीति में तालमेल बिठा सकती है।
-सुनीता भाटी
राजनीति के गंदे खेल जनता बरसों से देखती-सुनती आ रही है। अच्छे लोग राजनीति में आएं यह अब समय की मांग है। अमरीका, जापान, जर्मनी के विकसित होने के कारण वहां की राजनीति में शुचिता है। भारत में इसकी कहीं ना कमी दिखती है। पढ़े-लिखे नौजवान, शिक्षक, वैज्ञानिक, व्यापारी और अन्य लोग राजनीति में आएंगे तो इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। नेताओं को भी अपनी चिरपरिचित शैली में बदलाव कर जनहित के काम ज्यादा करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
-अनुपम माथुर
Published on:
9 Apr 2018, 6:35 AM IST
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