15 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘नाम नहीं, काम देखेगी UP की जनता’, अलीगढ़ में चीफ मुफ्ती ने ओवैसी के सामने रख दी बड़ी शर्त

UP Politics: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में बढ़ती सक्रियता के बीच प्रदेश के चीफ मुफ्ती चौधरी इफराहीम हुसैन ने दिया बड़ा बयान दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ओवैसी के सामने बड़ी शर्त रखी है।

2 min read
Google source verification
Asaduddin Owaisi, Chief Mufti Chaudhary Ifrahim Hussain, Aligarh News, UP Politics,

UP में AIMIM की सक्रियता पर चीफ मुफ्ती ने प्रतिक्रिया दी (फोटो- इफराहीम हुसैन 'Instagram')

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की उत्तर प्रदेश में बढ़ती राजनीतिक हलचलों के बीच प्रदेश के चीफ मुफ्ती चौधरी ने इफराहीम हुसैन का बयान सामने आया है। सोमवार को अलीगढ़ में उन्होंने कहा- यूपी में अब धर्म और जाति की राजनीति नहीं चलेगी। प्रदेश की जनता अब भावनाओं या धार्मिक नारों में बहकर नहीं बल्कि विकास और भाईचारे के आधार पर अपना फैसला करेगी।

काम के नाम पर मिलेगा वोट

यूपी के चीफ मुफ्ती ने कहा कि किसी भी नेता या राजनीतिक पार्टी को जनता का समर्थन तभी हासिल होगा जब वह देश समाज और जनहित को मजबूत करने का काम करेगी। समाज को बांटने वाली राजनीति का अब पहले जैसा कोई असर नहीं होने वाला है। यूपी के मतदाता अब उन नेताओं को चुनेंगे जो गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों की भलाई के लिए जमीन पर काम करेंगे। जो लोग समाज में नफरत खत्म कर भाईचारा बढ़ाएंगे जनता उसी का साथ देगी।

ओवैसी का स्वागत है

असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता को लेकर चीफ मुफ्ती ने कहा कि उत्तर प्रदेश की शानदार परंपरा और संस्कृति के अनुसार, उनका यहां स्वागत है। लेकिन जहां तक राजनीतिक समर्थन देने की बात है तो वह पूरी तरह से उनके व्यवहार, कार्यशैली और जनता के मुद्दों के प्रति उनकी ईमानदारी पर निर्भर करेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि वोट उसी को मिलेगा जो इंसानियत, विकास, राष्ट्रप्रेम और जनकल्याण की बात करेगा।

बदल रहा है यूपी का सियासी मिजाज

चीफ मुफ्ती चौधरी इफराहीम हुसैन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सभी राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। उनके इस बयान को यूपी के मतदाताओं की बदलती राजनीतिक सोच और विकास पर केंद्रित प्राथमिकताओं के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। जनता अब सिर्फ चुनावी भाषण नहीं बल्कि जमीन पर हुए काम का हिसाब मांग रही है।