
सफेद दाग की बीमारी छुआछूत की बीमारी नहीं, एकजुट होकर लड़ें
अजमेर. सफेद दाग की बीमारी छुआछूत की बीमारी नहीं है, इसके प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। अगर हम एकजुट होकर इस बीमारी से लड़ेंगे तो इस रोग को जल्द खत्म कर देंगे। सफेद दाग की बीमारी को कुष्ठ रोग मानकर हर कोई मरीज से दूरी बनाता है मगर वास्तव में यह कुष्ठ रोग नहीं है।
त्वचा एवं रति रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार शरीर पर सफेद दाग की बीमारी होने के साथ ही हर कोई भेदभाव सा बर्ताव करते हैं जो गलत है। किसी के जीवन में रंग भरने के लिए सफेद दाग की बीमारी को समझना आवश्यक है। विटिलिगो एक सफेद दाग की बीमारी है। सफेद दाग की बीमारी शरीर की प्रतिरोधात्मक क्षमता में गड़बड़ पैदा होने से होती है। यह रोगाणु, एलर्जी व कुपोषण की बामारी नहीं है, न छुआछूत की बीमारी है। यह केवल शरीर के रंग को ही प्रभावित करती है। यह रोग शरीर की कार्यक्षमता व दिमाग पर कोई असर नहीं डालता है। यह अधिकांश मरीजों में वंशानुगत नहीं होती है।
भ्रांति दूर करने की जरूरत
इस बीमारी के मरीजों को त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह के लिए मरीजों से बातचीत करने पर दिमाग में दूसरों की पैदा की गई भ्रांतियां दूर हो जाती हैं। भ्रांति को भुलाकर सच्ची लगन से मेहनत करते हैं तो जिन्दगी में ऊंचे मुकाम पर पहुंचते हैं।
मरीजों से भेदभाव न करें
आईएडीवीएल राजस्थान के सचिव डॉ. राजकुमार कोठीवाला के अनुसार हमारा दायित्व है कि हम एकजुट होकर इस बीमारी से लड़ें। जब यह छुआछूत की बीमारी है ही नहीं तो इसके मरीजों से भेदभाव न रखें। स्कूलों, महाविद्यालयों व कार्यालयों में इन्हें अपशब्द बोलकर मानसिक पीड़ा ना पहुंचाएं। इस बीमारी का इलाज संभव है।
इलाज पूर्णत: संभव
चर्म यौन एवं कुष्ठ रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल कुमार शर्मा के अनुसार विटिलिगो को सामान्य भाषा में सफेद दाग कहते हैं। विश्व के एक-दो प्रतिशत लोगों में यह बीमारी पाई जाती है। सफेद दाग का इलाज पूर्णत: संभव है।
Published on:
25 Jun 2018, 1:47 PM IST
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